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आलू की पिछेती खेती पर मौसम की मार
कौशाम्बी ब्यूरो
Updated Fri, 29 Dec 2017 11:57 PM IST
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खराब हुई अालू की फसल।
- फोटो : amar ujala
आलू की पछेती खेती पर मौसम की बेरुखी भारी पड़ सकती है। दो दिन से जिले में पड़ रहे कोहरे से आलू की फसल में झुलसा रोग लगने का खतरा मंडराने लगा है। समय रहते किसानों ने बचाव व रोकथाम का उपाय न किया तो मंदी के साथ-साथ उत्पादन में गिरावट आना तय है।
दिसंबर माह के आखिरी सप्ताह में मौसम ने रंग बदलना शुरू कर दिया है। गुरुवार शाम से शुरू हुई कोहरे की धुंध दूसरे दिन भी छाई रही। दोपहर में गुनगुनी धूप निकलने के बाद चार बजे से फिर धुंध छा गई। मौसम की यह बेरुखी आलू की पछेती खेती करने वाले किसानों पर भारी पड़ सकती है।
जानकारों की मानें तो कोहरा आलू की पत्तियों पर जमा हो जाता है। ठंडे मौसम में तापमान में गिरावट आने के चलते आलू की फसलों में झुलसा रोग लग जाता है। इससे आलू के पौधों की पत्तियां व तना मुरझा जाता है। तने व पत्तियों के मुरझाने का असर सीधे उत्पादन पर पड़ता है।
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कच्चे समय में रोग लगने से आलू समान रूप से विकास नहीं कर पाते और छोटे-छोटे रह जाते हैं। इससे उत्पादन की मात्रा आधे से भी कम हो जाती है। खराब हुए मौसम को लेकर समय पर सचेत न होने वाले किसान आलू में छाई मंदी की मार तो झेल ही रहे हैं, खुदाई के दौरान उन्हें कम पैदावार का दंश भी भुगतना पड़ सकता है।
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दिसंबर माह के आखिरी सप्ताह में मौसम ने रंग बदलना शुरू कर दिया है। गुरुवार शाम से शुरू हुई कोहरे की धुंध दूसरे दिन भी छाई रही। दोपहर में गुनगुनी धूप निकलने के बाद चार बजे से फिर धुंध छा गई। मौसम की यह बेरुखी आलू की पछेती खेती करने वाले किसानों पर भारी पड़ सकती है।
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जानकारों की मानें तो कोहरा आलू की पत्तियों पर जमा हो जाता है। ठंडे मौसम में तापमान में गिरावट आने के चलते आलू की फसलों में झुलसा रोग लग जाता है। इससे आलू के पौधों की पत्तियां व तना मुरझा जाता है। तने व पत्तियों के मुरझाने का असर सीधे उत्पादन पर पड़ता है।
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कच्चे समय में रोग लगने से आलू समान रूप से विकास नहीं कर पाते और छोटे-छोटे रह जाते हैं। इससे उत्पादन की मात्रा आधे से भी कम हो जाती है। खराब हुए मौसम को लेकर समय पर सचेत न होने वाले किसान आलू में छाई मंदी की मार तो झेल ही रहे हैं, खुदाई के दौरान उन्हें कम पैदावार का दंश भी भुगतना पड़ सकता है।