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Kaushambi News: एक जमानतदार पर भी मिल सकती है रिहाई, बंदियों को मिली संवैधानिक अधिकारों की जानकारी
Fri, 16 Jan 2026 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 16 Jan 2026 12:40 AM IST
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जिला जेल टेवां में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर में लोगों को संबोधित करते वक्ता- प्रशासन
- फोटो : आनंदा डेयरी प्लांट में जांच करने पहुंची आयकर विभाग की टीम।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जनपद न्यायालय कौशाम्बी के तत्वावधान में जिला जेल टेवां में शोषण के विरुद्ध अधिकार और नशा मुक्त भारत अभियान विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में चीफ लीगल एंड डिफेंस काउंसिल अमित कुमार मिश्र ने बंदियों को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बंदियों के अधिकारों के संरक्षण के लिए संविधान और विभिन्न कानूनों में कई प्रावधान हैं, साथ ही उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी करते रहते हैं। लेकिन जानकारी के अभाव में कई लोग इनका लाभ नहीं उठा पाते।
अमित मिश्र ने बताया कि बच्ची देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में दिए गए निर्देशों के अनुसार आरोपी बंदी को केवल एक जमानतदार और उसकी आर्थिक क्षमता के अनुरूप जमानत राशि पर भी रिहा किया जा सकता है। यदि कोई बंदी सात दिनों में जमानतदार प्रस्तुत नहीं कर पाता है तो जेल अधीक्षक को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को सूचित करना अनिवार्य है, ताकि उसे निशुल्क विधिक सहायता के माध्यम से जमानत दिलाने में मदद की जा सके।
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शिविर के अंत में बंदियों को नशा मुक्त जीवन जीने की शपथ दिलाई गई। इस दौरान जेल अधीक्षक, उप जेल अधीक्षक, चीफ लीगल एड डिफेंस सहायक तिलक नारायण पांडेय सहित बड़ी संख्या में बंदी उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि बंदियों के अधिकारों के संरक्षण के लिए संविधान और विभिन्न कानूनों में कई प्रावधान हैं, साथ ही उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी करते रहते हैं। लेकिन जानकारी के अभाव में कई लोग इनका लाभ नहीं उठा पाते।
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अमित मिश्र ने बताया कि बच्ची देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में दिए गए निर्देशों के अनुसार आरोपी बंदी को केवल एक जमानतदार और उसकी आर्थिक क्षमता के अनुरूप जमानत राशि पर भी रिहा किया जा सकता है। यदि कोई बंदी सात दिनों में जमानतदार प्रस्तुत नहीं कर पाता है तो जेल अधीक्षक को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को सूचित करना अनिवार्य है, ताकि उसे निशुल्क विधिक सहायता के माध्यम से जमानत दिलाने में मदद की जा सके।
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शिविर के अंत में बंदियों को नशा मुक्त जीवन जीने की शपथ दिलाई गई। इस दौरान जेल अधीक्षक, उप जेल अधीक्षक, चीफ लीगल एड डिफेंस सहायक तिलक नारायण पांडेय सहित बड़ी संख्या में बंदी उपस्थित रहे।