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Kaushambi News: डीएम व सीडीओ के अनुमोदन के बिना हो गया 1.18 करोड़ का भुगतान
Sat, 07 Jun 2025 12:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 07 Jun 2025 12:10 AM IST
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मंझनपुर। इंदिरा आवास योजना में सक्षम अधिकारी से अनुमोदन कराए बिना ही पीडी और तत्कालीन पटल सहायक ने 1.18 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। बैंक से लोगों के खाते में धनराशि भी पहुंच गई। यह धनराशि किस खाते में पहुंची, इसका रिकाॅर्ड तो विभाग के पास है। लेकिन, यह भुगतान किसके निर्देश पर हुआ, इसका कोई रिकाॅर्ड नहीं है। करीब 10 साल बाद इस प्रकरण में आरटीआई से जानकारी मांगी गई तो विभाग में खलबली मच गई। अब दो साल पहले सेवानिवृत्त हो चुके पटल सहायक से जवाब मांगा जा रहा है। इस प्रकरण में राज्य सूचना आयोग ने भी सख्ती की है।
गरीबों को पक्की छत मुहैया कराने के लिए वर्ष 2014 तक इंदिरा आवास योजना का संचालन हो रहा था। अचानक सरकार ने योजना बंद कर दी। योजना के तहत जिले भर में करीब 168 लाभार्थी ऐसे थे, जिन्हें पहली किश्त के रूप में 35 हजार रुपये मिल चुके थे। दूसरी किश्त के 35 हजार मिलना शेष है।
आरोप है कि तत्कालीन पीडी व पटल सहायक ने मिलकर बिना किसी सक्षम अधिकारी के निर्देश व अनुमोदन के मनमाने तरीके से भुगतान कर दिया। जबकि, इस भुगतान के लिए न तो ब्लॉकों से कोई मांग की गई और न ही किसी सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई।
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प्रकरण के 10 साल बाद अब भरसवां निवासी आशीष कुमार पप्पू मिश्रा ने आरटीआई से जवाब मांगा। जानकारी नहीं मिलने पर उन्होंने राज्य सूचना आयोग में अपील की। अब वहां से जानकारी देने का निर्देश हुआ तो विभाग हरकत में आया।
पत्रावली की खोज की गई तो कार्यालय में कोई रिकाॅर्ड नहीं मिला। तत्कालीन लिपिक इन दिनों सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनका दावा है कि उन्होंने चार्ज दे दिया। इनके बाद आए लिपिक भी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने चार्ज नहीं मिलने का दावा किया है।
सात जुलाई को होगी सुनवाई
दस्तावेज नहीं देने का प्रकरण राज्य सूचना आयोग में विचाराधीन है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई सात जुलाई को होनी है। इससे पहले पीडी कार्यालय को जानकारी देना होगा। ऐसा नहीं होता तो राज्य सूचना आयोग अधिकारियों पर कार्रवाई कर सकता है।
निचले स्तर पर जानकारी नहीं दी गई है। इस पर राज्य सूचना आयोग ने जानकारी देने का निर्देश दिया है। पत्रावली की तलाश कराई जा रही है। पूर्व में क्या हुआ था, इसकी जानकारी नहीं है। - देवेंद्र ओझा, पीडी डीआरडीए
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गरीबों को पक्की छत मुहैया कराने के लिए वर्ष 2014 तक इंदिरा आवास योजना का संचालन हो रहा था। अचानक सरकार ने योजना बंद कर दी। योजना के तहत जिले भर में करीब 168 लाभार्थी ऐसे थे, जिन्हें पहली किश्त के रूप में 35 हजार रुपये मिल चुके थे। दूसरी किश्त के 35 हजार मिलना शेष है।
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आरोप है कि तत्कालीन पीडी व पटल सहायक ने मिलकर बिना किसी सक्षम अधिकारी के निर्देश व अनुमोदन के मनमाने तरीके से भुगतान कर दिया। जबकि, इस भुगतान के लिए न तो ब्लॉकों से कोई मांग की गई और न ही किसी सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई।
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प्रकरण के 10 साल बाद अब भरसवां निवासी आशीष कुमार पप्पू मिश्रा ने आरटीआई से जवाब मांगा। जानकारी नहीं मिलने पर उन्होंने राज्य सूचना आयोग में अपील की। अब वहां से जानकारी देने का निर्देश हुआ तो विभाग हरकत में आया।
पत्रावली की खोज की गई तो कार्यालय में कोई रिकाॅर्ड नहीं मिला। तत्कालीन लिपिक इन दिनों सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनका दावा है कि उन्होंने चार्ज दे दिया। इनके बाद आए लिपिक भी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने चार्ज नहीं मिलने का दावा किया है।
सात जुलाई को होगी सुनवाई
दस्तावेज नहीं देने का प्रकरण राज्य सूचना आयोग में विचाराधीन है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई सात जुलाई को होनी है। इससे पहले पीडी कार्यालय को जानकारी देना होगा। ऐसा नहीं होता तो राज्य सूचना आयोग अधिकारियों पर कार्रवाई कर सकता है।
निचले स्तर पर जानकारी नहीं दी गई है। इस पर राज्य सूचना आयोग ने जानकारी देने का निर्देश दिया है। पत्रावली की तलाश कराई जा रही है। पूर्व में क्या हुआ था, इसकी जानकारी नहीं है। - देवेंद्र ओझा, पीडी डीआरडीए