प्रोजेक्ट सनकैचर: स्पेस पहुंचे गूगल के AI चिप्स, सैटेलाइट का सफल लॉन्च; क्या अंतरिक्ष में बनेंगे डेटा सेंटर?

जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति शुक्ला
Fri, 02 Oct 2026 09:58 AM IST
सार

गूगल ने प्लैनेट लैब्स और स्पेसएक्स के साथ मिलकर अंतरिक्ष में अपना पहला प्रोटोटाइप सैटेलाइट सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। 'प्रोजेक्ट सनकैचर' के तहत भेजे गए इस सैटेलाइट में गूगल के खास TPU चिप्स लगे हैं। आइए समझते हैं इस एतिहासिक मूनशॉट प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से।

Google Takes AI Space: Project Suncatcher Satellite Successfully Launched
प्रोजेक्ट संकैचर का सफल लॉन्च - फोटो : @sundarpichai

    विस्तार

    गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई ने कंपनी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि की घोषणा की है। कंपनी ने अंतरिक्ष में कंप्यूटिंग पावर रखने के सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में पहली सफलता हासिल कर ली है। गूगल ने अपने पार्टनर प्लैनेट लैब्स और स्पेसएक्स के साथ मिलकर एक प्रोटोटाइप सैटेलाइट का सफल लॉन्च किया है। यह किसी भी बड़ी टेक कंपनी की ओर से अंतरिक्ष में एआई चिप्स भेजकर उनके वास्तविक परीक्षण की पहली एतिहासिक शुरुआत है।

    कैसे हुआ यह लॉन्च?

    यह सैटेलाइट स्पेसएक्स के ट्रांसपोर्टर-18 (Transporter-18) राइडशेयर मिशन के जरिए फाल्कन-9 (Falcon-9) रॉकेट से लॉन्च किया गया है। लॉन्चिंग कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस (Vandenberg Space Force Base) से हुई। सफल लॉन्च के बाद सुंदर पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा कि 'मुझे वह पहली मीटिंग याद है जिसमें टीम ने स्पेस में कंप्यूट रखने का आइडिया पेश किया था, बहुत रोमांचक विचार। आज हमारे पार्टनर @planet के प्रोटोटाइप सैटेलाइट का सफल लॉन्च दिखाता है कि हम कितनी दूर आ चुके हैं... और अभी कितना आगे जाना बाकी है। @SpaceX को धन्यवाद लिफ्ट के लिए, बूस्टर लैंडिंग भी शानदार रही '

    क्या है प्रोजेक्ट संकैचर?

    प्रोजेक्ट संकैचर गूगल का एक ऐसा रिचर्स प्रोजेक्ट है, जिसमें अंतरिक्ष में एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने की संभावना का अध्ययन किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत सैटेलाइट में गूगल के खुद के बनाए गए टीपीयू यानी टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाए गए हैं, जो खासतौर पर एआई वर्कलोड के लिए डिजाइन किए गए चिप्स हैं।

    इस परीक्षण के जरिए कंपनी यह समझना चाहती है कि अंतरिक्ष का वातावरण एआई कंप्यूटिंग के लिए कितना उपयोगी हो सकता है और वहां मौजूद चुनौतियों के बीच ये चिप्स किस तरह काम करते हैं।

    प्रोजेक्ट संकैचर लॉन्च
    प्रोजेक्ट संकैचर लॉन्च - फोटो : @sundarpichai

    स्पेस में ही एआई डेटा सेंटर लगाने का आइडिया क्यों?

    गूगल के अनुसार, दुनिया भर में एआई का इस्तेमाल अब तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ ही कंम्यूटिंग पावर की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। एआई मॉडल को ट्रेन करने और चलाने के लिए बड़े डेटा सेंटर की जरूरत होती है, जिन्हें काफी मात्रा में बिजली और कूलिंग की आवश्यकता पड़ती है।

    गूगल के प्रोजेक्ट सनकैचर के पीछे भी कुछ ऐसा ही अहम विचार है कि अंतरिक्ष में सोलर पावर की उपलब्धता का फायदा उठाया जा सकता है। लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट पृथ्वी की तुलना में लगभग लगातार सूर्य की रोशनी के संपर्क में रह सकते हैं। इससे वहां सोलर पावर जनरेशन की क्षमता काफी ज्यादा हो सकती है।

    यही वजह है कि गूगल यह जांच रहा है कि क्या भविष्य में स्पेस में बड़े पैमाने पर एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया जा सकता है।

    अंतरिक्ष में टीपीयू की होगी असली परीक्षा

    स्पेस में एआई चिप्स भेजना अपने आप में पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती यह भी देखना है कि ये चिप्स अंतरिक्ष के कठिन वातावरण में लंबे समय तक किस तरह काम करते हैं।

    इस परीक्षण में स्पेस का रेडिएशन, तापमान में होने वाले उतार-चढ़ाव और दूसरी पर्यावरणीय चुनौतियां महत्वपूर्ण होंगी। इन परिस्थितियों में टीपीयू का प्रदर्शन कैसा रहता है, इससे प्रोजेक्ट की आगे की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है। गूगल के अनुसार, टीम ने सैटेलाइट से संपर्क स्थापित कर लिया है और यह उम्मीद के मुताबिक काम कर रहा है।

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