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111 वर्ष पुराने रेलमार्ग पर भी पैसेंजर ट्रेन का आसरा
Updated Sat, 30 Jun 2018 11:44 PM IST
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- फोटो : डेमो
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पडरौना (कुशीनगर)। कप्तानगंज-थावे रेलमार्ग 111 साल पुरानी है लेकिन आज भी यात्री सुविधाओं से महरूम हैं। वर्ष 1907 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान सीवान (बिहार) से कप्तानगंज तक बिछाई गई इस 127 किलोमीटर लंबी मीटर गेज लाइन को 16 दिसंबर 2011 को ब्राड गेज में परिवर्तित कर दिया गया। लेकिन इस रेलमार्ग से गुजरने वाले यात्रियों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। अब तो कौन सी ट्रेन, कब निरस्त हो जाए, इसकी भी जानकारी यात्रियों को नहीं होती। उम्मीद की धुंधली किरण दो समर स्पेशल साप्ताहिक गाड़ियों का आवागमन भी बंद हो गया है। तीसरी ट्रेन भी रविवार से बंद हो जाएगी।
पडरौना से होकर गुजरने वाली थावे-कप्तानगंज रेल लाइन हर दिन करीब 18 हजार यात्री ट्रेन से यात्रा करते हैं। बिहार प्रांत के तमाम लोग भी इस रेल मार्ग के जरिए इलाज व बाजार संबंधी जरूरतों के लिए पडरौना आते हैं। 16 दिसंबर वर्ष 2011 को इस रेलमार्ग को छोटी लाइन से बड़ी लाइन में परिवर्तित करते हुए ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया। उम्मीद थी कि जल्दी ही पडरौना से स्थानीय स्टेशनों के अलावा लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद जैसे बड़े शहरों के लिए भी ट्रेन की सुविधा मिलने लगेगी। लेकिन यात्री सुविधाओं पर रेल प्रशासन के अलावा जनप्रतिनिधियों की भी नजर नहीं पड़ी। आमान परिवर्तन के सात वर्ष बाद भी इस रेल मार्ग पर लंबी दूरी की ट्रेन नहीं चलती है।
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कमी को पूरा करने के लिए कुछ स्पेशल एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन शुरू कराया गया, जिसमें से दो ट्रेन दो दिन पहले ही बंद कर दी गई है और निर्धारित तिथि के अनुसार एक जुलाई को एक और ट्रेन चलकर बंद हो जाएगी। रेलमार्ग से यात्रा करने वाले लोगों ने सांसद, विधायक व रेलवे के जीएम समेत कई अफसरों को पत्र देकर ट्रेनों का संचालन नियमित रूप से किए जाने की मांग भी की थी। जिम्मेदार यात्रियों को लंबी दूरी की ट्रेन चलाने और नियमित संचालन कराए जाने का दंभ तो जरुर भरते हैं, लेकिन स्थिति यह है कि एक्सप्रेस ट्रेनें तो दूर पैसेंजर ट्रेनों की हालत भी बद से बदतर हो गई है।
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छोटी लाइन पर थी पांच जोड़ी ट्रेनें
थावे-कप्तानगंज छोटी लाइन रेलमार्ग पर एक जोड़ी ट्रेन सुबह सात बजे, दूसरी जोड़ी दिन के 10 बजे, तीसरी जोड़ी शाम के चार बजे व चौथी जोड़ी रात नौ बजे संचालित होती थी। एक ट्रेन भोर में तीन बजे और रात में एक बजे पडरौना पहुंचती थी। ऐसे समय पर इन ट्रेनों का संचालन होता था जिससे सरकारी कर्मचारी, अधिवक्ता, विद्यार्थी, फरियादी सभी समय से अपने गंतव्य को पहुंचते थे। इसके अलावा देर रात वाले यात्रियों को भी ट्रेन की सुविधा मिल जाती थी।
रिजर्वेशन पडरौना से, ट्रेन मिलेगी गोरखपुर
मुम्बई, दिल्ली, जालंधर, कोलकाता आदि बड़े शहरों में जाने के लिए लोग रिजर्वेशन पडरौना, कप्तानगंज व तमकुहीरोड से कराते हैं। इस रूट पर लंबी दूरी की ट्रेन न होने के कारण लोगों को गोरखपुर जाना पड़ता है। सरकारी रिकार्ड को देखें तो अकेले पडरौना रेलवे स्टेशन से वर्ष 2016-17 के दौरान कुल आय तीन करोड़, 99 लाख 20 हजार 705 रुपये आरक्षण टिकट से आए। वर्ष-2017 के जुलाई महीने में बुकिंग टिकट से 46 लाख 46 हजार 680 रुपये का आय एक ही माह में पडरौना रेलवे स्टेशन को हुआ था। जब इन स्टेशनों से रेलवे को अच्छी इनकम हो रही है, तो फिर यात्रियों के सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए था।
आज से बंद हो जाएगी रामनगर-हावड़ा एक्सप्रेस
कप्तानगंज-थावे रेल मार्ग पर बीते छह अप्रैल से पहली जुलाई तक 13 ट्रिप के लिए रामनगर-हावड़ा (05007/05008) रविवार को बंद हो जाएगी। तीन अप्रैल से 27 जून तक 13 ट्रीप चलने के बाद छपरा-आनंद बिहार (05115/05116), जालंधर सिटी-कटिहार (05717/05718) एक्सप्रेस ट्रेन दो दिन पहले ही बंद हो चुकी है।