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Kaushambi News: बारिश में बढ़ा सर्पदंश का खतरा, जिले के 30 अस्पतालों में अलर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2026 12:27 AM IST
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Snakebite risk rises during rains; alert issued for 30 hospitals in the district.
मानसून शुरू होते ही जिले में जहरीले सांपों का खतरा बढ़ गया है। पिछले एक साल में जिले के भीतर 310 लोग सर्पदंश का शिकार हुए हैं, जबकि अकेले जून महीने में ही 38 सर्पदंश के कारण अस्पताल पहुंचे। इनमें से गंभीर हालत वाले 48 मरीजों को एसआरएन अस्पताल, प्रयागराज रेफर करना पड़ा। इन सभी मरीजों के इलाज में कुल 1684 एंटी स्नेक वेनम वायल खर्च हुईं। बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 30 सरकारी अस्पतालों में 2205 एंटी स्नेक वेनम वायल उपलब्ध कराया गया है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बरसात के मौसम में जलभराव के कारण खेत-खलिहानों और झाड़ियों वाले इलाकों से जहरीले सांप अधिक संख्या में बाहर निकलते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
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वर्तमान में जिले के सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम का पर्याप्त स्टॉक है, जिसमें जिला अस्पताल में 170, सीएचसी सिराथू में 80, सीएचसी कौशाम्बी में 49, सीएचसी मूरतगंज में 41, सीएचसी मंझनपुर और कड़ा में 35-35, और सीएचसी सराय अकिल में 26 वायल उपलब्ध हैं। इसके अलावा, सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी 10-10 वायल का स्टॉक सुरक्षित रखा गया है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संजय कुमार ने लोगों से अपील की है कि सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक के चक्कर में समय बिल्कुल न गंवाएं। मरीज को शांत रखें, प्रभावित अंग की हलचल कम से कम होने दें और तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं। समय पर एंटी स्नेक वेनम मिलने से मरीजों की जान आसानी से बचाई जा सकती है।
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इनसेट : झाड़-फूंक में न गवाएं समय, जान जाने का खतरा

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सर्पदंश के बाद सबसे बड़ी गलती झाड़-फूंक और अन्य उपचार के चक्कर में पड़ना है। डॉक्टरों का कहना है कि हर साल ऐसे कई मरीज गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचते हैं क्योंकि पहले उन्हें ओझा के पास ले जाया जाता है। बीते वर्ष जिले के कई मामलों में मरीजों को देर से अस्पताल पहुंचाने के कारण प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल रेफर करना पड़ा। वहीं इस वर्ष भी जून महीने में गंभीर हालत वाले तीन मरीजों को रेफर किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्पदंश के बाद शुरुआती एक से दो घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसी दौरान एंटी स्नेक वेनम मिलने पर जान बचने की संभावना सर्वाधिक रहती है।


स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी
सर्पदंश होने पर घबराएं नहीं, मरीज को शांत रखें।
प्रभावित अंग को कम से कम हिलाएं।
झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या चीरा लगाने जैसी गलत परंपराओं से बचें।
सांप पकड़ने या मारने की कोशिश न करें।
मरीज को तुरंत 108 एंबुलेंस या निजी वाहन से नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाएं।
डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न दें।
अस्पताल में उपलब्ध एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) ही इसका वैज्ञानिक और प्रभावी इलाज है।
सर्पदंश से मौत पर परिवार को मिलती है चार लाख रुपये की आर्थिक मदद
उत्तर प्रदेश सरकार की राजस्व विभाग की दैवीय आपदा राहत योजना के तहत सर्पदंश से मृत्यु होने पर (यदि जांच में मौत का कारण सर्पदंश की पुष्टि होती है और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होती है) मृतक के परिजनों को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके लिए पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और राजस्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराई जाती है। संवाद
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