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Kaushambi News: 40 वाली काॅपी 70 और 300 वाले जूते 600 में खरीद रहे अभिभावक

Fri, 12 Apr 2024 02:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Fri, 12 Apr 2024 02:41 AM IST
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Parents are buying copies worth Rs 40 for Rs 70 and shoes worth Rs 300 for Rs 600
नंदलाल।
निजी स्कूलों की अघोषित लूट से अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है। स्कूल के चहेते दुकानदारों के पास से ही कॉपी-किताब और ड्रेस मिल रही है। इन चिह्नित दुकानों से लोग 40 रुपये वाली कॉपी 70 और 300 रुपये वाले जूते 600 में खरीदने को मजबूर हैं। मध्यम वर्गीय लोग स्कूलों की तरफ से डाले जा रहे इस आर्थिक बोझ से परेशान हैं।
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नए सत्र में विद्यालय खुलने के साथ ही बच्चों के प्रवेश प्रारंभ हो गए हैं। सत्र खुलने के साथ ही अभिभावकों पर जबरन महंगाई की मार पड़ने लगी है। नामचीन स्कूलों की फीस, यूनिफॉर्म और कॉपी-किताब आदि का खर्चा मिलाकर एक बच्चे पर औसतन 20 हजार रुपये का बोझ पड़ रहा है। अतिरिक्त खर्च की वजह से घर का बजट बिगड़ रहा है।
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पब्लिक हों या कॉन्वेंट स्कूल सभी की किताबें अधिकतम खुदरा मूल्य पर अभिभावकों को दी जा रही हैं। बाजार में 40 रुपये प्रिंट वाली कॉपी 10 प्रतिशत डिस्काउंट पर मिलती है। 36 रुपये की इस कॉपी के लिए पुस्तक विक्रेता 70 रुपये वसूल रहे हैं। फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी की प्रैक्टिकल कॉपी 100 रुपये में दी जा रही है। जबकि,बाजार में इनकी वास्तविक कीमत 60 रुपये है।
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निजी स्कूलों द्वारा अधिकृत विक्रेता के पास ही सामान मिलने से अभिभावकों को 15-20 प्रतिशत तक मिलने वाली छूट भी नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में उन्हें अधिकतम खुदरा मूल्य पर ही खरीदारी करनी पड़ रही है।






बिसारा निवासी रमेश का बेटा सूरज एक पब्लिक स्कूल में चौथी और बेटी अनुष्का 9 वीं कक्षा की छात्र हैं। स्कूल की फीस,कॉपी-किताब, बोतल, बैग और यूनिफॉर्म को मिलाकर करीब 15 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। इतना ही खर्च उनकी बहन अनुष्का पर हो रहा है। इस तरह से परिवार पर 30 हजार रुपये का बोझ पड़ रहा है।







भरवारी के सुशील के बच्चे प्रतिष्ठित स्कूल के छात्र- छात्रा हैं। कक्षा सात में पहुंची बेटी की किताबों का सेट पांच हजार रुपये का है। स्कूल की फीस, यूनीफॉर्म आदि का खर्च मिलाकर करीब 18 हजार रुपये का हिसाब बैठ रहा है। दोनों बच्चों की फीस आदि मिलाकर करीब 35 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। पहली बार प्रवेश कराने पर दो से पांच हजार रुपये तक एडमिशन फीस देनी पड़ रही है।





क्या कहते हैं अभिभावक...

पब्लिक स्कूल की ओर से अधिकृत विक्रेता से कॉपी किताब का सेट खरीदने को कहा जा रहा है। जहां हर चीज के लगभग दोगुने दाम देने होते हैं। जबकि, स्कूल का दबाव न हो तो यही सेट दुकानदार आराम से आधे दामों पर दे देते हैं। किसी को अभिभावकों की चिंता नहीं है। - सत्यम


स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें चलानी चाहिए। किताबें भी आम आदमी के बजट में आ जाएंगी। जब सारी प्रतियोगी परीक्षाओं में एनसीईआरटी की किताबों से सवाल आते हैं तो फिर ये स्कूल वाले आखिर कौन सा रॉकेट साइंस निजी प्रकाशकों की किताबों से पढ़ा रहे हैं। - नंद लाल


किसी भी निजी विद्यालय को मनमानी करने की छूट नहीं दी जाएगी। शासकीय निर्देशानुसार स्कूल परिसर अथवा अधिकृत दुकानों से किताब-काॅपी खरीदने की बाध्यता की जांच कर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए जल्द ही बीएसए के साथ संयुक्त टीम बनाकर छापामार कार्रवाई की जाएगी। --डॉ. एसएन यादव, डीआईओएस

नंदलाल।

नंदलाल।

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