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Kushinagar News: मृत अधिवक्ता के नाम से वकालतनामा दाखिल करने का आरोप
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पडरौना। सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन कसया के अधिवक्ता अनूप कुमार त्रिपाठी ने अपने दिवंगत पिता के नाम और कथित जाली हस्ताक्षर से कूटरचित वकालतनामा न्यायालय में दाखिल कर एकपक्षीय निर्णय हासिल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महामंत्री को पत्र देकर मामले की जांच कराने, आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। बार एसोसिएशन के महामंत्री अंबरीष चौबे ने बताया कि इस तरह पत्र संगठन को डाक से भेजने की बात सामने आई हैं, लेकिन अभी इस तरह का पत्र एसोसिएशन को नहीं मिला है। शिकायत पत्र मिलने पर बैठक कर अधिवक्ताओं की सहमति के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिवक्ता अनूप कुमार त्रिपाठी ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय गौरीशंकर त्रिपाठी ने 53 वर्षों तक विधि व्यवसाय किया। कोविड के दौरान तीन मई 2021 को उनका निधन हो गया था।
उनका दावा है कि कुशीनगर में गौरीशंकर त्रिपाठी नाम से उनके पिता ही पंजीकृत अधिवक्ता थे और उनके नाम का कोई दूसरा अधिवक्ता नहीं था। उन्होंने बताया कि सिविल जज जूनियर डिवीजन कसया की अदालत में विचाराधीन वाद एक वाद में प्रतिवादी पक्ष की ओर से वाद पत्र की प्रति प्राप्त करने के लिए प्रार्थना पत्र और वकालतनामा दाखिल किया गया। आरोप है कि इन दस्तावेजों पर स्वर्गीय गौरीशंकर त्रिपाठी के नाम और जाली हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया, जबकि उनका निधन करीब तीन वर्ष पहले हो चुका था। उनका आरोप है कि कूटरचित वकालतनामा के आधार पर न्यायालय की प्रक्रिया को प्रभावित करते हुए एकपक्षीय निर्णय तीन जनवरी 2026 को प्राप्त किया गया। इसके बाद बैनामा निरस्त कराने में इस आदेश का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। उन्होंने बार एसोसिएशन स विशेष जांच समिति गठित कर कूटरचना और जालसाजी में शामिल लोगों तथा इसका लाभ उठाने वाले पक्षकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
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उनका दावा है कि कुशीनगर में गौरीशंकर त्रिपाठी नाम से उनके पिता ही पंजीकृत अधिवक्ता थे और उनके नाम का कोई दूसरा अधिवक्ता नहीं था। उन्होंने बताया कि सिविल जज जूनियर डिवीजन कसया की अदालत में विचाराधीन वाद एक वाद में प्रतिवादी पक्ष की ओर से वाद पत्र की प्रति प्राप्त करने के लिए प्रार्थना पत्र और वकालतनामा दाखिल किया गया। आरोप है कि इन दस्तावेजों पर स्वर्गीय गौरीशंकर त्रिपाठी के नाम और जाली हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया, जबकि उनका निधन करीब तीन वर्ष पहले हो चुका था। उनका आरोप है कि कूटरचित वकालतनामा के आधार पर न्यायालय की प्रक्रिया को प्रभावित करते हुए एकपक्षीय निर्णय तीन जनवरी 2026 को प्राप्त किया गया। इसके बाद बैनामा निरस्त कराने में इस आदेश का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। उन्होंने बार एसोसिएशन स विशेष जांच समिति गठित कर कूटरचना और जालसाजी में शामिल लोगों तथा इसका लाभ उठाने वाले पक्षकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
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