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Kaushambi News: इस्लाम की तालीम को समझने के लिए कर्बला को समझें
Sun, 10 Sep 2023 07:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sun, 10 Sep 2023 07:44 PM IST
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मनौरी गांव में मजलिस को खेताब करते मौलाना
इस्लाम की तालीम को समझने के लिए कर्बला को समझें
-- मनौरी गांव में चेहल्लुम पर पंचायती इमामबाड़ा कला में हुई मजलिस
फोटो नं-20
संवाद न्यूज एजेंसी
नेवादा। मनौरी गांव में पैगम्बरे इस्लाम के नवासे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम व उनके 71 जानशीनों की चेहल्लुम पर पंचायती इमामबाड़ा कला में मजलिस हुई। मजलिस के बाद जुलूस में मासूम बच्चे हजरत अब्बास का अलम लेकर निकले। जुलूस में ताजिया, जुलजनाह, अलम व ताबूत पर अकीदतमंदों ने चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगी।
मजलिस की शुरूआत शोजख्वानी से हुई। आफताब हैदर, शब्बर अली और गौहर अली ने शोज पढ़ी। उसके बाद मौलाना सैयद जफर अब्बास गोरखपुरी ने मजलिस को खेताब करते हुए उन्होंने पढ़ा कि इस्लाम की तालीम को समझने के लिए कर्बला को समझना जरूरी है। कहा तीन रोज के भूखे-प्यासे इमाम हुसैन (अ.) को जालिमों ने करबला की तपती रेत पर शहीद कर दिया। इतना सुनते ही अजादार जारोकतार रोने लगे। जुलूस को अंजुमन मोहम्मदिया ने बरामद किया। अकीदतमंदों ने नौहाख्वानी, सीनाजनी व जंजीर का मातम किया। अंजुमन सदका ए जहरा करारी, अंजुमन अब्बासियस दांदूपुर, अंजुमन अब्बासिया नजरगंज बड़ागांव, अंजुमन अब्बासिया बांदा, अंजुमन अनीसिया सल्लाहपुर, अंजुमन दस्ता ए जैनुल ऐबा रायबरेली और अंजुमन ए असगरिया कदीम मंझनपुर ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। जुलूस में पांच जुलजनाह बरामद किया गया। जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ पंचायती करबला में समाप्त हुआ।
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फोटो नं-20
संवाद न्यूज एजेंसी
नेवादा। मनौरी गांव में पैगम्बरे इस्लाम के नवासे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम व उनके 71 जानशीनों की चेहल्लुम पर पंचायती इमामबाड़ा कला में मजलिस हुई। मजलिस के बाद जुलूस में मासूम बच्चे हजरत अब्बास का अलम लेकर निकले। जुलूस में ताजिया, जुलजनाह, अलम व ताबूत पर अकीदतमंदों ने चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगी।
मजलिस की शुरूआत शोजख्वानी से हुई। आफताब हैदर, शब्बर अली और गौहर अली ने शोज पढ़ी। उसके बाद मौलाना सैयद जफर अब्बास गोरखपुरी ने मजलिस को खेताब करते हुए उन्होंने पढ़ा कि इस्लाम की तालीम को समझने के लिए कर्बला को समझना जरूरी है। कहा तीन रोज के भूखे-प्यासे इमाम हुसैन (अ.) को जालिमों ने करबला की तपती रेत पर शहीद कर दिया। इतना सुनते ही अजादार जारोकतार रोने लगे। जुलूस को अंजुमन मोहम्मदिया ने बरामद किया। अकीदतमंदों ने नौहाख्वानी, सीनाजनी व जंजीर का मातम किया। अंजुमन सदका ए जहरा करारी, अंजुमन अब्बासियस दांदूपुर, अंजुमन अब्बासिया नजरगंज बड़ागांव, अंजुमन अब्बासिया बांदा, अंजुमन अनीसिया सल्लाहपुर, अंजुमन दस्ता ए जैनुल ऐबा रायबरेली और अंजुमन ए असगरिया कदीम मंझनपुर ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। जुलूस में पांच जुलजनाह बरामद किया गया। जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ पंचायती करबला में समाप्त हुआ।
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