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नहीं थम रही नदी की कटान
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करोड़ों खर्च के बावजूद अमवाखास तटबंध असुरक्षित
गंडक नदी से बचाने के लिए बंधे पर खर्च होती है काफी रकम
संवाद न्यूज एजेंसी
दुदही। क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव के सामने अमवाखास तटबंध को बचाने के लिए दो वर्ष में लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। फिर भी बंधा सुरक्षित नहीं है।
वर्ष 2019 में इसी तटबंध पर छह परियोजनाओं के कार्य लगभग 60 करोड़ रुपये में हुआ था। वर्ष 2020 में भी किलोमीटर 8.600 पर नौ करोड़ 30 लाख की परियोजना के तहत कार्य हुआ था, लेकिन गंडक नदी का डिस्चार्ज कम होने के बावजूद भी बंधे के संवेदनशील स्थलों पर कटान का खतरा बना हुआ है। अमवाखास तटबंध लक्ष्मीपुर गांव के सामने विकराल रूप ले लिया है। करीब 300 मीटर स्पर और फसलों को बहाने के बाद नदी मुख्य बंधे से सटकर बह रही है। आसपास के लोगों का कहना है कि नदी कभी नुकसान पहुंचा सकती है। वैसे तो नदी अमवाखास तटबंध पर लक्ष्मीपुर गांव के सामने छह अगस्त से ही कटान कर रही है। उन दिनों नदी बंधे से करीब दो किलोमीटर दूरी पर बह रही थी, लेकिन अब मुख्य बंधे से सटकर बह रही है। कभी रिंग बांध तो कभी स्पर के किलोमीटर सात अथवा कभी किलोमीटर आठ पर कटान कर रही है। लोगों का कहना है कि 17 वर्ष पहले का इतिहास गंडक नदी दोहरा सकती है। नदी एक जगह 200 मीटर, दूसरी जगह 30 मीटर और तीसरी जगह मुख्य बंधे के पास करीब पांच मीटर कटान कर रही है।
लक्ष्मीपुर गांव के 70 वर्षीय जगदेव शुकवरिया, बसंती, अशर्फी, अशोक यादव, कृष्णा पटेल, शिवजी कुशवाहा ने बताया कि जुलाई, 2002 में गंडक नदी में छह लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से नदी ने काफी तबाही मचाई थी। मौजूदा समय में बंधे की दशा और कटान को देखकर इसके किनारे बसे लोग चिंतित हैं। क्योंकि अभी सोमवार को ही बंधे को बचाने के लिए बना स्पर 30 मीटर कट गया था, जिसकी वजह से नदी अब सीधे बंधे में टकराने लगी है। यह कटान किलोमीटर 700 और 7.50 के बीच हुई थी। इसके दो दिन पहले भी 200 मीटर स्पर कट गया था। विभाग बोरी में मिट्टी भरवाकर कटान रोकने का प्रयास किया था। इस संबंध में बाढ़ खंड के एक्सईएन महेश सिंह ने कहा कि बचाव कार्य में कोई कमी नहीं की जा रही है। अमवाखास तटबंध पर गंडक नदी का दबाव बढ़ा है। बचाव कार्य कराया जा रहा है। किसी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
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गंडक नदी से बचाने के लिए बंधे पर खर्च होती है काफी रकम
संवाद न्यूज एजेंसी
दुदही। क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव के सामने अमवाखास तटबंध को बचाने के लिए दो वर्ष में लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। फिर भी बंधा सुरक्षित नहीं है।
वर्ष 2019 में इसी तटबंध पर छह परियोजनाओं के कार्य लगभग 60 करोड़ रुपये में हुआ था। वर्ष 2020 में भी किलोमीटर 8.600 पर नौ करोड़ 30 लाख की परियोजना के तहत कार्य हुआ था, लेकिन गंडक नदी का डिस्चार्ज कम होने के बावजूद भी बंधे के संवेदनशील स्थलों पर कटान का खतरा बना हुआ है। अमवाखास तटबंध लक्ष्मीपुर गांव के सामने विकराल रूप ले लिया है। करीब 300 मीटर स्पर और फसलों को बहाने के बाद नदी मुख्य बंधे से सटकर बह रही है। आसपास के लोगों का कहना है कि नदी कभी नुकसान पहुंचा सकती है। वैसे तो नदी अमवाखास तटबंध पर लक्ष्मीपुर गांव के सामने छह अगस्त से ही कटान कर रही है। उन दिनों नदी बंधे से करीब दो किलोमीटर दूरी पर बह रही थी, लेकिन अब मुख्य बंधे से सटकर बह रही है। कभी रिंग बांध तो कभी स्पर के किलोमीटर सात अथवा कभी किलोमीटर आठ पर कटान कर रही है। लोगों का कहना है कि 17 वर्ष पहले का इतिहास गंडक नदी दोहरा सकती है। नदी एक जगह 200 मीटर, दूसरी जगह 30 मीटर और तीसरी जगह मुख्य बंधे के पास करीब पांच मीटर कटान कर रही है।
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लक्ष्मीपुर गांव के 70 वर्षीय जगदेव शुकवरिया, बसंती, अशर्फी, अशोक यादव, कृष्णा पटेल, शिवजी कुशवाहा ने बताया कि जुलाई, 2002 में गंडक नदी में छह लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से नदी ने काफी तबाही मचाई थी। मौजूदा समय में बंधे की दशा और कटान को देखकर इसके किनारे बसे लोग चिंतित हैं। क्योंकि अभी सोमवार को ही बंधे को बचाने के लिए बना स्पर 30 मीटर कट गया था, जिसकी वजह से नदी अब सीधे बंधे में टकराने लगी है। यह कटान किलोमीटर 700 और 7.50 के बीच हुई थी। इसके दो दिन पहले भी 200 मीटर स्पर कट गया था। विभाग बोरी में मिट्टी भरवाकर कटान रोकने का प्रयास किया था। इस संबंध में बाढ़ खंड के एक्सईएन महेश सिंह ने कहा कि बचाव कार्य में कोई कमी नहीं की जा रही है। अमवाखास तटबंध पर गंडक नदी का दबाव बढ़ा है। बचाव कार्य कराया जा रहा है। किसी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
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