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Kaushambi News: नाली निर्माण से होगा जलजमाव का समाधान

Thu, 08 Jan 2026 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Thu, 08 Jan 2026 01:05 AM IST
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Waterlogging will be resolved by constructing drains
सैयद सरावां में जलजमाव की समस्या को डीएम से बताता ग्रामीण। स्रोत : जिला प्रशासन
मूरतगंज विकास खंड के ग्राम सैयद सरावां में लंबे समय से बने जलजमाव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए डीएम डॉ. अमित पाल ने बुधवार को मौके पर वस्तुस्थिति का जायजा लिया। जलजमाव के कारण ग्रामीणों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश दिए।
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डीएम ने नायब तहसीलदार संजय कुमार को तालाब की पैमाइश कराकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने खंड विकास अधिकारी को निर्देशित किया कि गांव में नाली का निर्माण कराकर जलजमाव की समुचित निकासी सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा गांव में साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था को कहा, जिससे भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।
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उन्होंने मौके पर मौजूद ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना। ग्रामीणों ने जलभराव, गंदगी और आवागमन में हो रही परेशानी से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी।
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निजी भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को शिफ्ट करने के निर्देश

डीएम डॉ. अमित पाल ने बुधवार को उदयन सभागार में जिला पोषण समिति की बैठक में आंगनबाड़ी एवं पोषण से जुड़ी योजनाओं की गहन समीक्षा की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि निजी भवनों में संचालित सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को सरकारी भवनों में शिफ्ट कराया जाए। इसके लिए पांच दिवस के भीतर सूची तैयार कर जिला पंचायतराज अधिकारी और खंड विकास अधिकारियों से समन्वय करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि सभी आंगनबाड़ी केंद्र प्रतिदिन समय से खुलें और लंबे समय से अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को नियमित केंद्र भेजने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने सीडीपीओ कार्यालयों में स्थित गोदामों की जांच कर कमियों को दूर कराने और पोषण ट्रैकर पर शत-प्रतिशत फीडिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


डीएम ने सैम (अति गंभीर कुपोषण) और मैम (मध्यम कुपोषण) बच्चों की जानकारी लेते हुए कहा कि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाए और उनका नियमित फॉलोअप किया जाए।
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