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कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान के लिए उमड़ी श्रद्घालुओं की भीड़
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Sat, 04 Nov 2017 11:12 PM IST
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लाेगाें ने नदी में स्नान किया।
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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पडरौना। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पूरे जिले में लोग स्नान कर दान पुण्य करते रहे। इस अवसर पर स्नान कर लोग मंदिरों में भी दर्शन कर कुशलता की कामना करते रहे। नदियों के किनारे श्रद्घालुओं की भीड़ लगी रही। शुक्रवार की आधी रात के बाद से बांसी घाट और रामघाट पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। उसके बाद श्रद्घालुओं ने गौ दान किया। यह क्रम शनिवार को दोपहर तक चलता रहा।
बांसी मेला के बारे में एक मान्यता है कि सौ काशी न एक बांसी, अर्थात सौ बार काशी जाकर गंगा नदी में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वह बांसी नदी में एक बार स्नान करने पर मिल जाता है। कहा जाता है कि जनकपुर से लौटते समय भगवान राम ने इस नदी के किनारे रात्रि विश्राम किया था। इसलिए हर साल कार्तिक पूर्णिमा को यहां उत्तर प्रदेश और बिहार से हजारों की संख्या में श्रद्घालु स्नान-दान के लिए आते हैं।
बांसी मेला इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। यहां श्रद्घालुओं ने दर्जनों जगह कोशी भराई की। यहां मांगें गई मन्नतें पूरी हो जाने पर कार्तिक पूर्णिमा को श्रद्घालु माता गंगा का आह्वान कर बच्चों का मुंडन कराने के साथ साथ कोशी भरते हैं। इस बार बांसी नदी के घाट पर श्रद्घालुओं ने चौमुखी दीपक जलाकर पूजा-अर्चना की। उत्तर प्रदेश और बिहार सीमा पर गुजरने वाली इस नदी के किनारे दोनों प्रांतों के लोगों ने कार्तिक पूर्णिमा से पहले घाटों की सफाई की और प्रकाश का भी प्रबंध किया।
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बिना गाय के गौ दान
जटहां बाजार। इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर गौ दान के लिए घाटों पर पुरोहितों ने गाय रखने की बजाए सिर्फ अक्षत, फूल और जल से ही काम चला लिया। त्रिलोकपुर गांव के निवासी अशोक पंडा, कृपाशंकर, जयचंद ने बताया कि अब घाट पर गायों को लेकर आने में काफी परेशानी हो रही है। गाय इतनी महंगी हो गईं है कि उन्हें खरीद पाना भी मुश्किल है।
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मंदिरों में लगी श्रद्घालुओं की भीड़
जटहां बाजार। बांसी स्थित रामजानकी मंदिर और शिव मंदिर में श्रद्घालुओं का भोर से ही तांता लगा रहा। नदी में स्नान और दान करने के बाद श्रद्घालु इन मंदिरों में पूजा कर रहे थे। श्रद्घालुओं ने मंदिरों की परिक्रमा भी की। यहां रात भर भजन कीर्तन होता रहा। बांसी पुल के निकट स्थित हनुमान मंदिर परिसर में श्रद्घालुओं के लिए रात भर भंडारा चला।
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जाम से परेशान रहे राहगीर
जटहां बाजार। बांसी नदी में स्नान के लिए आने वाले श्रद्घालुओं की तादाद इतनी अधिक रही कि लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पडब़ा। पडरौना-बांसी मार्ग, खिरकिया-जटहां मार्ग सहित बांसी जाने वाले सभी रास्ते शुक्रवार और शनिवार को जाम के हवाले रहे। जाम हटाने में पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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श्रद्घालुओं ने बांसी और गंडक नदी में लगाई डुबकी
तमकुहीरोड। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्घालुओं ने शनिवार को आधी रात के बाद सेवरही क्षेत्र के बांसी घाट और गंडक नदी में डुबकी लगाईं। उसके बाद दान-दक्षिणा दी। इस मौके पर शिवाघाट और पिपराघाट में मेला लगा रहाढ, जहां श्रद्घालुओं ने अपनी जरुरत की वस्तुएं खरीदीं।
