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Kushinagar News: समय पर इलाज मिला तो सर्पदंश के शिकार 1570 की बची जान
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कुशीनगर। इस साल 31 अगस्त तक सर्पदंश की करीब 1600 मामले सामने आए हैं। झाड़फूंक और इलाज में देरी से 30 लोगों को जान गंवानी पड़ी है। वहीं 1570 लोगों को सर्पदंश के बाद समय से पहुंचने पर अस्पताल में इलाज कर उनकी जिंदगी बचाई गई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्पदंश के बाद शुरुआती घंटे पीड़ित के जीवन के लिए काफी संवेदनशील होते हैं। अगर उन्हें इस समय में अस्पताल पहुंचाकर उपचार उपलब्ध कराया जाए तो जान बचने की संभावना काफी अधिक रहती है। इसके बावजूद जागरूकता के अभाव में ग्रामीण इलाकों में लोग अस्पताल जाने के बजाय पहले झाड़-फूंक कराने लगते हैं। इस देरी के कारण मरीज की हालत गंभीर हो जाती है और अस्पताल पहुंचने में देरी के चलते जान चली जाती है।
ये तथ्य स्वास्थ्य विभाग के दर्ज आंकड़ों में भी मौत की वजह इलाज में देरी और झाड़फूंक जैसे कारण प्रमुख रूप से सामने आए हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, सर्पदंश को लेकर किसी भी तरह का अंधविश्वास मरीज की जान के लिए खतरा बन सकता है।
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ये बरतें सावधानी:-
बारिश के दौरान बिलों और उनके रहने के स्थानों में पानी भरने से सांप सुरक्षित जगह की तलाश में बाहर निकलते हैं। ऐसे में घर के आसपास लकड़ी, ईंट, कूड़ा, घास और झाड़ियों में हाथ डालने से बचना चाहिए। रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करना और जूते-चप्पल पहनना जरूरी है।
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सांप काटे तो क्या करें:-
- मरीज को घबराने न दें और शांत रखें।
- काटे गए अंग को कम से कम हिलाएं।
- मरीज को पैदल चलाने के बजाय जल्द अस्पताल ले जाया जाए।
- संभव हो तो सुरक्षित दूरी से सांप की तस्वीर ले लें, उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करें।
- चिकित्सक की सलाह के बिना कोई दवा व घरेलू उपचार न करें।
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ये बिल्कुल न करें:-
- झाड़फूंक कराने में समय बर्बाद न करें।
- घाव पर चीरा न लगाएं और खून चूसने की कोशिश न करें।
- घाव पर मिट्टी, जड़ी-बूटी, तेल व अन्य पदार्थ न लगाएं।
- रस्सी या कपड़े से ज्यादा कसकर अंग न बांधें।
- मरीज को शराब व कोई घरेलू नुस्खा देकर इलाज करने की कोशिश न करें।
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सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति को सही समय पर उपचार मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। ऐसी परिस्थिति में झाड़फूंक से बचना चाहिए। पीड़ित को एक घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचाकर इलाज शुरू कराया जाना चाहिए। बेवजह इधर-उधर समय बर्बाद नहीं होने देना चाहिए। -डॉ. एसएन त्रिपाठी, प्रभारी सीएमओ
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विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्पदंश के बाद शुरुआती घंटे पीड़ित के जीवन के लिए काफी संवेदनशील होते हैं। अगर उन्हें इस समय में अस्पताल पहुंचाकर उपचार उपलब्ध कराया जाए तो जान बचने की संभावना काफी अधिक रहती है। इसके बावजूद जागरूकता के अभाव में ग्रामीण इलाकों में लोग अस्पताल जाने के बजाय पहले झाड़-फूंक कराने लगते हैं। इस देरी के कारण मरीज की हालत गंभीर हो जाती है और अस्पताल पहुंचने में देरी के चलते जान चली जाती है।
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ये तथ्य स्वास्थ्य विभाग के दर्ज आंकड़ों में भी मौत की वजह इलाज में देरी और झाड़फूंक जैसे कारण प्रमुख रूप से सामने आए हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, सर्पदंश को लेकर किसी भी तरह का अंधविश्वास मरीज की जान के लिए खतरा बन सकता है।
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ये बरतें सावधानी:-
बारिश के दौरान बिलों और उनके रहने के स्थानों में पानी भरने से सांप सुरक्षित जगह की तलाश में बाहर निकलते हैं। ऐसे में घर के आसपास लकड़ी, ईंट, कूड़ा, घास और झाड़ियों में हाथ डालने से बचना चाहिए। रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करना और जूते-चप्पल पहनना जरूरी है।
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सांप काटे तो क्या करें:-
- मरीज को घबराने न दें और शांत रखें।
- काटे गए अंग को कम से कम हिलाएं।
- मरीज को पैदल चलाने के बजाय जल्द अस्पताल ले जाया जाए।
- संभव हो तो सुरक्षित दूरी से सांप की तस्वीर ले लें, उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करें।
- चिकित्सक की सलाह के बिना कोई दवा व घरेलू उपचार न करें।
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ये बिल्कुल न करें:-
- झाड़फूंक कराने में समय बर्बाद न करें।
- घाव पर चीरा न लगाएं और खून चूसने की कोशिश न करें।
- घाव पर मिट्टी, जड़ी-बूटी, तेल व अन्य पदार्थ न लगाएं।
- रस्सी या कपड़े से ज्यादा कसकर अंग न बांधें।
- मरीज को शराब व कोई घरेलू नुस्खा देकर इलाज करने की कोशिश न करें।
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सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति को सही समय पर उपचार मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। ऐसी परिस्थिति में झाड़फूंक से बचना चाहिए। पीड़ित को एक घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचाकर इलाज शुरू कराया जाना चाहिए। बेवजह इधर-उधर समय बर्बाद नहीं होने देना चाहिए। -डॉ. एसएन त्रिपाठी, प्रभारी सीएमओ