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Kushinagar News: ठोकर पुनर्स्थापना पर खर्च हुए सात करोड़, नोज धंसा
Tue, 27 Jun 2023 12:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 27 Jun 2023 12:25 AM IST
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गंडक नदी में कटकर विलीन हुआ ठोकर का हिस्सा।संवाद
फोटो है।
छितौनी तटबंध की मजबूती के लिए ठाेकर की पुनर्स्थापना और लगाया गया था परक्यूपाइन
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। गंडक नदी के किनारे बने छितौनी तटबंध की मजबूती के लिए हनुमानगंज गांव के पास एक ठोकर की पुनर्स्थापना पर सात करोड़ से ज्यादा खर्च हुए। जल शक्ति मंत्री ने कुछ दिन पहले दौरा किया था। उसका आगे के नोज का लगभग 20 मीटर हिस्सा धंस गया है। इससे गुणवत्ता की कलई खुल गई है।
महराजगंज जिले की सीमा से माघी-भगवानपुर गांव तक करीब 14.400 किलोमीटर तटबंध गंडक नदी के प्रकोप से बचाव के लिए बना है। इसे छितौनी तटबंध के नाम से जाना जाता है। इस तटबंध के 9.752 किलोमीटर पर स्थित (हनुमानगंज गांव के सामने) की ठोकर मजबूती के लिए लांचिंग एप्रन व स्लोप पिचिंग की पुनर्स्थापना कार्य कराया गया है। इस ठोकर को और मजबूती देने के लिए दोनों तरफ परक्यूपाइन लगाया गया है। इस दोनों कार्य पर सात करोड़ 91 लाख 64 हजार रुपये खर्च हुए हैं।
नौ जून को प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने इस कार्य की जांच की थी। सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्य की गुणवत्ता व मजबूती के तमाम दावे भी किए थे। नदी में अभी बाढ़ नहीं आई है। पानी का बहाव भी तेज नहीं है। इसके बावजूद ठोकर के नीचे का लगभग बीस मीटर हिस्सा पत्थर व जाली सहित कटकर पानी में चला गया है। अब लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब गंडक उफान पर आएगी, तब ठोकर का क्या होगा।
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हनुमानगंज गांव के प्रधान जनार्दन चौधरी, पूर्व प्रधान हरिशंकर सिंह, भैंसहा गांव के पूर्व प्रधान गोलू गुप्ता, मुन्ना यादव, राम प्रताप, भोला, सुरेश यादव, रमाशंकर आदि ने कहा कि हर वर्ष बंधे की मरम्मत के नाम पर धन खर्च होता है, लेकिन बंधा मजबूत नहीं होता है। पैसे का सही उपयोग नहीं हो रहा है। ठोकर कटने की उच्चस्तरीय जांच हो तो कई अधिकारियों की कलई खुल जाएगी।
इस संबंध में बाढ़ खंड के सहायक अभियंता मनोरंजन चौधरी का कहना है कि इसकी जांच की जाएगी। जो भी दोषी मिलेगी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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छितौनी तटबंध की मजबूती के लिए ठाेकर की पुनर्स्थापना और लगाया गया था परक्यूपाइन
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। गंडक नदी के किनारे बने छितौनी तटबंध की मजबूती के लिए हनुमानगंज गांव के पास एक ठोकर की पुनर्स्थापना पर सात करोड़ से ज्यादा खर्च हुए। जल शक्ति मंत्री ने कुछ दिन पहले दौरा किया था। उसका आगे के नोज का लगभग 20 मीटर हिस्सा धंस गया है। इससे गुणवत्ता की कलई खुल गई है।
महराजगंज जिले की सीमा से माघी-भगवानपुर गांव तक करीब 14.400 किलोमीटर तटबंध गंडक नदी के प्रकोप से बचाव के लिए बना है। इसे छितौनी तटबंध के नाम से जाना जाता है। इस तटबंध के 9.752 किलोमीटर पर स्थित (हनुमानगंज गांव के सामने) की ठोकर मजबूती के लिए लांचिंग एप्रन व स्लोप पिचिंग की पुनर्स्थापना कार्य कराया गया है। इस ठोकर को और मजबूती देने के लिए दोनों तरफ परक्यूपाइन लगाया गया है। इस दोनों कार्य पर सात करोड़ 91 लाख 64 हजार रुपये खर्च हुए हैं।
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नौ जून को प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने इस कार्य की जांच की थी। सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्य की गुणवत्ता व मजबूती के तमाम दावे भी किए थे। नदी में अभी बाढ़ नहीं आई है। पानी का बहाव भी तेज नहीं है। इसके बावजूद ठोकर के नीचे का लगभग बीस मीटर हिस्सा पत्थर व जाली सहित कटकर पानी में चला गया है। अब लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब गंडक उफान पर आएगी, तब ठोकर का क्या होगा।
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हनुमानगंज गांव के प्रधान जनार्दन चौधरी, पूर्व प्रधान हरिशंकर सिंह, भैंसहा गांव के पूर्व प्रधान गोलू गुप्ता, मुन्ना यादव, राम प्रताप, भोला, सुरेश यादव, रमाशंकर आदि ने कहा कि हर वर्ष बंधे की मरम्मत के नाम पर धन खर्च होता है, लेकिन बंधा मजबूत नहीं होता है। पैसे का सही उपयोग नहीं हो रहा है। ठोकर कटने की उच्चस्तरीय जांच हो तो कई अधिकारियों की कलई खुल जाएगी।
इस संबंध में बाढ़ खंड के सहायक अभियंता मनोरंजन चौधरी का कहना है कि इसकी जांच की जाएगी। जो भी दोषी मिलेगी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।