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नहीं रूक रही है भैंसों की मौत
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फिर 18 भैंस की मौत
बोधीछपरा गांव में अभी भी पशुओं में बीमारी बरकरार
संवाद न्यूज एजेंसी
छितौनी। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की मौत नहीं थम रही है। कुछ दिनों के भीतर नौ और मवेशियों की बुखार और गला घोंटू बीमारी से मौत हो गई। पशुपालकों का आरोप है कि पशुपालन विभाग इलाज में रुचि नहीं ले रहा है।
पिछले सप्ताह 50 से अधिक भैंस बुखार और गला घोंटू बीमारी से मौत के मुंह में समा गई थीं, जबकि 100 से अधिक बीमार थीं। अमर उजाला में यह खबर प्रकाशित होने के बाद पशुपालन विभाग थोड़ा सक्रिय हुआ और पशुओं का इलाज तथा टीकाकरण किया, लेकिन उसके बाद कोई देखभाल न हो सकी।
बोधीछापर गांव के पशुपालक इन्नर यादव ने बताया कि अचानक उनकी 18 भैसों ने चारा खाना बंद कर दिया। विभाग के पशु चिकित्सकों को सूचना दी गई, लेकिन इलाज के लिए कोई नहीं आया तो प्राइवेट डॉक्टर से इलाज कराया गया। पशुओं की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और शनिवार और रविवार को उनकी 12 भैंसों की मौत हो गई, जबकि छह की हालात गंभीर है।
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रामबेलास यादव ने बताया कि तीन भैंसों को रविवार को बुखार हुआ। थोड़ी देर बाद जीभ बाहर निकालने लगीं। स्थानीय डॉक्टरों से इलाज कराया, लेकिन कुछ देर में तीनों भैंस एक-एक कर मर गईं। सुरेश यादव ने बताया कि अचानक पांच भैंसों को बुखार हुआ। स्थानीय डॉक्टरों से इलाज करा रहे थे कि रविवार की रात से लेकर सोमवार सुबह तक तीन की मौत हो गई है। इस बाबत प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी खड्डा उज्जवल खरवार ने बताया कि भैंसों की मौत की खबर मिलने पर कैंप लगाकर इलाज कराया गया था। जो भी भैंस हैं, वह सभी बिहार से आई हैं। बीमारी की जांच के लिए उचित संसाधन नहीं हैं।
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बोधीछपरा गांव में अभी भी पशुओं में बीमारी बरकरार
संवाद न्यूज एजेंसी
छितौनी। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की मौत नहीं थम रही है। कुछ दिनों के भीतर नौ और मवेशियों की बुखार और गला घोंटू बीमारी से मौत हो गई। पशुपालकों का आरोप है कि पशुपालन विभाग इलाज में रुचि नहीं ले रहा है।
पिछले सप्ताह 50 से अधिक भैंस बुखार और गला घोंटू बीमारी से मौत के मुंह में समा गई थीं, जबकि 100 से अधिक बीमार थीं। अमर उजाला में यह खबर प्रकाशित होने के बाद पशुपालन विभाग थोड़ा सक्रिय हुआ और पशुओं का इलाज तथा टीकाकरण किया, लेकिन उसके बाद कोई देखभाल न हो सकी।
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बोधीछापर गांव के पशुपालक इन्नर यादव ने बताया कि अचानक उनकी 18 भैसों ने चारा खाना बंद कर दिया। विभाग के पशु चिकित्सकों को सूचना दी गई, लेकिन इलाज के लिए कोई नहीं आया तो प्राइवेट डॉक्टर से इलाज कराया गया। पशुओं की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और शनिवार और रविवार को उनकी 12 भैंसों की मौत हो गई, जबकि छह की हालात गंभीर है।
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रामबेलास यादव ने बताया कि तीन भैंसों को रविवार को बुखार हुआ। थोड़ी देर बाद जीभ बाहर निकालने लगीं। स्थानीय डॉक्टरों से इलाज कराया, लेकिन कुछ देर में तीनों भैंस एक-एक कर मर गईं। सुरेश यादव ने बताया कि अचानक पांच भैंसों को बुखार हुआ। स्थानीय डॉक्टरों से इलाज करा रहे थे कि रविवार की रात से लेकर सोमवार सुबह तक तीन की मौत हो गई है। इस बाबत प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी खड्डा उज्जवल खरवार ने बताया कि भैंसों की मौत की खबर मिलने पर कैंप लगाकर इलाज कराया गया था। जो भी भैंस हैं, वह सभी बिहार से आई हैं। बीमारी की जांच के लिए उचित संसाधन नहीं हैं।