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Kushinagar News: पहले चेते होते अफसर तो बच गया होता एपी बांध, सीएम के दौरे के बाद राहत कार्य तेज
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तमकुहीरोड। नारायणी (गंडक) नदी का एपी तटबंध पर करीब दस दिन पहले पानी का दबाव बढ़ गया था। गांव वालों का आरोप है कि अगर बाढ़ खंड के अधिकारी उसी समय बोल्डर और मिट्टी मंगा ली होती तो बांध नहीं टूटा होता। मुख्यमंत्री के दौरे के बाद बचाव कार्य में तेजी आई है। मिर्जापुर के अहिरौली से बुधवार को सुबह से ट्रकों से बोल्डर की खेप पहुंचने लगी। बांध टूटने के बाद जो कार्य अब किए जा रहे हैं, उन्हें पहले ही पूरा किया जाना चाहिए था।
बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों ने बताया कि अफसरों की बेपरवाही के कारण ही यह तबाही आई है। मोहन साहनी, विक्रम, हीरालाल, रामायण और रामप्रसाद जैसे बाढ़ प्रभावितों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की। बताया कि मुख्यमंत्री के आगमन के बाद राहत व बचाव कार्य में तेजी आई है। यदि ये कार्य पहले शुरू हो जाते तो बांध टूटने की नौबत नहीं आती। मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था।
राहत कार्यों में तेजी
-मुख्यमंत्री के आगमन के बाद राहत और बचाव कार्यों में तेजी आई है। बुधवार को बांध के किनारे इसका असर साफ दिखाई दिया। ट्रकों से भारी मात्रा में बोल्डर और मिट्टी से भरी बोरियां पहुंचनी शुरू हो गईं। इन सामग्रियों का उपयोग बांध की मरम्मत और उसे मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद ही प्रशासन हरकत में आया है। यह दर्शाता है कि उच्च स्तरीय निगरानी से ही कार्य में गति आती है।
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बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों ने बताया कि अफसरों की बेपरवाही के कारण ही यह तबाही आई है। मोहन साहनी, विक्रम, हीरालाल, रामायण और रामप्रसाद जैसे बाढ़ प्रभावितों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की। बताया कि मुख्यमंत्री के आगमन के बाद राहत व बचाव कार्य में तेजी आई है। यदि ये कार्य पहले शुरू हो जाते तो बांध टूटने की नौबत नहीं आती। मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था।
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राहत कार्यों में तेजी
-मुख्यमंत्री के आगमन के बाद राहत और बचाव कार्यों में तेजी आई है। बुधवार को बांध के किनारे इसका असर साफ दिखाई दिया। ट्रकों से भारी मात्रा में बोल्डर और मिट्टी से भरी बोरियां पहुंचनी शुरू हो गईं। इन सामग्रियों का उपयोग बांध की मरम्मत और उसे मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद ही प्रशासन हरकत में आया है। यह दर्शाता है कि उच्च स्तरीय निगरानी से ही कार्य में गति आती है।
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