{"_id":"5d0e688d8ebc3e2f7f647231","slug":"15612253411-kushinagar-news58","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंधे के किनारे बसे लोगों की बढ़ी बेचैनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बंधे के किनारे बसे लोगों की बढ़ी बेचैनी
विज्ञापन
जलस्तर में वृद्धि से बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग सहमे
बाघाचौर और अहिरौलीदान में बाढ़ बचाव कार्य तेज
अमर उजाला ब्यूरो
तमकुहीरोड। बड़ी गंडक के जलस्तर में वृद्धि से बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग सहम गए हैं। बाढ़ खंड के अभियंताओं ने बाघाचौर और अहिरौलीदान में बचाव कार्य तेज कर दिया है। यही दो गांव ऐसे हैं, जो कटान की दृष्टि से काफी संवेदनशील हैं।
वाल्मीकिनगर बैराज से बड़ी गंडक में पानी छोड़े जाने से इसके जलस्तर में धीरे-धीरे वृद्धि होने लगी है। इसके चलते एपी तटबंध के किनारे बसे पिपराघाट, जंगलीपट्टी, घघवा जगदीश, चैनपट्टी, जवहीदयाल, विरवट कोन्हवलिया, बांकखास, बाघाचौर, नोनियापट्टी, अहिरौलीदान आदि गांवों के लोग सहम से गए हैं। क्योंकि उन्हें अंदेशा है कि बरसात के चार महीने उन पर भारी पड़ सकते हैं।
बाढ़ खंड ने भी बचाव कार्य की गति तेज कर दी है। क्योंकि अहिरौलीदान एवं बाघाचौर बांध व बड़ी गंडक से सटे हुए गांव हैं, जो कटान की दृष्टि से सर्वाधिक संवेदनशील हैं। इस क्षेत्र के संजय कुमार सिंह बताते हैं कि बंधे की हालत कहीं से भी ठीक नहीं है। जिस बचाव कार्य को 15 जून से पहले पूरा हो जाना चाहिए था, वह अब भी जारी है। अगर यही कार्य समय रहते पूरा कर लिया गया होता तो लोगों की चिंता नहीं बढ़ती।
विज्ञापन
बाढ़ खंड के एक्सईएन भरत राम का कहना है कि मिट्टी से भरे जीओ बैग के साथ बोल्डर से भी मरम्मत का कार्य चल रहा है। बांध को सुरक्षित रखना विभाग की प्राथमिकता है।
विज्ञापन
बाघाचौर और अहिरौलीदान में बाढ़ बचाव कार्य तेज
अमर उजाला ब्यूरो
तमकुहीरोड। बड़ी गंडक के जलस्तर में वृद्धि से बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग सहम गए हैं। बाढ़ खंड के अभियंताओं ने बाघाचौर और अहिरौलीदान में बचाव कार्य तेज कर दिया है। यही दो गांव ऐसे हैं, जो कटान की दृष्टि से काफी संवेदनशील हैं।
वाल्मीकिनगर बैराज से बड़ी गंडक में पानी छोड़े जाने से इसके जलस्तर में धीरे-धीरे वृद्धि होने लगी है। इसके चलते एपी तटबंध के किनारे बसे पिपराघाट, जंगलीपट्टी, घघवा जगदीश, चैनपट्टी, जवहीदयाल, विरवट कोन्हवलिया, बांकखास, बाघाचौर, नोनियापट्टी, अहिरौलीदान आदि गांवों के लोग सहम से गए हैं। क्योंकि उन्हें अंदेशा है कि बरसात के चार महीने उन पर भारी पड़ सकते हैं।
विज्ञापन
बाढ़ खंड ने भी बचाव कार्य की गति तेज कर दी है। क्योंकि अहिरौलीदान एवं बाघाचौर बांध व बड़ी गंडक से सटे हुए गांव हैं, जो कटान की दृष्टि से सर्वाधिक संवेदनशील हैं। इस क्षेत्र के संजय कुमार सिंह बताते हैं कि बंधे की हालत कहीं से भी ठीक नहीं है। जिस बचाव कार्य को 15 जून से पहले पूरा हो जाना चाहिए था, वह अब भी जारी है। अगर यही कार्य समय रहते पूरा कर लिया गया होता तो लोगों की चिंता नहीं बढ़ती।
विज्ञापन
बाढ़ खंड के एक्सईएन भरत राम का कहना है कि मिट्टी से भरे जीओ बैग के साथ बोल्डर से भी मरम्मत का कार्य चल रहा है। बांध को सुरक्षित रखना विभाग की प्राथमिकता है।