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परिषदीय विद्यालयों में नहीं बढ़ रहा नामांकन
Updated Thu, 12 Jul 2018 11:23 PM IST
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पैरियाटोला प्राथमिक विद्यालय में पढ़ते बच्चे
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पडरौना। परिषदीय स्कूलों में नए सत्र में नामांकन बढ़ाने व दुदही रेल हादसे के बाद बिना मान्यता वाले विद्यालयों का संचालन बंद कराने के दावे के बावजूद इस बार हालत पिछले वर्ष से भी खराब है। जुलाई महीने में केवल 72 बच्चों का नामांकन हुआ है। इसके बाद भी पिछले वर्ष से करीब पांच हजार बच्चे कम हैं। अंग्रेजी माध्यम वाले 70 स्कूलों समेत 150 स्कूलों को मॉडल बनाने की कवायद का भी कोई असर नहीं दिख रहा है।
जिले में 2179 प्राथमिक और 824 जूनियर हाईस्कूल बेसिक शिक्षा परिषद की तरफ से संचालित हैं। इनमें पिछले साल 275899 बच्चे नामांकित थे। एक अप्रैल से शुरू हुए नए सत्र में कक्षा एक से आठ तक कुल 271048 बच्चों का नामांकन हुआ है। यह संख्या अभी पिछले वर्ष के मुकाबले ही 4853 कम है। बच्चों की संख्या कम रहने के पीछे बिना मान्यता वाले स्कूलों के संचालन को प्रमुख कारण बताया जा रहा था। बीते 26 अप्रैल को दुदही रेल हादसे के बाद प्रशासन ने अभियान चलाकर बिना मान्यता वाले स्कूलों को बंद कराया। इसके बावजूद जुलाई महीने में सरकारी स्कूलों में केवल 72 बच्चों का ही नामांकन हुआ है, जबकि प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार करीब 90 हजार बच्चे बिना मान्यता वाले स्कूलों में पढ़ाई कर रहे थे। प्रभारी बीएसए उदय प्रकाश मिश्र का कहना है कि नामांकन बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। अध्यापकों के लिए निर्देश दिए गए हैं। बंद विद्यालयों को शुरू कराने के लिए दूसरे स्कूलों से अध्यापक भेजे जा रहे हैं।
मॉडल स्कूल भी नहीं जगा पाए उम्मीद
जिले में इस वर्ष 150 परिषदीय स्कूलों को मॉडल स्कूल घोषित किया गया है। इनमें से 70 स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई होनी थी। लेकिन अध्यापकों की कमी और अंतर जनपदीय स्थानांतरण के चलते यह प्रयोग भी सफल नहीं हो पाया। दशा सुधरने की बजाय शिक्षकों की कमी के चलते 70 विद्यालयों में पढ़ाई बंद हो गई तो वहीं 100 से अधिक स्कूलों में एकल अध्यापकों के भरोसे पढ़ाई चल रही है।
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जिले में 2179 प्राथमिक और 824 जूनियर हाईस्कूल बेसिक शिक्षा परिषद की तरफ से संचालित हैं। इनमें पिछले साल 275899 बच्चे नामांकित थे। एक अप्रैल से शुरू हुए नए सत्र में कक्षा एक से आठ तक कुल 271048 बच्चों का नामांकन हुआ है। यह संख्या अभी पिछले वर्ष के मुकाबले ही 4853 कम है। बच्चों की संख्या कम रहने के पीछे बिना मान्यता वाले स्कूलों के संचालन को प्रमुख कारण बताया जा रहा था। बीते 26 अप्रैल को दुदही रेल हादसे के बाद प्रशासन ने अभियान चलाकर बिना मान्यता वाले स्कूलों को बंद कराया। इसके बावजूद जुलाई महीने में सरकारी स्कूलों में केवल 72 बच्चों का ही नामांकन हुआ है, जबकि प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार करीब 90 हजार बच्चे बिना मान्यता वाले स्कूलों में पढ़ाई कर रहे थे। प्रभारी बीएसए उदय प्रकाश मिश्र का कहना है कि नामांकन बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। अध्यापकों के लिए निर्देश दिए गए हैं। बंद विद्यालयों को शुरू कराने के लिए दूसरे स्कूलों से अध्यापक भेजे जा रहे हैं।
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मॉडल स्कूल भी नहीं जगा पाए उम्मीद
जिले में इस वर्ष 150 परिषदीय स्कूलों को मॉडल स्कूल घोषित किया गया है। इनमें से 70 स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई होनी थी। लेकिन अध्यापकों की कमी और अंतर जनपदीय स्थानांतरण के चलते यह प्रयोग भी सफल नहीं हो पाया। दशा सुधरने की बजाय शिक्षकों की कमी के चलते 70 विद्यालयों में पढ़ाई बंद हो गई तो वहीं 100 से अधिक स्कूलों में एकल अध्यापकों के भरोसे पढ़ाई चल रही है।
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