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सप्लाई, मार्केटिंग इंस्पेक्टर की कमी
Kushinagar
Updated Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
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पडरौना। सार्वजनिक वितरण प्रणाली की धांधली को रोकना मुश्किल हो गया है। वजह यह कि कुशीनगर जनपद में सप्लाई इंस्पेक्टर और मार्केटिंग इंस्पेक्टर की कमी है। पूरे जिले में मात्र चार मार्केटिंग इंस्पेक्टर बचे हैं, जबकि गोदामों की संख्या 13 है। इसी तरह सप्लाई इंस्पेक्टर भी दो ही बचे हैं। जबकि जिले में 1450 राशन की दुकानें हैं। जनपद के दो गोदाम बाबुओं के भरोसे हैं।
कुशीनगर जनपद के 14 ब्लाकों में मार्केटिंग विभाग के 13 गोदाम हैं। हर महीने की 23 से 30 तारीख तक इन गोदामों से कोटेदार राशन का उठान करते हैं। मध्याह्न भोजन के लिए राशन भी इन्हीं गोदामों से जाता है। इसके अलावा रबी और खरीफ के सीजन में धान, गेहूं की खरीद भी इन्हीं मार्केटिंग इंस्पेक्टरों के सहारे होती है। गोदाम में आए राशन और निकासी का पूरा ब्योरा इन्हें ही रखना होता है। इसी तरह प्रत्येक तहसील में आपूर्ति विभाग का एक इंस्पेक्टर होता है। सप्लाई इंस्पेक्टर के जिम्मे कोटे की दुकान की जानकारी, राशनकार्डों का ब्योरा, दुकान की शिकायत मिलने पर जांच आदि का कार्य होता है। परंतु कुशीनगर जनपद में यह पूरी व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। स्थिति यह है कि पूरे जिले में मात्र चार मार्केटिंग इंस्पेक्टर बचे हैं, जबकि सप्लाई इंस्पेक्टरों की संख्या भी दो ही है। आपूर्ति विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस समय पडरौना के मार्केटिंग इंस्पेक्टर गोरख यादव के जिम्मे विशुनपुरा, नेबुआ नौरंगिया और खड्डा के गोदाम का भी चार्ज है। हाटा के मार्केटिंग इंस्पेक्टर लाल बहादुर गुप्ता के पास रामकोला और कप्तानगंज का भी चार्ज है। यहां यह बता दें कि हाटा में मोतीचक ब्लाक का भी गोदाम है। इस तरह इनके पास चार ब्लाकों का जिम्मा है। इसी तरह तमकुहीरोड के मार्केटिंग इंस्पेक्टर वाल्मिकी सिंह के पास तमकुहीराज का भी चार्ज है। कसया के मार्केटिंग इंस्पेक्टर आरके मिश्रा कसया व फाजिलनगर दोनों ब्लाक देख रहे हैं। सुकरौली और दुदही ब्लाक के गोदाम का चार्ज तो विभाग ने लिपिकों को दे रखा है। यही हाल सप्लाई इंस्पेक्टरों का भी है। पूरे जिले में मात्र दो सप्लाई इंस्पेक्टर हैं। दोनों के पास दो-दो तहसीलों का चार्ज है। मार्केटिंग और सप्लाई इंस्पेक्टरों की इस भारी कमी का सीधा असर राशन उठान से लगायत वितरण तक पर पड़ रहा है। जांच के अभाव में कोटेदारों की मनमानी पर अंकुश लगाने वाला भी कोई नहीं बचा है।
उपलब्ध संसाधनों से काम चलाया जा रहा
जिले में मार्केटिंग और सप्लाई इंस्पेक्टरों की किल्लत पर जिला पूर्ति अधिकारी संजीव कुमार का कहना है कि इससे काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लेकिन विकल्प के अभाव में जो हैं, उन्हीं से सामंजस्य बनाकर काम कराया जा रहा है। डिप्टी आरएमओ रूपेश कुमार सिंह का कहना है कि मार्केटिंग इंस्पेक्टरों की कमी पूरे प्रदेश में है। शासन के निर्देश पर ही एक के जिम्मे कई ब्लाक का चार्ज दिया गया है।
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कुशीनगर जनपद के 14 ब्लाकों में मार्केटिंग विभाग के 13 गोदाम हैं। हर महीने की 23 से 30 तारीख तक इन गोदामों से कोटेदार राशन का उठान करते हैं। मध्याह्न भोजन के लिए राशन भी इन्हीं गोदामों से जाता है। इसके अलावा रबी और खरीफ के सीजन में धान, गेहूं की खरीद भी इन्हीं मार्केटिंग इंस्पेक्टरों के सहारे होती है। गोदाम में आए राशन और निकासी का पूरा ब्योरा इन्हें ही रखना होता है। इसी तरह प्रत्येक तहसील में आपूर्ति विभाग का एक इंस्पेक्टर होता है। सप्लाई इंस्पेक्टर के जिम्मे कोटे की दुकान की जानकारी, राशनकार्डों का ब्योरा, दुकान की शिकायत मिलने पर जांच आदि का कार्य होता है। परंतु कुशीनगर जनपद में यह पूरी व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। स्थिति यह है कि पूरे जिले में मात्र चार मार्केटिंग इंस्पेक्टर बचे हैं, जबकि सप्लाई इंस्पेक्टरों की संख्या भी दो ही है। आपूर्ति विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस समय पडरौना के मार्केटिंग इंस्पेक्टर गोरख यादव के जिम्मे विशुनपुरा, नेबुआ नौरंगिया और खड्डा के गोदाम का भी चार्ज है। हाटा के मार्केटिंग इंस्पेक्टर लाल बहादुर गुप्ता के पास रामकोला और कप्तानगंज का भी चार्ज है। यहां यह बता दें कि हाटा में मोतीचक ब्लाक का भी गोदाम है। इस तरह इनके पास चार ब्लाकों का जिम्मा है। इसी तरह तमकुहीरोड के मार्केटिंग इंस्पेक्टर वाल्मिकी सिंह के पास तमकुहीराज का भी चार्ज है। कसया के मार्केटिंग इंस्पेक्टर आरके मिश्रा कसया व फाजिलनगर दोनों ब्लाक देख रहे हैं। सुकरौली और दुदही ब्लाक के गोदाम का चार्ज तो विभाग ने लिपिकों को दे रखा है। यही हाल सप्लाई इंस्पेक्टरों का भी है। पूरे जिले में मात्र दो सप्लाई इंस्पेक्टर हैं। दोनों के पास दो-दो तहसीलों का चार्ज है। मार्केटिंग और सप्लाई इंस्पेक्टरों की इस भारी कमी का सीधा असर राशन उठान से लगायत वितरण तक पर पड़ रहा है। जांच के अभाव में कोटेदारों की मनमानी पर अंकुश लगाने वाला भी कोई नहीं बचा है।
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उपलब्ध संसाधनों से काम चलाया जा रहा
जिले में मार्केटिंग और सप्लाई इंस्पेक्टरों की किल्लत पर जिला पूर्ति अधिकारी संजीव कुमार का कहना है कि इससे काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लेकिन विकल्प के अभाव में जो हैं, उन्हीं से सामंजस्य बनाकर काम कराया जा रहा है। डिप्टी आरएमओ रूपेश कुमार सिंह का कहना है कि मार्केटिंग इंस्पेक्टरों की कमी पूरे प्रदेश में है। शासन के निर्देश पर ही एक के जिम्मे कई ब्लाक का चार्ज दिया गया है।
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