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इंटरव्यू पैनल के गठन पर ही सवाल
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Thu, 09 Jul 2015 02:19 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से होने वाले इंटरव्यू पैनल के गठन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। पैनल का गठन अध्यक्ष एवं सदस्यों की अगुवाई में किया जाता है। पैनल की अगुवाई करने वाले अध्यक्ष एवं सदस्यों के लिए नियम है कि वह पैनल में शामिल विशेषज्ञों से वरिष्ठ होने चाहिए। इसके विपरीत इंटरव्यू पैनल में शामिल होने वाले ये एक्सपर्ट बोर्ड के अगुवा से अधिक योग्यता वाले हैं।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन की ओर से होने वाले टीजीटी-पीजीटी एवं प्रधानाचार्य के साक्षात्कार में सभी सदस्यों की अगुवाई में इंटरव्यू पैनल का गठन किया जाता है। इंटरव्यू पैनल में अभ्यर्थियों की क्षमता परखने के लिए विश्वविद्यालय, डिग्री कॉलेज एवं अन्य शैक्षिक संस्थानों से नामी विशेषज्ञों को बुलाया जाता है। ऐसा देखने में आया है कि इंटरव्यू पैनल केविशेषज्ञ इंटरव्यू की अगुवाई कर रहे सदस्य अथवा अध्यक्ष से अधिक अनुभवी और योग्य होते हैं। इस बात को लेकर पर भी अभ्यर्थियों के साथ पैनल के विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं।
इसी प्रकार की हालत उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग एवं उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से होने वाले साक्षात्कार में दिखाई पड़ रहा है। लोक सेवा आयोग के साक्षात्कार में तो एक बार इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ प्रोफेसर एवं बीएचयू के पूर्व विभागाध्यक्ष ने इंटरव्यू पैनल के मुखिया का नाम सुनने के बाद साक्षात्कार बोर्ड में शामिल होेने से मना कर दिया था। आयोगों की इस प्रकार की मनमानी को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन की ओर से होने वाले टीजीटी-पीजीटी एवं प्रधानाचार्य के साक्षात्कार में सभी सदस्यों की अगुवाई में इंटरव्यू पैनल का गठन किया जाता है। इंटरव्यू पैनल में अभ्यर्थियों की क्षमता परखने के लिए विश्वविद्यालय, डिग्री कॉलेज एवं अन्य शैक्षिक संस्थानों से नामी विशेषज्ञों को बुलाया जाता है। ऐसा देखने में आया है कि इंटरव्यू पैनल केविशेषज्ञ इंटरव्यू की अगुवाई कर रहे सदस्य अथवा अध्यक्ष से अधिक अनुभवी और योग्य होते हैं। इस बात को लेकर पर भी अभ्यर्थियों के साथ पैनल के विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं।
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इसी प्रकार की हालत उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग एवं उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से होने वाले साक्षात्कार में दिखाई पड़ रहा है। लोक सेवा आयोग के साक्षात्कार में तो एक बार इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ प्रोफेसर एवं बीएचयू के पूर्व विभागाध्यक्ष ने इंटरव्यू पैनल के मुखिया का नाम सुनने के बाद साक्षात्कार बोर्ड में शामिल होेने से मना कर दिया था। आयोगों की इस प्रकार की मनमानी को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं।
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