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नाबालिग लड़की के गायब होने से संबंधित मामला
Updated Mon, 18 Sep 2017 04:59 PM IST
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फाजिलनगर (कुशीनगर)।
पटहेरवा थाना क्षेत्र के एक गांव से गायब हुई नाबालिग लड़की के मामले में समझौता तो हो गया लेकिन बदले में ली गई रकम को बिचौलिया डकार गए। तीन दिन बाद जब इसका खुलासा हुआ तो लड़की के घर वालों ने मध्यस्थता कराने वाले व्यक्ति के दरवाजे पर जाकर हंगामा किया। गांव के लोगों ने बीच बचाव कराकर मामला शांत कराया।
पटहेरवा के एक इंटर कालेज में पढ़ने वाली नाबालिग लड़की कुछ दिन पहले अचानक गायब हो गई। घर वालों ने पटहेरवा पुलिस को तहरीर दी। बीते 13 सितंबर को पटहेरवा पुलिस ने गायब लड़की को एक लड़के के साथ पकड़ लिया। आरोपी के पकड़े जाने के बाद कुछ लोग सक्रिय हुए और दोनों पक्षों में समझौता कराने का प्रयास करने लगे। अंतत: इसमें वे सफल भी हो गए लेकिन समझौता के एवज में डेढ़ लाख रुपये से अधिक की रकम ले ली गई। दोनों पक्षों की सहमति पर पुलिस ने मामला खत्म करते हुए लड़की व लड़के को उनके गार्जियन के साथ घर भेज दिया। परंतु बाद में जब दोनों पक्षों को इस बात की जानकारी हुई कि समझौता कराने के एवज में मध्यस्थता करने वालों ने इतनी बड़ी रकम वसूल कर ली है तो वे रुपया वापस पाने के लिए बिचौलियों की तलाश करने लगे। बीते शनिवार की रात में लड़की के घर वालों ने एक मध्यस्थ के दरवाजे पर पंचायत बुला ली। सूचना पर थाने से सिपाही गए और किसी तरह से मामला शांत कराकर वापस लौटे। इस मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं हैं। लोगों का कहना है कि बिना पुलिस वालों की सहमति के इतनी बड़ी डील संभव ही नहीं था। फिलहाल अब फजीहत से बचने के लिए पटहेरवा पुलिस मामले से खुद को अंजान बताने लगी है।
इस संबंध में पटहेरवा एसओ उमाशंकर यादव का कहना है कि दोनों पक्षों की सहमति से ही प्रकरण खत्म हुआ था। समझौता कराने के लिए किसने क्या लेनदेन किया, इसकी जानकारी नहीं है। गांव में पंचायत होने की सूचना मिली थी, लेकिन पुलिस वहां नहीं गई थी।
पटहेरवा थाना क्षेत्र के एक गांव से गायब हुई नाबालिग लड़की के मामले में समझौता तो हो गया लेकिन बदले में ली गई रकम को बिचौलिया डकार गए। तीन दिन बाद जब इसका खुलासा हुआ तो लड़की के घर वालों ने मध्यस्थता कराने वाले व्यक्ति के दरवाजे पर जाकर हंगामा किया। गांव के लोगों ने बीच बचाव कराकर मामला शांत कराया।
पटहेरवा के एक इंटर कालेज में पढ़ने वाली नाबालिग लड़की कुछ दिन पहले अचानक गायब हो गई। घर वालों ने पटहेरवा पुलिस को तहरीर दी। बीते 13 सितंबर को पटहेरवा पुलिस ने गायब लड़की को एक लड़के के साथ पकड़ लिया। आरोपी के पकड़े जाने के बाद कुछ लोग सक्रिय हुए और दोनों पक्षों में समझौता कराने का प्रयास करने लगे। अंतत: इसमें वे सफल भी हो गए लेकिन समझौता के एवज में डेढ़ लाख रुपये से अधिक की रकम ले ली गई। दोनों पक्षों की सहमति पर पुलिस ने मामला खत्म करते हुए लड़की व लड़के को उनके गार्जियन के साथ घर भेज दिया। परंतु बाद में जब दोनों पक्षों को इस बात की जानकारी हुई कि समझौता कराने के एवज में मध्यस्थता करने वालों ने इतनी बड़ी रकम वसूल कर ली है तो वे रुपया वापस पाने के लिए बिचौलियों की तलाश करने लगे। बीते शनिवार की रात में लड़की के घर वालों ने एक मध्यस्थ के दरवाजे पर पंचायत बुला ली। सूचना पर थाने से सिपाही गए और किसी तरह से मामला शांत कराकर वापस लौटे। इस मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं हैं। लोगों का कहना है कि बिना पुलिस वालों की सहमति के इतनी बड़ी डील संभव ही नहीं था। फिलहाल अब फजीहत से बचने के लिए पटहेरवा पुलिस मामले से खुद को अंजान बताने लगी है।
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इस संबंध में पटहेरवा एसओ उमाशंकर यादव का कहना है कि दोनों पक्षों की सहमति से ही प्रकरण खत्म हुआ था। समझौता कराने के लिए किसने क्या लेनदेन किया, इसकी जानकारी नहीं है। गांव में पंचायत होने की सूचना मिली थी, लेकिन पुलिस वहां नहीं गई थी।
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