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20 साल से करारी में रह रहा था आईएसआईएस एजेंट, बेखबर थीं खुफिया एजेंसियां,
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करारी। दुनिया के सबसे बड़े और मशहूर आतंकी संगठन आईएसआई का एजेंट करीब 20 साल से करारी में रह रहा था। यहां के नयागंज मोहल्ले में उसका मकान बना हुआ है। परिजन इसी घर में रहते हैं। हालांकि, एजेंट खुद अक्सर गायब रहता था। किसी को नहीं पता कि वह कई-कई महीनों के लिए कहां चला जाता था। कस्बाइयों को उसकी गतिविधियां खटक रही थीं। पर, किसी ने रिस्क लेना ठीक नहीं समझा। हैरतअंगेज बात है कि स्थानीय खुफिया एजेंसियां भी इसे लेकर पूरी तरह बेखबर थीं। गिरफ्तारी के बाद अब साफ हो गया है कि दोआबा के तार आतंकियों से जुड़े हुए हैं।
आईएसआई एजेंट इंतजार सैयद उर्फ इंतजार मेंहदी मूलत: कौशाम्बी जिले के सरायअकिल थाना स्थित अतरसुइया गांव का रहने वाला है। जनपद के अतिसंवेदनशील करारी कस्बे में उसकी ससुराल है और यहीं बहन भी ब्याही है। इन्हीं रिश्तेदारियों की वजह से उसको करारी में शरण मिली। रिश्तेदारों ने कुछ भी जांचे-परखे बिना उसको मकान निर्माण के लिए नयागंज में जमीन दिला दी। जिसके बाद लगभग 20 साल से वह पैतृक गांव छोड़कर करारी में ही घर बनवाकर परिवार सहित रहने लगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि एजेंट अक्सर कई-कई महीनों के लिए गायब हो जाता था। वह कहां आता और कहां जाता था ? इसकी भनक किसी को नहीं लगती थी। करारी में रहने के दौरान रहन-सहन तो बहुत हाईप्रोफाइल नहीं रहता था।
पर, गतिविधियां सभी को खटकती रहती थीं। हालांकि, कभी किसी ने इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस से करना ठीक नहीं समझा। एजेंट का यहां पड़ोसियों से झगड़ा आदि भी नहीं हुआ। जिससे थाने की पुलिस उस तक पहुंचे। परिजनों के साथ रिश्तेदार भी सभी को इसी बात का भरोसा दिलाते थे कि वह बाहर नौकरी करता है। बड़ी बात यह है कि जनपद में सक्रिय खुफिया एजेंसियों को आतंकी संगठन के एजेंट के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। आंध्रा पुलिस ने करारी पुलिस को एजेंट की हकीकत बताई तो कोतवाल केपी सिंह सहित सीओ, एसपी के भी कान खड़े हो गए। अब खुफिया एजेंसियां जांच कराने का बेतुका जवाब दे रही हैं। अभी तक सब कहां सो रहे थे। इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।
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आईएसआई एजेंट इंतजार सैयद उर्फ इंतजार मेंहदी मूलत: कौशाम्बी जिले के सरायअकिल थाना स्थित अतरसुइया गांव का रहने वाला है। जनपद के अतिसंवेदनशील करारी कस्बे में उसकी ससुराल है और यहीं बहन भी ब्याही है। इन्हीं रिश्तेदारियों की वजह से उसको करारी में शरण मिली। रिश्तेदारों ने कुछ भी जांचे-परखे बिना उसको मकान निर्माण के लिए नयागंज में जमीन दिला दी। जिसके बाद लगभग 20 साल से वह पैतृक गांव छोड़कर करारी में ही घर बनवाकर परिवार सहित रहने लगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि एजेंट अक्सर कई-कई महीनों के लिए गायब हो जाता था। वह कहां आता और कहां जाता था ? इसकी भनक किसी को नहीं लगती थी। करारी में रहने के दौरान रहन-सहन तो बहुत हाईप्रोफाइल नहीं रहता था।
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पर, गतिविधियां सभी को खटकती रहती थीं। हालांकि, कभी किसी ने इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस से करना ठीक नहीं समझा। एजेंट का यहां पड़ोसियों से झगड़ा आदि भी नहीं हुआ। जिससे थाने की पुलिस उस तक पहुंचे। परिजनों के साथ रिश्तेदार भी सभी को इसी बात का भरोसा दिलाते थे कि वह बाहर नौकरी करता है। बड़ी बात यह है कि जनपद में सक्रिय खुफिया एजेंसियों को आतंकी संगठन के एजेंट के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। आंध्रा पुलिस ने करारी पुलिस को एजेंट की हकीकत बताई तो कोतवाल केपी सिंह सहित सीओ, एसपी के भी कान खड़े हो गए। अब खुफिया एजेंसियां जांच कराने का बेतुका जवाब दे रही हैं। अभी तक सब कहां सो रहे थे। इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।
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