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Kaushambi News: झाड़-फूंक में गंवाया वक्त... दवा से बच सकती थीं कई जिंदगी
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जिले में बारिश के साथ ही सर्पदंश और जहरीले जीव-जंतुओं के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। बीते कुछ ही दिनों में जिले में सर्पदंश से पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि दो मरीजों का उपचार चल रहा है।
अधिकांश मामलों में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार का सहारा लेने से कीमती समय नष्ट हो गया। चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश के बाद हर एक मिनट महत्वपूर्ण होता है। समय पर अस्पताल पहुंचने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने लोगों से अपील की है कि सांप या किसी भी जहरीले जीव के काटने पर झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या देसी दवा के भरोसे समय बर्बाद न करें। मरीज को शांत रखें, प्रभावित अंग की हलचल कम से कम करें और बिना देरी किए नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाएं, जहां एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) सहित सभी आवश्यक उपचार निशुल्क उपलब्ध है।
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केस-1: मंझनपुर के वार्ड-24 संत कबीर नगर निवासी 30 वर्षीय अनुसुइया देवी को घर में सांप ने काट लिया। परिजन पहले उन्हें झाड़-फूंक के लिए सिरचनपुर ले गए, लेकिन हालत बिगड़ने पर जब जिला अस्पताल पहुंचे, तो चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
केस-2: सरायअकिल के धारुपुर गांव में सुनीता देवी (45) खेत में मिर्च की बेहन (नर्सरी) से बरसाती पानी निकाल रही थीं। सांप के डसने के बाद पहले झाड़-फूंक कराई गई, जिससे घंटों समय बीत गया। बाद में हालत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज मंझनपुर ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
केस-3: करारी के विश्वनाथ का पुरवा में छह वर्षीय दीक्षा धान की बेहन की रखवाली के दौरान सर्पदंश का शिकार हो गई। परिजनों ने सूझबूझ दिखाते हुए उसे तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है और स्थिति नियंत्रण में है।
केस-4: चरवा के सैयद सरावां गांव में घर के बाहर खेल रहे 10 वर्षीय वंश को सांप ने डस लिया। इसके बाद परिजन काफी समय तक दवा पिलाने और झाड़-फूंक के चक्कर में भटकते रहे। अंत में हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
केस-5: कड़ा के म्योहरा दारानगर निवासी बेलपती (52) को घर में जहरीले सांप ने काट लिया। शुरुआत में परिवार के लोग स्थिति समझ नहीं पाए और झाड़-फूंक के लिए इधर-उधर भटकते रहे। हालत बिगड़ने पर परिजन महिला को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के थोड़ी देर बाद ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
केस-6: सैनी के गुलामीपुर गनपा में खेत गए नरेंद्र कुमार को बीते शनिवार की सुबह किसी जहरीले जीव-जंतु ने काट लिया। इसके बाद परिवार के लोग कुछ देर झाड़-फूंक के चक्कर में भटकते रहे। अंत में जब हालत बिगड़ने पर वे अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में ही नरेंद्र की मौत हो गई।
केस-7: जवाहर नवोदय विद्यालय, टेवां के 11वीं के छात्र अश्वनी कुमार को शुक्रवार की रात विद्यालय परिसर में किसी जहरीले जीव-जंतु ने काट लिया। विद्यालय स्टाफ ने बिना समय गंवाए तत्काल एंबुलेंस से उसे जिला अस्पताल पहुंचाया। समय पर सही इलाज मिलने से छात्र की हालत अब पूरी तरह स्थिर है।
लगातार बारिश से सांपों के बिलों में पानी भर जाता है, जिसके कारण वे खेतों, झाड़ियों और घरों के आसपास निकल आते हैं। खेतों में काम करते समय किसान भाई ऊंचे जूते पहनें, रात में टॉर्च का अनिवार्य रूप से उपयोग करें और झाड़ियों या लकड़ी के ढेर में बिना देखे हाथ न डालें। विषैले सांप के काटने पर सिर्फ और सिर्फ अस्पताल ही एकमात्र विकल्प है।
-- डॉ. मनोज सिंह, कृषि वैज्ञानिक
जिले के सभी सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) और पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) में पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) उपलब्ध है और सभी स्वास्थ्यकर्मियों को इसके लिए प्रशिक्षित किया गया है। सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय न गंवाएं। मरीज को जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचाएंगे, जान बचने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।
-- डॉ. संजय कुमार सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ)
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अधिकांश मामलों में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार का सहारा लेने से कीमती समय नष्ट हो गया। चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश के बाद हर एक मिनट महत्वपूर्ण होता है। समय पर अस्पताल पहुंचने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
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सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने लोगों से अपील की है कि सांप या किसी भी जहरीले जीव के काटने पर झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या देसी दवा के भरोसे समय बर्बाद न करें। मरीज को शांत रखें, प्रभावित अंग की हलचल कम से कम करें और बिना देरी किए नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाएं, जहां एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) सहित सभी आवश्यक उपचार निशुल्क उपलब्ध है।
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केस-1: मंझनपुर के वार्ड-24 संत कबीर नगर निवासी 30 वर्षीय अनुसुइया देवी को घर में सांप ने काट लिया। परिजन पहले उन्हें झाड़-फूंक के लिए सिरचनपुर ले गए, लेकिन हालत बिगड़ने पर जब जिला अस्पताल पहुंचे, तो चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
केस-2: सरायअकिल के धारुपुर गांव में सुनीता देवी (45) खेत में मिर्च की बेहन (नर्सरी) से बरसाती पानी निकाल रही थीं। सांप के डसने के बाद पहले झाड़-फूंक कराई गई, जिससे घंटों समय बीत गया। बाद में हालत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज मंझनपुर ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
केस-3: करारी के विश्वनाथ का पुरवा में छह वर्षीय दीक्षा धान की बेहन की रखवाली के दौरान सर्पदंश का शिकार हो गई। परिजनों ने सूझबूझ दिखाते हुए उसे तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है और स्थिति नियंत्रण में है।
केस-4: चरवा के सैयद सरावां गांव में घर के बाहर खेल रहे 10 वर्षीय वंश को सांप ने डस लिया। इसके बाद परिजन काफी समय तक दवा पिलाने और झाड़-फूंक के चक्कर में भटकते रहे। अंत में हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
केस-5: कड़ा के म्योहरा दारानगर निवासी बेलपती (52) को घर में जहरीले सांप ने काट लिया। शुरुआत में परिवार के लोग स्थिति समझ नहीं पाए और झाड़-फूंक के लिए इधर-उधर भटकते रहे। हालत बिगड़ने पर परिजन महिला को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के थोड़ी देर बाद ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
केस-6: सैनी के गुलामीपुर गनपा में खेत गए नरेंद्र कुमार को बीते शनिवार की सुबह किसी जहरीले जीव-जंतु ने काट लिया। इसके बाद परिवार के लोग कुछ देर झाड़-फूंक के चक्कर में भटकते रहे। अंत में जब हालत बिगड़ने पर वे अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में ही नरेंद्र की मौत हो गई।
केस-7: जवाहर नवोदय विद्यालय, टेवां के 11वीं के छात्र अश्वनी कुमार को शुक्रवार की रात विद्यालय परिसर में किसी जहरीले जीव-जंतु ने काट लिया। विद्यालय स्टाफ ने बिना समय गंवाए तत्काल एंबुलेंस से उसे जिला अस्पताल पहुंचाया। समय पर सही इलाज मिलने से छात्र की हालत अब पूरी तरह स्थिर है।
लगातार बारिश से सांपों के बिलों में पानी भर जाता है, जिसके कारण वे खेतों, झाड़ियों और घरों के आसपास निकल आते हैं। खेतों में काम करते समय किसान भाई ऊंचे जूते पहनें, रात में टॉर्च का अनिवार्य रूप से उपयोग करें और झाड़ियों या लकड़ी के ढेर में बिना देखे हाथ न डालें। विषैले सांप के काटने पर सिर्फ और सिर्फ अस्पताल ही एकमात्र विकल्प है।
जिले के सभी सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) और पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) में पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) उपलब्ध है और सभी स्वास्थ्यकर्मियों को इसके लिए प्रशिक्षित किया गया है। सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय न गंवाएं। मरीज को जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचाएंगे, जान बचने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।