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प्राथमिक उपचार नहीं मिलने से युवक की मौत
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Youth dies due to lack of first aid
- फोटो : KAUSHAMBI
प्राथमिक उपचार नहीं मिलने से युवक की मौत
जिला अस्पताल के चिकित्सक शनिवार रात रहे नदारद
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिला अस्पताल में डॉक्टर के नहीं मिलने से शनिवार रात एक युवक की मौत हो गई। इससे गुस्साए परिजनों, ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। बाद में आए चिकित्सक को पीटने की कोशिश की। हंगामे की खबर पाकर पहुंची पुलिस ने कड़ी मशक्कत कर किसी तरह भीड़ को नियंत्रित किया। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। घटना से पीड़ित परिवार मेें कोहराम मच गया है।
नगर कोतवाली के असकरनपुर मंगरोहनी गांव का बुधईलाल उर्फ शहदेव (26) पुत्र मुन्नीलाल मंझनपुर स्थित एक साउंड कंपनी में काम करता था। शनिवार शाम वह अपने घर में पंखा ठीक कर रहा था। इस दौरान करंट की चपेट में आ गया। परिवार वाले झुलसे युवक को लेकर आननफानन जिला अस्पताल आए। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कोई चिकित्सक ही नहीं था। इसी का नतीजा रहा कि त्वरित उपचार नहीं मिला और युवक की मौत हो गई। इसी से गुस्साए परिजनों, ग्रामीणों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। वह अस्पताल स्टॉफ से भिड़ गए। बाद में आए चिकित्सक विजय शंकर केसरवानी को घेर लिया। तभी किसी ने मामले की जानकारी पुलिस को दे दी। खबर मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह चिकित्सक को भीड़ के चंगुल से मुक्त कराया। तकरीबन डेढ़ घंटे तक चले हंगामे के बाद पुलिस भीड़ का गुस्सा शांत करा सकी। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। परिवार की ओर से किसी तरह की कोई तहरीर पुलिस को नहीं दी गई है।
हंगामे के दौरान ही किसी ने डीएम मनीष कुमार वर्मा और सीएमओ डॉ. पीएन चतुर्वेदी को फोन कर दिया। अधिकारियों का फोन घनघनाना शुरू हुआ तब जाकर डॉ. विजय शंकर केसरवानी और अरविंद कनौजिया मौके पर पहुंचे। देरी से पहुंचे डॉक्टरों को देख लोगों का गुस्सा और बढ़ गया था। अच्छा ये रहा कि पुलिस समय रहते पहुंच गई। वर्ना कुछ भी असंभव नहीं था। वहीं सीएमएस का कहना है कि शनिवार की रात इमरजेंसी में डॉ विजयशंकर केसरवानी की ड्यूटी थी। जिस वक्त बुधई को लाया गया था, उस दौरान डॉ विजय एमसीएच विंग में एक गंभीर मरीज को देखने चले गए थे। अस्पताल में शोर-शराबे की आवाज सुनकर वह आ गए थे।
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जिला अस्पताल के चिकित्सक शनिवार रात रहे नदारद
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिला अस्पताल में डॉक्टर के नहीं मिलने से शनिवार रात एक युवक की मौत हो गई। इससे गुस्साए परिजनों, ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। बाद में आए चिकित्सक को पीटने की कोशिश की। हंगामे की खबर पाकर पहुंची पुलिस ने कड़ी मशक्कत कर किसी तरह भीड़ को नियंत्रित किया। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। घटना से पीड़ित परिवार मेें कोहराम मच गया है।
नगर कोतवाली के असकरनपुर मंगरोहनी गांव का बुधईलाल उर्फ शहदेव (26) पुत्र मुन्नीलाल मंझनपुर स्थित एक साउंड कंपनी में काम करता था। शनिवार शाम वह अपने घर में पंखा ठीक कर रहा था। इस दौरान करंट की चपेट में आ गया। परिवार वाले झुलसे युवक को लेकर आननफानन जिला अस्पताल आए। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कोई चिकित्सक ही नहीं था। इसी का नतीजा रहा कि त्वरित उपचार नहीं मिला और युवक की मौत हो गई। इसी से गुस्साए परिजनों, ग्रामीणों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। वह अस्पताल स्टॉफ से भिड़ गए। बाद में आए चिकित्सक विजय शंकर केसरवानी को घेर लिया। तभी किसी ने मामले की जानकारी पुलिस को दे दी। खबर मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह चिकित्सक को भीड़ के चंगुल से मुक्त कराया। तकरीबन डेढ़ घंटे तक चले हंगामे के बाद पुलिस भीड़ का गुस्सा शांत करा सकी। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। परिवार की ओर से किसी तरह की कोई तहरीर पुलिस को नहीं दी गई है।
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हंगामे के दौरान ही किसी ने डीएम मनीष कुमार वर्मा और सीएमओ डॉ. पीएन चतुर्वेदी को फोन कर दिया। अधिकारियों का फोन घनघनाना शुरू हुआ तब जाकर डॉ. विजय शंकर केसरवानी और अरविंद कनौजिया मौके पर पहुंचे। देरी से पहुंचे डॉक्टरों को देख लोगों का गुस्सा और बढ़ गया था। अच्छा ये रहा कि पुलिस समय रहते पहुंच गई। वर्ना कुछ भी असंभव नहीं था। वहीं सीएमएस का कहना है कि शनिवार की रात इमरजेंसी में डॉ विजयशंकर केसरवानी की ड्यूटी थी। जिस वक्त बुधई को लाया गया था, उस दौरान डॉ विजय एमसीएच विंग में एक गंभीर मरीज को देखने चले गए थे। अस्पताल में शोर-शराबे की आवाज सुनकर वह आ गए थे।
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