शिवाघाट के मेले में समाजसेवी अनिल नाथानी और हनुमान सेवा समिति की ओर से भंडारा एवं रात्रि विश्राम का प्रबंध किया गया था। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के लिए सेवरही पुलिस तैनात थी। इसके अलावा क्षेत्र के पांडेयपट्टी घाट, दमकलघाट, रूक्मिणीघाट सहित जंगलीपट्टी, बांकखास, बिरवट कोन्हवलिया, बाघाचैर और अहिरौलीदान में भी श्रद्घालुओं ने नदी के किनारे स्नान-दान किया।
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बांसी मेला के बारे में एक मान्यता है कि सौ काशी न एक बांसी, अर्थात सौ बार काशी जाकर गंगा नदी में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वह बांसी नदी में एक बार स्नान करने पर मिल जाता है। कहा जाता है कि जनकपुर से लौटते समय भगवान राम ने इस नदी के किनारे रात्रि विश्राम किया था। इसलिए हर साल कार्तिक पूर्णिमा को यहां उत्तर प्रदेश और बिहार से हजारों की संख्या में श्रद्घालु स्नान-दान के लिए आते हैं।
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बांसी मेला इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। यहां श्रद्घालुओं ने दर्जनों जगह कोशी भराई की। यहां मांगें गई मन्नतें पूरी हो जाने पर कार्तिक पूर्णिमा को श्रद्घालु माता गंगा का आह्वान कर बच्चों का मुंडन कराने के साथ साथ कोशी भरते हैं। इस बार बांसी नदी के घाट पर श्रद्घालुओं ने चौमुखी दीपक जलाकर पूजा-अर्चना की। उत्तर प्रदेश और बिहार सीमा पर गुजरने वाली इस नदी के किनारे दोनों प्रांतों के लोगों ने कार्तिक पूर्णिमा से पहले घाटों की सफाई की और प्रकाश का भी प्रबंध किया।
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बिना गाय के गौ दान
जटहां बाजार। इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर गौ दान के लिए घाटों पर पुरोहितों ने गाय रखने की बजाए सिर्फ अक्षत, फूल और जल से ही काम चला लिया। त्रिलोकपुर गांव के निवासी अशोक पंडा, कृपाशंकर, जयचंद ने बताया कि अब घाट पर गायों को लेकर आने में काफी परेशानी हो रही है। गाय इतनी महंगी हो गईं है कि उन्हें खरीद पाना भी मुश्किल है।
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मंदिरों में लगी श्रद्घालुओं की भीड़
जटहां बाजार। बांसी स्थित रामजानकी मंदिर और शिव मंदिर में श्रद्घालुओं का भोर से ही तांता लगा रहा। नदी में स्नान और दान करने के बाद श्रद्घालु इन मंदिरों में पूजा कर रहे थे। श्रद्घालुओं ने मंदिरों की परिक्रमा भी की। यहां रात भर भजन कीर्तन होता रहा। बांसी पुल के निकट स्थित हनुमान मंदिर परिसर में श्रद्घालुओं के लिए रात भर भंडारा चला।
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जाम से परेशान रहे राहगीर
जटहां बाजार। बांसी नदी में स्नान के लिए आने वाले श्रद्घालुओं की तादाद इतनी अधिक रही कि लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पडब़ा। पडरौना-बांसी मार्ग, खिरकिया-जटहां मार्ग सहित बांसी जाने वाले सभी रास्ते शुक्रवार और शनिवार को जाम के हवाले रहे। जाम हटाने में पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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श्रद्घालुओं ने बांसी और गंडक नदी में लगाई डुबकी
तमकुहीरोड। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्घालुओं ने शनिवार को आधी रात के बाद सेवरही क्षेत्र के बांसी घाट और गंडक नदी में डुबकी लगाईं। उसके बाद दान-दक्षिणा दी। इस मौके पर शिवाघाट और पिपराघाट में मेला लगा रहाढ, जहां श्रद्घालुओं ने अपनी जरुरत की वस्तुएं खरीदीं।
शिवाघाट के मेले में समाजसेवी अनिल नाथानी और हनुमान सेवा समिति की ओर से भंडारा एवं रात्रि विश्राम का प्रबंध किया गया था। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के लिए सेवरही पुलिस तैनात थी। इसके अलावा क्षेत्र के पांडेयपट्टी घाट, दमकलघाट, रूक्मिणीघाट सहित जंगलीपट्टी, बांकखास, बिरवट कोन्हवलिया, बाघाचैर और अहिरौलीदान में भी श्रद्घालुओं ने नदी के किनारे स्नान-दान किया।