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अब पता चला वह तो 22 वर्ष पहले ही ‘मर’ चुका है
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अब पता चला वह तो 22 वर्ष पहले ही ‘मर’ चुका है
सौरहा खुर्द के रामप्यारे मंगलवार को पहुंचे थे एडीओ पंचायत के पास
पिता के निधन के बाद वरासत कराने गए तो खुद के ‘मृतक’ होने की जानकारी हुई
सुमंत कुशवाहा
पकड़ियार बाजार (कुशीनगर)। सरकारी अभिलेखों में कैसे-कैसे खेल होते हैं, इसका एक नजारा मंगलवार को कोटवा स्थित नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के एडीओ पंचायत दफ्तर में दिखा। यहां ग्राम सभा सौरहा खुर्द के 50 वर्षीय रामप्यारे कुशवाहा खुद के जिंदा होने का सुबूत देने पहुंचे थे जो सरकारी अभिलेख में 22 वर्ष पहले ही ‘मर’ गए थे। रामप्यारे को भी इसकी जानकारी एक दिन पहले हुई। फिलहाल एडीओ पंचायत को पत्रक देकर उन्होंने प्रकरण की जांच की मांग की है।
सौरहा खुर्द के चरिघरवा निवासी रामप्यारे कुशवाहा (50) के पिता रामकवल का निधन नवंबर में हुआ था। रामप्यारे पांच भाई हैं और पिता की मौत के बाद राजस्व अभिलेखों में नाम चढ़वाने के लिए सोमवार को जब परिवार रजिस्टर की नकल लेने सचिव के पास पहुंचे तो सचिव ने बताया कि मौजूद अभिलेख में 1997 में ही वह मृतक दर्ज हैं। रामप्यारे के तो पैरों तले जमीन ही खिसक गई। उन्होंने सचिव से खुद को जीवित बताया लेकिन उसने अभिलेख का हवाला देते हुए जिंदा मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद रामप्यारे मंगलवार को एडीओ पंचायत रविंद्र प्रसाद के कार्यालय पहुंचे और आधार कार्ड, बैंक पास बुक व ग्राम प्रधान की ओर से जारी निवास प्रमाण पत्र के साथ खुद को जीवित बताते हुए अभिलेखों में सुधार की गुहार लगाई। रामप्यारे ने अपने जीवित होने के लिए नोटरी बयान हल्फी भी दी।
एडीओ पंचायत नेबुआ नौरंगिया रविंद्र प्रसाद का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। अभिलेखों की जांच की जा रहा है। सीडीओ आंनद कुमार का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी। अगर वह व्यक्ति जिंदा है और उसके पास आधार कार्ड, बैंक पास बुक समेत तमाम अभिलेख हैं तो उसकी पुष्टि कराकर कुटुंब रजिस्टर में हुई गड़बड़ी को दूर कराया जाएगा, साथ ही गलती के लिए जिम्मेदार कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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सौरहा खुर्द के रामप्यारे मंगलवार को पहुंचे थे एडीओ पंचायत के पास
पिता के निधन के बाद वरासत कराने गए तो खुद के ‘मृतक’ होने की जानकारी हुई
सुमंत कुशवाहा
पकड़ियार बाजार (कुशीनगर)। सरकारी अभिलेखों में कैसे-कैसे खेल होते हैं, इसका एक नजारा मंगलवार को कोटवा स्थित नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के एडीओ पंचायत दफ्तर में दिखा। यहां ग्राम सभा सौरहा खुर्द के 50 वर्षीय रामप्यारे कुशवाहा खुद के जिंदा होने का सुबूत देने पहुंचे थे जो सरकारी अभिलेख में 22 वर्ष पहले ही ‘मर’ गए थे। रामप्यारे को भी इसकी जानकारी एक दिन पहले हुई। फिलहाल एडीओ पंचायत को पत्रक देकर उन्होंने प्रकरण की जांच की मांग की है।
सौरहा खुर्द के चरिघरवा निवासी रामप्यारे कुशवाहा (50) के पिता रामकवल का निधन नवंबर में हुआ था। रामप्यारे पांच भाई हैं और पिता की मौत के बाद राजस्व अभिलेखों में नाम चढ़वाने के लिए सोमवार को जब परिवार रजिस्टर की नकल लेने सचिव के पास पहुंचे तो सचिव ने बताया कि मौजूद अभिलेख में 1997 में ही वह मृतक दर्ज हैं। रामप्यारे के तो पैरों तले जमीन ही खिसक गई। उन्होंने सचिव से खुद को जीवित बताया लेकिन उसने अभिलेख का हवाला देते हुए जिंदा मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद रामप्यारे मंगलवार को एडीओ पंचायत रविंद्र प्रसाद के कार्यालय पहुंचे और आधार कार्ड, बैंक पास बुक व ग्राम प्रधान की ओर से जारी निवास प्रमाण पत्र के साथ खुद को जीवित बताते हुए अभिलेखों में सुधार की गुहार लगाई। रामप्यारे ने अपने जीवित होने के लिए नोटरी बयान हल्फी भी दी।
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एडीओ पंचायत नेबुआ नौरंगिया रविंद्र प्रसाद का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। अभिलेखों की जांच की जा रहा है। सीडीओ आंनद कुमार का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी। अगर वह व्यक्ति जिंदा है और उसके पास आधार कार्ड, बैंक पास बुक समेत तमाम अभिलेख हैं तो उसकी पुष्टि कराकर कुटुंब रजिस्टर में हुई गड़बड़ी को दूर कराया जाएगा, साथ ही गलती के लिए जिम्मेदार कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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