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खेतों में जल रहे हैं किसानों के अरमान
kushinagar
Updated Tue, 17 Jul 2018 11:42 PM IST
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अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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पडरौना। मानसून की बेरुखी किसानों पर भारी पड़ने लगी है। जिले में पिछले कई दिनों से बारिश नहीं होने से धान की फसल सूखने के कगार पर आ गई है। कई खेतों में दरार पड़ने लगी है। जुलाई का दूसरा सप्ताह बीत गया, लेकिन अब तक करीब 47 मिलीमीटर ही बारिश हुई है। इससे किसानों को सूखा पड़ने का भय सताने लगा है।
284376 हेक्टेयर भौगोलिक क्षेत्रफल वाले इस जिले में 223836 हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। इस वर्ष करीब 1.20 लाख हेक्टेयर भूमि में धान और 97 हजार हेक्टेयर भूमि में गन्ने की बुआई की गई है। जिले में 248 नहरों का 1503 किलोमीटर का जाल बिछाया गया है। इस साल 180 नहरों में ही हेड से टेल तक पानी छोड़ा गया है। 198 ट्यूबेल में से दो खराब हैं। विभागीय जानकारों की मानें तो जिले में नहरों से करीब 98900 और ट्यूबेल से करीब छह हजार हेक्टेयर खेतों की सिंचाई की जाती है। नलकूपों से सिर्फ एक लाख पांच हजार हेक्टेयर खेतों की सिंचाई संभाव है। बाकी एक लाख 18 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल खेतों की सिंचाई निजी संसाधनों या प्रकृति के भरोसे है। जानकारों की मानें तो जुलाई के दूसरे सप्ताह तक कम से कम 180 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए। अब किसानों की उम्मीद सावन में होने वाली बारिश पर टिकी है। यदि सावन में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो फसलों को बचाना मुश्किल हो जाएगा। जिला कृषि अधिकारी प्यारेलाल का कहना है कि बीते कई दिनों से बारिश नहीं होना चिंता की बात जरूर है, लेकिन सबसे अधिक बारिश वाला सावन और भाद्रपद का महीना शेष है। यदि इसमें बारिश हो जाए तो किसानों की चिंता दूर हो जाएगी। फसलों को सूखे से बचाने के लिए प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है।
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284376 हेक्टेयर भौगोलिक क्षेत्रफल वाले इस जिले में 223836 हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। इस वर्ष करीब 1.20 लाख हेक्टेयर भूमि में धान और 97 हजार हेक्टेयर भूमि में गन्ने की बुआई की गई है। जिले में 248 नहरों का 1503 किलोमीटर का जाल बिछाया गया है। इस साल 180 नहरों में ही हेड से टेल तक पानी छोड़ा गया है। 198 ट्यूबेल में से दो खराब हैं। विभागीय जानकारों की मानें तो जिले में नहरों से करीब 98900 और ट्यूबेल से करीब छह हजार हेक्टेयर खेतों की सिंचाई की जाती है। नलकूपों से सिर्फ एक लाख पांच हजार हेक्टेयर खेतों की सिंचाई संभाव है। बाकी एक लाख 18 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल खेतों की सिंचाई निजी संसाधनों या प्रकृति के भरोसे है। जानकारों की मानें तो जुलाई के दूसरे सप्ताह तक कम से कम 180 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए। अब किसानों की उम्मीद सावन में होने वाली बारिश पर टिकी है। यदि सावन में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो फसलों को बचाना मुश्किल हो जाएगा। जिला कृषि अधिकारी प्यारेलाल का कहना है कि बीते कई दिनों से बारिश नहीं होना चिंता की बात जरूर है, लेकिन सबसे अधिक बारिश वाला सावन और भाद्रपद का महीना शेष है। यदि इसमें बारिश हो जाए तो किसानों की चिंता दूर हो जाएगी। फसलों को सूखे से बचाने के लिए प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है।
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