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इज्जत का सवाल, फिर भी जुगाड़ से चला रहीं काम
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इज्जत का सवाल, फिर भी जुगाड़ से चला रहीं काम
मुसहर बस्ती में जुगाड़ से बने स्नान घर में स्नान करतीं हैं महिलाएं
बोरी, चारपाई और पेड़ों की आड़ में नहाने को मजबूर
सुधीर कुमार मिश्र
पडरौना। जिले के मुसहर और अनुसूचित जाति की बस्तियों में महिलाओं के लिए स्नान घर की सुविधा मुहैया नहीं हो सकीं। मोहल्ले में स्नान घर नहीं होने से महिलाएं बोरी, चारपाई आदि के जुगाड़ से बने स्नान घर में नहाती हैं।
महिलाओं का कहना है कि आवास, शौचालय के साथ यदि स्नान घर भी बना दिया जाए तो उन्हें बेपरदा होने से बचाया जा सकता है। जिले में 160 गांव में मुसहर रहते हैं। पडरौना, विशुनपुरा, दुदही, कसया और रामकोला में इनकी संख्या अधिक है। इन सभी जगहों पर करीब 22 हजार से अधिक परिवार रहते हैं।
मुसहर परिवारों को सुविधा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। इसके तहत करीब-करीब सभी परिवारों के पास शौचालय बन गए हैं। इससे महिलाओं को खुले में शौच जाने से छुटकारा मिल गया, लेकिन अनुसूचित जाति की बस्तियों और मुसहरों के मोहल्लों में महिलाओं के लिए स्नान घर नहीं बनवाया गया। इससे वहां रहने वाली महिलाओं को खुले में नहाना पड़ता है।
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नहाने के दौरान महिलाएं, किशोरियां और युवतियां चारपाई, साड़ियों, बोरियों या अन्य कपड़ों से स्नान घर बनाकर नहाती हैं। गरीब परिवारों में बमुश्किल रोजी रोटी का जुगाड़ हो पाता है। ऐसे में उनके लिए ईंट और सीमेंट से स्नान घर बना पाना मुश्किल है। मुसहर आबादी में रहने वालों का कहना है कि परिवार की बहू-बेटियों के लिए प्रदेश सरकार की तरफ से स्नान घर भी बनवाना चाहिए।
दुदही ब्लॉक क्षेत्र के रामपुरपट्टी गांव के मुनेश्वर मुसहर की पत्नी गिरजा देवी ने बताया कि नहाते समय हमेशा लोगों की आहटों पर ध्यान देेना पड़ता है। चूड़ी या पायल की आवाज से समझ में आता है कि महिला आ रही है। परिवार के पुरुष खांसते हुए निकलते हैं। संवाद
शादी के बाद से खुले में नहा रहे हैं। घर के बाहर सड़क है। किसी न किसी का आवागमन होता रहता है। घर के लोग तो मुंह मोड़ लेते हैं, लेकिन बाहरी लोग ताक झांक करते हैं। ऐसे में साड़ी का पर्दा डालकर नहाना पड़ता है।
सरोज देवी
...
घर के पुरुष जब काम पर चले जाते हैं तब महिलाएं नहाती हैं। यदि उन्हें कहीं नहीं जाना होता है तो हम सुबह जल्दी उठकर नहाते हैं।
बुचिया देवी
...
नहाते समय घर के बड़े बुजुर्गों का ध्यान रखना पड़ता है। कोई पुरुष नहाते समय देख न ले, इसलिए भोर में ही नहाना पड़ता है।
चंद्रावती देवी
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मुसहर बस्ती में जुगाड़ से बने स्नान घर में स्नान करतीं हैं महिलाएं
बोरी, चारपाई और पेड़ों की आड़ में नहाने को मजबूर
सुधीर कुमार मिश्र
पडरौना। जिले के मुसहर और अनुसूचित जाति की बस्तियों में महिलाओं के लिए स्नान घर की सुविधा मुहैया नहीं हो सकीं। मोहल्ले में स्नान घर नहीं होने से महिलाएं बोरी, चारपाई आदि के जुगाड़ से बने स्नान घर में नहाती हैं।
महिलाओं का कहना है कि आवास, शौचालय के साथ यदि स्नान घर भी बना दिया जाए तो उन्हें बेपरदा होने से बचाया जा सकता है। जिले में 160 गांव में मुसहर रहते हैं। पडरौना, विशुनपुरा, दुदही, कसया और रामकोला में इनकी संख्या अधिक है। इन सभी जगहों पर करीब 22 हजार से अधिक परिवार रहते हैं।
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मुसहर परिवारों को सुविधा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। इसके तहत करीब-करीब सभी परिवारों के पास शौचालय बन गए हैं। इससे महिलाओं को खुले में शौच जाने से छुटकारा मिल गया, लेकिन अनुसूचित जाति की बस्तियों और मुसहरों के मोहल्लों में महिलाओं के लिए स्नान घर नहीं बनवाया गया। इससे वहां रहने वाली महिलाओं को खुले में नहाना पड़ता है।
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नहाने के दौरान महिलाएं, किशोरियां और युवतियां चारपाई, साड़ियों, बोरियों या अन्य कपड़ों से स्नान घर बनाकर नहाती हैं। गरीब परिवारों में बमुश्किल रोजी रोटी का जुगाड़ हो पाता है। ऐसे में उनके लिए ईंट और सीमेंट से स्नान घर बना पाना मुश्किल है। मुसहर आबादी में रहने वालों का कहना है कि परिवार की बहू-बेटियों के लिए प्रदेश सरकार की तरफ से स्नान घर भी बनवाना चाहिए।
दुदही ब्लॉक क्षेत्र के रामपुरपट्टी गांव के मुनेश्वर मुसहर की पत्नी गिरजा देवी ने बताया कि नहाते समय हमेशा लोगों की आहटों पर ध्यान देेना पड़ता है। चूड़ी या पायल की आवाज से समझ में आता है कि महिला आ रही है। परिवार के पुरुष खांसते हुए निकलते हैं। संवाद
शादी के बाद से खुले में नहा रहे हैं। घर के बाहर सड़क है। किसी न किसी का आवागमन होता रहता है। घर के लोग तो मुंह मोड़ लेते हैं, लेकिन बाहरी लोग ताक झांक करते हैं। ऐसे में साड़ी का पर्दा डालकर नहाना पड़ता है।
सरोज देवी
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घर के पुरुष जब काम पर चले जाते हैं तब महिलाएं नहाती हैं। यदि उन्हें कहीं नहीं जाना होता है तो हम सुबह जल्दी उठकर नहाते हैं।
बुचिया देवी
...
नहाते समय घर के बड़े बुजुर्गों का ध्यान रखना पड़ता है। कोई पुरुष नहाते समय देख न ले, इसलिए भोर में ही नहाना पड़ता है।
चंद्रावती देवी