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Kushinagar News: 2026 होगा स्वर्णिम साल... बुद्ध भूमि विकास की नई उड़ान को तैयार
Thu, 01 Jan 2026 02:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 01 Jan 2026 02:27 AM IST
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बहुउद्देशीय हब की भूमि।संवाद
कुशीनगर। महात्मा बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली के रूप में विश्व पहचान रखने वाला कुशीनगर अब सिर्फ आध्यात्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा। वर्ष 2026 जिले के विकास की नई इबारत लिखने जा रहा है।
हवाई सेवा की शुरुआत, कृषि विश्वविद्यालय में पढ़ाई, नई रेल लाइन, अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी और बहुउद्देशीय हब के साथ कुशीनगर पूर्वांचल के विकास इंजन के रूप में उभरने को तैयार है।
तकनीकी कारणों से वर्षों से अटकी या धीमी पड़ी परियोजनाओं में अब स्पष्ट गति दिखने लगी है। कहीं एयरलाइंस कंपनियों का सर्वे चल रहा है तो कहीं डिज़ाइन फाइनल कर निर्माण कार्य तेज कर दिया गया है। कुशीनगर एयरपोर्ट, महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय, नारायणी (गंडक) नदी पर पुल, छितौनी-तमकुही रेल परियोजना और राष्ट्रीय राजमार्ग-28 किनारे प्रस्तावित बहुउद्देशीय हब—ये सभी योजनाएं 2026 तक धरातल पर उतरने की निर्णायक अवस्था में पहुंच चुकी हैं।
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अब तक गोरखपुर और देवरिया पर निर्भर रहने वाला कुशीनगर 2026 के बाद खुद एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में स्थापित होगा।
गंडक नदी पर पुल से बदलेगी अंतरराज्यीय तस्वीर : गंडक (नारायणी) नदी पर लगभग 2000 करोड़ रुपये की लागत से 29.24 किमी लंबी सड़क और 12 किमी लंबा पुल प्रस्तावित है। परियोजना के पूरा होने पर सेवरही से बिहार के बेतिया की दूरी 160 किमी से घटकर मात्र 27 किमी रह जाएगी।
छितौनी-तमकुही रेल परियोजना से खुलेगा विकास का रास्ता : करीब 18 वर्ष पहले प्रस्तावित छितौनी-तमकुही रेल लाइन अब साकार होने की दिशा में बढ़ चुकी है। परियोजना की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वहीं राजवटिया में 72 एकड़ भूमि पर बहुउद्देशीय हब की स्थापना को हरी झंडी मिल चुकी है। इसमें अस्पताल, विद्यालय, कृषि विभाग, खेल मैदान, तालाब सहित कई अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह हब कृषि विश्वविद्यालय और रिसर्च विंग के बीच स्थित होगा, जिससे किसानों, विद्यार्थियों और बिहार से आने वाले पर्यटकों को सीधे लाभ मिलेगा।
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हवाई सेवा की शुरुआत, कृषि विश्वविद्यालय में पढ़ाई, नई रेल लाइन, अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी और बहुउद्देशीय हब के साथ कुशीनगर पूर्वांचल के विकास इंजन के रूप में उभरने को तैयार है।
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तकनीकी कारणों से वर्षों से अटकी या धीमी पड़ी परियोजनाओं में अब स्पष्ट गति दिखने लगी है। कहीं एयरलाइंस कंपनियों का सर्वे चल रहा है तो कहीं डिज़ाइन फाइनल कर निर्माण कार्य तेज कर दिया गया है। कुशीनगर एयरपोर्ट, महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय, नारायणी (गंडक) नदी पर पुल, छितौनी-तमकुही रेल परियोजना और राष्ट्रीय राजमार्ग-28 किनारे प्रस्तावित बहुउद्देशीय हब—ये सभी योजनाएं 2026 तक धरातल पर उतरने की निर्णायक अवस्था में पहुंच चुकी हैं।
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अब तक गोरखपुर और देवरिया पर निर्भर रहने वाला कुशीनगर 2026 के बाद खुद एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में स्थापित होगा।
गंडक नदी पर पुल से बदलेगी अंतरराज्यीय तस्वीर : गंडक (नारायणी) नदी पर लगभग 2000 करोड़ रुपये की लागत से 29.24 किमी लंबी सड़क और 12 किमी लंबा पुल प्रस्तावित है। परियोजना के पूरा होने पर सेवरही से बिहार के बेतिया की दूरी 160 किमी से घटकर मात्र 27 किमी रह जाएगी।
छितौनी-तमकुही रेल परियोजना से खुलेगा विकास का रास्ता : करीब 18 वर्ष पहले प्रस्तावित छितौनी-तमकुही रेल लाइन अब साकार होने की दिशा में बढ़ चुकी है। परियोजना की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वहीं राजवटिया में 72 एकड़ भूमि पर बहुउद्देशीय हब की स्थापना को हरी झंडी मिल चुकी है। इसमें अस्पताल, विद्यालय, कृषि विभाग, खेल मैदान, तालाब सहित कई अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह हब कृषि विश्वविद्यालय और रिसर्च विंग के बीच स्थित होगा, जिससे किसानों, विद्यार्थियों और बिहार से आने वाले पर्यटकों को सीधे लाभ मिलेगा।