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चायल में बाहरी और स्थानीय प्रत्ययाश्ाी के मुद्दे पर में उलझे वोटर
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चायल में बाहरी-स्थानीय में उलझे वोटर
विधानसभा चुनाव में क्षेत्र के मतदाताओं के सामने ऊहापोह की स्थिति बन गई है। यहां चुनाव अब दल नहीं बल्कि, बाहरी और स्थानीय के मुद्दे पर है। सपा और भाजपा अपना दल गठबंधन के उम्मीदवारों को बसपा व जनसत्ता पार्टी के उम्मीदवार कड़ी टक्कर देते दिख रहे हैं। ऐसे में विधानसभा की जनता सत्ता की कुंजी किसे सौंपेगी? यह साफ नहीं हो रहा है।
इसके अलावा कांग्रेस ने कसेंदा में रहने वाले जमीनी नेता तलत अजीम पर दांव लगाया है।
चायल में सीट भाजपा गठबंधन के अपना दल (एस) के खाते में चली गई। पार्टी ने यहां से फूलपुर के पूर्व सांसद नागेंद्र पटेल को प्रत्याशी बनाया है। नागेंद्र पटेल प्रयागराज जनपद के झूंसी निवासी हैं। वहीं, सपा ने प्रयागराज के शहर पश्चिमी से दो बार बसपा के टिकट पर विधायक रहीं पूजा पाल को चुनावी समर में उतारा है।
जबकि, इस सीट से सपा नेता चंद्रबली पटेल काफी दिनों से चुनाव की तैयारी में लगे थे। पूजा पाल को टिकट मिलने से चंद्रबली का खेमा काफी नाराज है। बसपा से क्षेत्र के ही अतुल द्विवेदी चुनाव मैदान में हैं। इस बीच जनसत्ता दल ने भी सरायअकिल निवासी कारोबारी अनिल केसरवानी को चुनाव मैदान में उतार दिया। जबकि, कांग्रेस ने पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष तलत अजीम को प्रत्याशी बनाया है।
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तलत भी कसेंदा के रहने वाले हैं। इसी कारण चायल विधानसभा में मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी बाहरी और स्थानीय के मुद्दे पर ध्रुवीकरण की कोशिशों में लग गए हैं। इसी कारण वोटर भी उलझन में हैं। ऐसे में जनता सत्ता की चाबी किसे सौंपेगी है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
सपा में गुटबाजी तेज, सिराथू में प्रचार कर रहे कार्यकर्ता
समाजवादी पार्टी में उम्मीदवार को लेकर संगठन में नाराजगी है। सपा मुखिया के समझाने पर थोड़ा बहुत माहौल शांत हुआ तो गुटबाजी सक्रिय हो गई। नतीजा यह है कि अनदेखी के कारण पार्टी के कई जिम्मेदार पदाधिकारी और कार्यकर्ता सिराथू विधानसभा में चुनाव प्रचार में जुट गए हैं।
सिराथू विधानसभा : भाजपा-सपा के बीच सीधी टककर
बसपा के अभेद्य दुर्ग और सपा की आंधी के बीच 2012 के चुनाव में सिराथू से भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य ने पहली बार कमल खिलाया था। 2017 में केशव ने अपने करीबी शीतला प्रसाद पटेल को भी चुनाव जिताने में कामयाब हुए। अब डिप्टी सीएम केशव मौर्य अपने गृहनगर की सीट से चुनावी समर में हैं। उनके खिलाफ सपा गठबंधन ने अपना दल (कमेरावादी) की मुखिया कृष्णा पटेल की बेटी डॉ. पल्लवी पटेल को मैदान में उतारा है। केशव मौर्य खुद को जिले का बेटा तो पल्लवी अपने को बहू बताकर चुनाव को रोचक बना दिया है।
भाजपा हाट सीट पर बड़े अंतर से जीत को लेकर तगड़ी रणनीति के साथ काम कर रही है। वहीं, सपा भी पूरी तैयारी के साथ घेराबंदी में लगी है। अखिलेश यादव ने पहले ही एलान कर दिया है कि जरूरत पड़ी तो वह खुद सिराथू आकर साइकिल चलाएंगे। हालांकि बसपा ने ऐन वक्त पर मुस्लिम प्रत्याशी मुंसब अली उस्मानी को मैदान में उतारकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। लेकिन, कांग्रेस प्रत्याशी सीमा देवी बसपा के काडर वोट में सेंध लगातीं दिख रहीं हैं। ऐसे में हाईप्रोफाइल सीट पर भाजपा सपा के बीच सीधी टक्कर के आसार दिख रहे हैं।
मंझनपुर विधानसभा :
त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी मंझनपुर सीट
मंझनपुर (सु.) विधानसभा क्षेत्र में पिछले पांच चुनाव से आमतौर पर मुकाबला दो दलों के बीच ही होता रहा है। कभी बसपा-सपा तो कभी बसपा-भाजपा के बीच टक्कर देखी गई। इसमें चार बार बाजी बसपा के हाथ लगी तो पांचवीं बार 2017 में भाजपा का पलड़ा भारी रहा। लेकिन इस बार हालात बदले हैं। दरअसल बसपा से चार बार विधायक रहे इंद्रजीत सरोज पाला बदलकर सपा से चुनावी समर में हैं। वहीं, भाजपा ने एक बार फिर से अपने सिटिंग विधायक लालबहादुर पर भरोसा किया है। जबकि बसपा ने डॉ. नीतू कनौजिया को मैदान में उतारा है। सपा प्रत्याशी को जातिगत समीकरण के आधार पर जीत का भरोसा है। लेकिन पाला बदलने से ढाई तक साथ रहा काडर मत नाराज है। अंदर खाने से सपाई भी विरोध कर रहे हैं। वहीं भाजपा प्रत्याशी को सरकार द्वारा पांच साल में कराए गए विकास कार्यों के दम पर चुनावी वैतरणी पार करने का भरोसा है। जबकि बसपा को अपने काडर मतों पर पूरा भरोसा है। ऐसे में यहां मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार बन रहे हैं।
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विधानसभा चुनाव में क्षेत्र के मतदाताओं के सामने ऊहापोह की स्थिति बन गई है। यहां चुनाव अब दल नहीं बल्कि, बाहरी और स्थानीय के मुद्दे पर है। सपा और भाजपा अपना दल गठबंधन के उम्मीदवारों को बसपा व जनसत्ता पार्टी के उम्मीदवार कड़ी टक्कर देते दिख रहे हैं। ऐसे में विधानसभा की जनता सत्ता की कुंजी किसे सौंपेगी? यह साफ नहीं हो रहा है।
इसके अलावा कांग्रेस ने कसेंदा में रहने वाले जमीनी नेता तलत अजीम पर दांव लगाया है।
चायल में सीट भाजपा गठबंधन के अपना दल (एस) के खाते में चली गई। पार्टी ने यहां से फूलपुर के पूर्व सांसद नागेंद्र पटेल को प्रत्याशी बनाया है। नागेंद्र पटेल प्रयागराज जनपद के झूंसी निवासी हैं। वहीं, सपा ने प्रयागराज के शहर पश्चिमी से दो बार बसपा के टिकट पर विधायक रहीं पूजा पाल को चुनावी समर में उतारा है।
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जबकि, इस सीट से सपा नेता चंद्रबली पटेल काफी दिनों से चुनाव की तैयारी में लगे थे। पूजा पाल को टिकट मिलने से चंद्रबली का खेमा काफी नाराज है। बसपा से क्षेत्र के ही अतुल द्विवेदी चुनाव मैदान में हैं। इस बीच जनसत्ता दल ने भी सरायअकिल निवासी कारोबारी अनिल केसरवानी को चुनाव मैदान में उतार दिया। जबकि, कांग्रेस ने पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष तलत अजीम को प्रत्याशी बनाया है।
