{"_id":"58bb0d0c4f1c1b7f59833017","slug":"water-supply-kaushambi","type":"story","status":"publish","title_hn":"किराए पर चल रहा स्वजल धारा योजना का जनरेटर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किराए पर चल रहा स्वजल धारा योजना का जनरेटर
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Sun, 05 Mar 2017 12:23 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वजलधारा योजना में हुए करोड़ों के घोटाले से पर्दा उठने लगा है। अमर उजाला में प्रकाशित 21 फरवरी की खबर को संज्ञान में लेने के बाद डीडीओ ने जांच शुरू की तो चौंकने वाला खुलासा हुआ। सदर ब्लॉक के भेलखा गांव की जांच करने पहुंचे डीडीओ को पता चला कि स्वजल धारा योजना के तहत खरीदे गए जनरेटर को किराए पर चलाया जा रहा है। इससे गांव के जिम्मेदार रुपये कमा रहे हैं। डीडीओ ने जब यह पता करने का प्रयास किया कि आखिर जनरेटर से पानी की सप्लाई क्यों नहीं हो रही है तो पता चला कि पाइप लाइन ही नहीं बिछी है।
वित्तीय वर्ष 2003-04 में शासन ने स्वजलधारा योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत चिह्नित गांवों में बोरिंग कराकर पेयजल टंकी स्थापित करना था। इसके अलावा घरों तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछाना था। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर जनरेटर से सप्लाई होनी थी। इस योजना के तहत वर्ष 2009-10 जिले की 35 ग्राम सभाओं में लगभग 54 करोड़ रुपये खर्च किया गया था। इतना रुपया फूंकने के बाद भी संबंधित गांवों के लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच सका था।
इस खबर को अमर उजाला ने 21 फरवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीडीओ को प्रकरण की जांच सौंप दी थी। डीडीओ डीके दोहरे ने शुक्रवार को प्रकरण की जांच सदर ब्लॉक के भेलखा गांव में की। स्वजलधारा योजना से कराए गए कार्यों की जानकारी ली तो वह दंग रह गए। पता चला कि स्वजलधारा योजना के जनरेटर को किराए पर उठाया जाता है। इसके जरिए गांव के जिम्मेदार रुपये कमा रहे हैं। गांव में न तो अधिकारी को पेयजल टंकी मिली, न ही बोरिंग स्थल। प्रारभिंक रिपोर्ट चौंकाने वाली है। यह रिपोर्ट जल्द ही डीएम को भेजी जाएगी। डीडीओ ने बताया कि सभी गांवों की जांच की जाएगी। जांच के बाद अनियमितता मिलने पर एफआईआर दर्ज कराकर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
वित्तीय वर्ष 2003-04 में शासन ने स्वजलधारा योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत चिह्नित गांवों में बोरिंग कराकर पेयजल टंकी स्थापित करना था। इसके अलावा घरों तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछाना था। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर जनरेटर से सप्लाई होनी थी। इस योजना के तहत वर्ष 2009-10 जिले की 35 ग्राम सभाओं में लगभग 54 करोड़ रुपये खर्च किया गया था। इतना रुपया फूंकने के बाद भी संबंधित गांवों के लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच सका था।
विज्ञापन
इस खबर को अमर उजाला ने 21 फरवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीडीओ को प्रकरण की जांच सौंप दी थी। डीडीओ डीके दोहरे ने शुक्रवार को प्रकरण की जांच सदर ब्लॉक के भेलखा गांव में की। स्वजलधारा योजना से कराए गए कार्यों की जानकारी ली तो वह दंग रह गए। पता चला कि स्वजलधारा योजना के जनरेटर को किराए पर उठाया जाता है। इसके जरिए गांव के जिम्मेदार रुपये कमा रहे हैं। गांव में न तो अधिकारी को पेयजल टंकी मिली, न ही बोरिंग स्थल। प्रारभिंक रिपोर्ट चौंकाने वाली है। यह रिपोर्ट जल्द ही डीएम को भेजी जाएगी। डीडीओ ने बताया कि सभी गांवों की जांच की जाएगी। जांच के बाद अनियमितता मिलने पर एफआईआर दर्ज कराकर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन