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Kushinagar News: अधिक लाभ के लिए उन्नत प्रजाति का गन्ना बोने की अपील
Wed, 06 Mar 2024 12:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 06 Mar 2024 12:42 AM IST
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अहिरौली बाजार। ग्राम सभा पकड़ी में मंगलवार को किसानों को वसंत कालीन गन्ना बुआई के प्रति जागरूक किया गया। गन्ने की उन्नत प्रजातियों की बुआई की अपील की गई। पेड़ी प्रवंधन, सहफसली खेती, कीट तथा रोग नियंत्रण के साथ गन्ना विकास की योजनाओं की जानकारी दी गई।
गन्ना किसान संस्थान पिपराइच के सहायक निदेशक ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि गन्ने की अधिक पैदावार के लिए उन्नतशील प्रजातियां जैसे 13235, 9232, 0118, को. लखनऊ 14201 की वसंत कालीन बुआई दो आंख के टुकड़े को ट्राइकोडर्मा के घोल में उपचारित करके करें। उन्होंने कहा कि प्याज, लहसुन, भिंडी आदि की सहफसली खेती से दोगुना लाभ उठाया जा सकता है। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि आधार गन्ना पौधशाला से बीज तैयार कर वितरण करने पर सरकार 50 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान देती है। समिति के सचिव रमेश सिंह ने गन्ना सप्लाई व भुगतान के विषय में जानकारी दी। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रबंध कमेटी के उपाध्यक्ष एसएन त्रिपाठी ने की। गन्ना पर्यवेक्षक नवनीत राय, सुनील कुमार, विनीत सिंह, श्यामनरायण त्रिपाठी, राकेश सिंह, केशव पांडेय आदि ने संबोधित किया। इस दौरान ग्राम प्रधान प्रवीण सिंह, ब्रह्मा सिंह, राजन मिश्र, रामप्रवेश सिंह, शिब्बन सिंह मौजूद रहे।
गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने की दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। गन्ना अनुसंधान केंद्र में मंगलवार को रामकोला समिति व महाराजगंज की घुघली समिति से आए 100 किसानों को प्रशिक्षित किया गया। किसानों को गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने वाले कृषि यंत्रों की जानकारी दी गई। संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. सुभाषचंद्र सिंह ने कहा कि पूर्वांचल में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है। प्रदेश सरकार किसानों के हित में कार्य कर रही है। लेकिन पश्चिमी उत्तरप्रदेश की तुलना में यहां की उत्पादन क्षमता कम है। यदि किसान उन्नत विधि व समुचित प्रबंधन के साथ गन्ने की खेती करें, तो गन्ने की उपज में वृद्धि के साथ उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अर्चना सिराड़ी ने कहा कि गन्ने की उपज बढ़ाने में नवीन कृषि यंत्रों, उन्नतशील प्रजातियों व कीट प्रबंधन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए गन्ना किसानों को इन्हें प्राथमिकता के आधार पर अपनाने की सलाह दी। इसके बाद संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ प्रशिक्षु किसानों ने गन्ना परिक्षेत्र का भ्रमण किया और कृषि यंत्रों के इस्तेमाल से होने वाले लाभ के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण को संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. विनय मिश्र, डॉ. वाईपी भारती, डॉ. कमलकिशोर साहू,डॉ. सत्येंद्र कुमार, डॉ. कृष्णानंद, डॉ. केपी सिंह, अजय राय, संजय शुक्ल, श्रीकृष्ण शुक्ल आदि ने संबोधित किया।
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गन्ना किसान संस्थान पिपराइच के सहायक निदेशक ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि गन्ने की अधिक पैदावार के लिए उन्नतशील प्रजातियां जैसे 13235, 9232, 0118, को. लखनऊ 14201 की वसंत कालीन बुआई दो आंख के टुकड़े को ट्राइकोडर्मा के घोल में उपचारित करके करें। उन्होंने कहा कि प्याज, लहसुन, भिंडी आदि की सहफसली खेती से दोगुना लाभ उठाया जा सकता है। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि आधार गन्ना पौधशाला से बीज तैयार कर वितरण करने पर सरकार 50 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान देती है। समिति के सचिव रमेश सिंह ने गन्ना सप्लाई व भुगतान के विषय में जानकारी दी। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रबंध कमेटी के उपाध्यक्ष एसएन त्रिपाठी ने की। गन्ना पर्यवेक्षक नवनीत राय, सुनील कुमार, विनीत सिंह, श्यामनरायण त्रिपाठी, राकेश सिंह, केशव पांडेय आदि ने संबोधित किया। इस दौरान ग्राम प्रधान प्रवीण सिंह, ब्रह्मा सिंह, राजन मिश्र, रामप्रवेश सिंह, शिब्बन सिंह मौजूद रहे।
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गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने की दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। गन्ना अनुसंधान केंद्र में मंगलवार को रामकोला समिति व महाराजगंज की घुघली समिति से आए 100 किसानों को प्रशिक्षित किया गया। किसानों को गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने वाले कृषि यंत्रों की जानकारी दी गई। संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. सुभाषचंद्र सिंह ने कहा कि पूर्वांचल में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है। प्रदेश सरकार किसानों के हित में कार्य कर रही है। लेकिन पश्चिमी उत्तरप्रदेश की तुलना में यहां की उत्पादन क्षमता कम है। यदि किसान उन्नत विधि व समुचित प्रबंधन के साथ गन्ने की खेती करें, तो गन्ने की उपज में वृद्धि के साथ उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अर्चना सिराड़ी ने कहा कि गन्ने की उपज बढ़ाने में नवीन कृषि यंत्रों, उन्नतशील प्रजातियों व कीट प्रबंधन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए गन्ना किसानों को इन्हें प्राथमिकता के आधार पर अपनाने की सलाह दी। इसके बाद संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ प्रशिक्षु किसानों ने गन्ना परिक्षेत्र का भ्रमण किया और कृषि यंत्रों के इस्तेमाल से होने वाले लाभ के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण को संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. विनय मिश्र, डॉ. वाईपी भारती, डॉ. कमलकिशोर साहू,डॉ. सत्येंद्र कुमार, डॉ. कृष्णानंद, डॉ. केपी सिंह, अजय राय, संजय शुक्ल, श्रीकृष्ण शुक्ल आदि ने संबोधित किया।
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