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तलत भी कसेंदा के रहने वाले हैं। इसी कारण चायल विधानसभा में मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी बाहरी और स्थानीय के मुद्दे पर ध्रुवीकरण की कोशिशों में लग गए हैं। इसी कारण वोटर भी उलझन में हैं। ऐसे में जनता सत्ता की चाबी किसे सौंपेगी है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
सपा में गुटबाजी तेज, सिराथू में प्रचार कर रहे कार्यकर्ता
समाजवादी पार्टी में उम्मीदवार को लेकर संगठन में नाराजगी है। सपा मुखिया के समझाने पर थोड़ा बहुत माहौल शांत हुआ तो गुटबाजी सक्रिय हो गई। नतीजा यह है कि अनदेखी के कारण पार्टी के कई जिम्मेदार पदाधिकारी और कार्यकर्ता सिराथू विधानसभा में चुनाव प्रचार में जुट गए हैं।
सिराथू विधानसभा : भाजपा-सपा के बीच सीधी टककर
बसपा के अभेद्य दुर्ग और सपा की आंधी के बीच 2012 के चुनाव में सिराथू से भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य ने पहली बार कमल खिलाया था। 2017 में केशव ने अपने करीबी शीतला प्रसाद पटेल को भी चुनाव जिताने में कामयाब हुए। अब डिप्टी सीएम केशव मौर्य अपने गृहनगर की सीट से चुनावी समर में हैं। उनके खिलाफ सपा गठबंधन ने अपना दल (कमेरावादी) की मुखिया कृष्णा पटेल की बेटी डॉ. पल्लवी पटेल को मैदान में उतारा है। केशव मौर्य खुद को जिले का बेटा तो पल्लवी अपने को बहू बताकर चुनाव को रोचक बना दिया है।
भाजपा हाट सीट पर बड़े अंतर से जीत को लेकर तगड़ी रणनीति के साथ काम कर रही है। वहीं, सपा भी पूरी तैयारी के साथ घेराबंदी में लगी है। अखिलेश यादव ने पहले ही एलान कर दिया है कि जरूरत पड़ी तो वह खुद सिराथू आकर साइकिल चलाएंगे। हालांकि बसपा ने ऐन वक्त पर मुस्लिम प्रत्याशी मुंसब अली उस्मानी को मैदान में उतारकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। लेकिन, कांग्रेस प्रत्याशी सीमा देवी बसपा के काडर वोट में सेंध लगातीं दिख रहीं हैं। ऐसे में हाईप्रोफाइल सीट पर भाजपा सपा के बीच सीधी टक्कर के आसार दिख रहे हैं।
मंझनपुर विधानसभा :
त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी मंझनपुर सीट
मंझनपुर (सु.) विधानसभा क्षेत्र में पिछले पांच चुनाव से आमतौर पर मुकाबला दो दलों के बीच ही होता रहा है। कभी बसपा-सपा तो कभी बसपा-भाजपा के बीच टक्कर देखी गई। इसमें चार बार बाजी बसपा के हाथ लगी तो पांचवीं बार 2017 में भाजपा का पलड़ा भारी रहा। लेकिन इस बार हालात बदले हैं। दरअसल बसपा से चार बार विधायक रहे इंद्रजीत सरोज पाला बदलकर सपा से चुनावी समर में हैं। वहीं, भाजपा ने एक बार फिर से अपने सिटिंग विधायक लालबहादुर पर भरोसा किया है। जबकि बसपा ने डॉ. नीतू कनौजिया को मैदान में उतारा है। सपा प्रत्याशी को जातिगत समीकरण के आधार पर जीत का भरोसा है। लेकिन पाला बदलने से ढाई तक साथ रहा काडर मत नाराज है। अंदर खाने से सपाई भी विरोध कर रहे हैं। वहीं भाजपा प्रत्याशी को सरकार द्वारा पांच साल में कराए गए विकास कार्यों के दम पर चुनावी वैतरणी पार करने का भरोसा है। जबकि बसपा को अपने काडर मतों पर पूरा भरोसा है। ऐसे में यहां मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार बन रहे हैं।