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कहीं अधूरे पड़े सामुदायिक शौचालय तो कहीं लटक रहे ताले
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कौशाम्बी ब्लॉक की 51 ग्राम पंचायतों में कागज पर भले ही सामुदायिक शौचालयों का संचालन हो गया हो। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। यहां के अधिकतर गांवों में या तो सामुदायिक शौचालय अधूरे पड़े हैं या फिर उनके ताले ही नहीं खुल रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों को अब भी खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है।
पंचायती राज विभाग की ओर से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत घर-घर शौचालय बनवाए गए हैं। लेकिन तमाम ग्रामीण ऐसे हैं जिनके पास शौचालय बनवाने के लिए भूमि ही नहीं है। ऐसे लोग भी खुले में शौच नहीं जाएं, इसको देखते हुए हर ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचलय का निर्माण कराया गया है। शौचालयों की देखरेख के लिए स्वयं सहायता समूह से केयर टेकर भी रखे गए हैं। दो माह पहले ग्राम पंचायतों ने इन केयर टेकरों को नौ हजार रुपये महीने की दर से 54-54 हजार मानदेय का भुगतान भी कर दिया।
इसके बावजूद कौशाम्बी ब्लॉक क्षेत्र में बने सामुदायिक शौचालयों के ताले नहीं खुल रहे हैं। अमर उजाला की पड़ताल में पता चला कि ज्यादातर शौचालय अधूरे पड़े हैं। किसी में रनिंग वाटर सप्लाई नहीं है तो किसी में गड्ढा नहीं बना या फिर टाइल्स नहीं लगी है। इसकी बानगी ग्राम पंचायत बंधुरी रसूलीपुर, विदांव और बेरूई आदि गांवों में देखी जा सकती है। इन गांवों में सार्वजनिक शौचालय का निर्माण अभी भी अधर में है। नतीजतन अभी भी ग्रामीण खुले में शौच जाने को मजबूर हो रहे हैं।
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इनका कहना है
सामुदायिक शौचालयों में ताला बंद होने की फिलहाल कोई शिकायत नहीं मिली है। केयर टेकरों को कुछ गांव में दो महीने का तो किसी में छह महीने का भुगतान कर दिया गया है। इसके बाद भी शौचालय आम जन के लिए नहीं खोले जा रहे हैं तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दुर्गेश मिश्र-एडीओ पंचायत, कौशाम्बी
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पंचायती राज विभाग की ओर से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत घर-घर शौचालय बनवाए गए हैं। लेकिन तमाम ग्रामीण ऐसे हैं जिनके पास शौचालय बनवाने के लिए भूमि ही नहीं है। ऐसे लोग भी खुले में शौच नहीं जाएं, इसको देखते हुए हर ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचलय का निर्माण कराया गया है। शौचालयों की देखरेख के लिए स्वयं सहायता समूह से केयर टेकर भी रखे गए हैं। दो माह पहले ग्राम पंचायतों ने इन केयर टेकरों को नौ हजार रुपये महीने की दर से 54-54 हजार मानदेय का भुगतान भी कर दिया।
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इसके बावजूद कौशाम्बी ब्लॉक क्षेत्र में बने सामुदायिक शौचालयों के ताले नहीं खुल रहे हैं। अमर उजाला की पड़ताल में पता चला कि ज्यादातर शौचालय अधूरे पड़े हैं। किसी में रनिंग वाटर सप्लाई नहीं है तो किसी में गड्ढा नहीं बना या फिर टाइल्स नहीं लगी है। इसकी बानगी ग्राम पंचायत बंधुरी रसूलीपुर, विदांव और बेरूई आदि गांवों में देखी जा सकती है। इन गांवों में सार्वजनिक शौचालय का निर्माण अभी भी अधर में है। नतीजतन अभी भी ग्रामीण खुले में शौच जाने को मजबूर हो रहे हैं।
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इनका कहना है
सामुदायिक शौचालयों में ताला बंद होने की फिलहाल कोई शिकायत नहीं मिली है। केयर टेकरों को कुछ गांव में दो महीने का तो किसी में छह महीने का भुगतान कर दिया गया है। इसके बाद भी शौचालय आम जन के लिए नहीं खोले जा रहे हैं तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दुर्गेश मिश्र-एडीओ पंचायत, कौशाम्बी