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हड़ताल के चलते भटकते रहे फरियादी
Kushinagar
Updated Wed, 13 Nov 2013 05:40 AM IST
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पडरौना। राज्य कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद पूरे दिन फरियादी दर-दर भटकते रहे। कर्मचारी अपनी मांगों के लिए हड़ताल के समर्थन में धरना दे रहे थे। जिला मुख्यालय स्थित लगभग सभी विभागों के अधिकांश कर्मचारियों के दफ्तरों में ताले लटक रहे थे तो वहीं जो आफिस खुले भी थे वहां के कर्मचारियों की कुर्सियां खाली थीं। विभिन्न कार्यों से तहसील और विकास भवन को आए लोग मायूस होकर वापस लौटना पड़ा।
मंगलवार को पडरौना तहसील में अपने गांव के अवैध निर्माण को रोकने की फरियाद लेकर आए दमवतिया निवासी अरुण तिवारी पूरे तहसील का चक्कर काटने के बाद मायूस होकर वापस चले गए। उनके अनुसार उन्हें किसी भी आफिस में कोई नहीं मिला। सूरजनगर के अलिसेर तथा मरियम नेशा अपनी जमीन की पैमाइश कराने के लिए पडरौना तहसील आए थे। लेखपाल संघ भी हड़ताल में शामिल है, इसलिए इन्हें भी वापस जाना पड़ा। इनका कहना है कि आने-जाने का किराया तो गया ही, पूरे दिन की मजदूरी भी नहीं हो पाई। रामकोला विकास खंड के डम्मर छपरा निवासी रामनरायन यादव तथा रामकोला के पूरन यादव अपने पेंशन के संबंध में जानकरी लेने के लिए विकास भवन स्थित समाज कल्याण विभाग के दफ्तर पहुंचे थे। दफ्तर में लटक रहे ताले को देखने के बाद अगल -बगल के लोगों से पूछते रहे कि विभाग कब खुलेगा। जब इन्हें मालूम हुआ कि हड़ताल है तो ये लोग भी मायूस होकर वापस चले गए। यहीं बगल के आफिस में जमुआन से आए बैजनाथ टहलते मिले। इनका कहना था कि वह अपनी बेटी के शादी के लिए मिलने वाले अनुदान के बारे में पता करने आए थे, लेकिन आफिस में ताला लटक रहा है। इनका कहना था कि समय और किराया दोनों का नुकसान हुआ। विकास भवन स्थित ग्राम्य विकास अभिकरण के कार्यालय में शिकायती पत्र देने के लिए आए हरैया बुजुर्ग के उदित सिंह भी संबंधित दफ्तर में ताला देखकर वापस चले गए। सेवरही से अपने बंद पेंशन के बारे में जानकारी लेने आए हरिकेश पासवान का कहना था कि वह कई बार आ चुके हैं। आज के लिए बुलाया गया था और जब पहुंचा तो कार्यालय में ताला लटकता मिला।
हड़ताल के वजह से विकास भवन स्थित लगभग सभी विभागों के कर्मचारियों के आफिसों में ताले लटक रहे थे । तहसील परिसर स्थित आफिसों के ताले तो खुले थे, लेकिन कुर्सियां खाली रहीं। कुछ अधिकारी अपने आफिस में बैठे जरूर थे, लेकिन बाबुओं की हड़ताल से वे लोग कुछ भी करने में असमर्थ थे।
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इनसेट ---
सूनी रहीं विकास भवन की गलियां
पडरौना। आए फरियादियों के कारण चहल -पहल से मशगूल रहने वाली विकास भवन की गलियां कर्मचारियों की हड़ताल से पूरे दिन सूनी रहीं। आफिसों में ताले लटक रहे थे। इक्का-दुक्का लोग जो विकास भवन में आ जा रहे थे, वे भी निराश होकर वापस हो रहे थे। जो विकास भवन कार्य दिवसों के दिन गुलजार रहा करता था, वह आज सूना-सूना सा दिखाई दे रहा था। रुक-रुक कर हड़ताली कर्मचारियों के नारे इस सन्नाटे को तोड़ते रहे। विकास भवन की दूसरी मंजिल का सन्नाटा फरियादियों के कदमों की आहट से टूटता था।
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मंगलवार को पडरौना तहसील में अपने गांव के अवैध निर्माण को रोकने की फरियाद लेकर आए दमवतिया निवासी अरुण तिवारी पूरे तहसील का चक्कर काटने के बाद मायूस होकर वापस चले गए। उनके अनुसार उन्हें किसी भी आफिस में कोई नहीं मिला। सूरजनगर के अलिसेर तथा मरियम नेशा अपनी जमीन की पैमाइश कराने के लिए पडरौना तहसील आए थे। लेखपाल संघ भी हड़ताल में शामिल है, इसलिए इन्हें भी वापस जाना पड़ा। इनका कहना है कि आने-जाने का किराया तो गया ही, पूरे दिन की मजदूरी भी नहीं हो पाई। रामकोला विकास खंड के डम्मर छपरा निवासी रामनरायन यादव तथा रामकोला के पूरन यादव अपने पेंशन के संबंध में जानकरी लेने के लिए विकास भवन स्थित समाज कल्याण विभाग के दफ्तर पहुंचे थे। दफ्तर में लटक रहे ताले को देखने के बाद अगल -बगल के लोगों से पूछते रहे कि विभाग कब खुलेगा। जब इन्हें मालूम हुआ कि हड़ताल है तो ये लोग भी मायूस होकर वापस चले गए। यहीं बगल के आफिस में जमुआन से आए बैजनाथ टहलते मिले। इनका कहना था कि वह अपनी बेटी के शादी के लिए मिलने वाले अनुदान के बारे में पता करने आए थे, लेकिन आफिस में ताला लटक रहा है। इनका कहना था कि समय और किराया दोनों का नुकसान हुआ। विकास भवन स्थित ग्राम्य विकास अभिकरण के कार्यालय में शिकायती पत्र देने के लिए आए हरैया बुजुर्ग के उदित सिंह भी संबंधित दफ्तर में ताला देखकर वापस चले गए। सेवरही से अपने बंद पेंशन के बारे में जानकारी लेने आए हरिकेश पासवान का कहना था कि वह कई बार आ चुके हैं। आज के लिए बुलाया गया था और जब पहुंचा तो कार्यालय में ताला लटकता मिला।
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हड़ताल के वजह से विकास भवन स्थित लगभग सभी विभागों के कर्मचारियों के आफिसों में ताले लटक रहे थे । तहसील परिसर स्थित आफिसों के ताले तो खुले थे, लेकिन कुर्सियां खाली रहीं। कुछ अधिकारी अपने आफिस में बैठे जरूर थे, लेकिन बाबुओं की हड़ताल से वे लोग कुछ भी करने में असमर्थ थे।
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सूनी रहीं विकास भवन की गलियां
पडरौना। आए फरियादियों के कारण चहल -पहल से मशगूल रहने वाली विकास भवन की गलियां कर्मचारियों की हड़ताल से पूरे दिन सूनी रहीं। आफिसों में ताले लटक रहे थे। इक्का-दुक्का लोग जो विकास भवन में आ जा रहे थे, वे भी निराश होकर वापस हो रहे थे। जो विकास भवन कार्य दिवसों के दिन गुलजार रहा करता था, वह आज सूना-सूना सा दिखाई दे रहा था। रुक-रुक कर हड़ताली कर्मचारियों के नारे इस सन्नाटे को तोड़ते रहे। विकास भवन की दूसरी मंजिल का सन्नाटा फरियादियों के कदमों की आहट से टूटता था।