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दो हजार दो, ओवरलोड चलो
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 20 May 2016 12:39 AM IST
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दोआबा में परिवहन विभाग ट्रकों को सड़क पर चलने देने के लिए वसूली करता है। परिवहन विभाग का फंडा है दो हजार दो और ओवर लोड चलो। यहां वाहनों की इंट्री के नाम पर प्रतिमाह करोड़ों की कमाई की जा रही है। विभाग में सक्रिय दलालों के जरिए प्रतिमाह इंट्री का कोड जारी कर कमाई की जा रही है। मामले की शिकायत शासन स्तर पर हुई तो डीएम और एसपी से वाहनों को जारी किए जाने वाले गुप्त कोड और वसूली की रिपोर्ट तलब की गई है। यह जानकारी एआरटीओ प्रवर्तन को हुई तो हड़कंप मच गया है।
दोआबा में बालू, गिट्टी, मोरंग के अलावा अन्य कारोबार में लगे ट्रकों और डंपरों को सड़क पर चलने के लिए इंट्री जारी की जाती है। इंट्री का यह कारोबार एआरटीओ कार्यालय में सक्रिय दलालों के माध्यम से संचालित हो रहा है। यह दलाल वाहन मालिक से तय रकम लेकर इंट्री के नाम पर गुप्त कोड जारी करा देते हैं। गुप्त कोड जारी होने के बाद संबंधित वाहन पूरे माह भर परिवहन के नियमों को ताक पर रखकर ओवर लोड चलता है। जो इंट्री नहीं लेते हैं वे वाहन विभाग के निशाने पर रहते हैं।
इंट्री के नाम पर वसूली का यह कारोबार दोआबा के परिवहन कार्यालय में अर्से से बेखौफ संचालित हो रहा है। मामले की शिकायत मोटर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष बीएन गुप्ता ने प्रमुख सचिव परिवहन से की है। प्रमुख सचिव परिवहन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिले के डीएम और एसपी से इंट्री के नाम पर की जा रही वसूली की जांच रिपोर्ट तलब की है। इसकी भनक एआरटीओ प्रवर्तन को हुई तो महकमे में हड़कंप मच गया है।
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दोआबा में भार ढोने वाले वाहनों की इंट्री का अलग-अलग रेट है। सूत्रों की माने तो 10 और 12 चक्का ट्रकों से 17 सौ रुपये तो ट्रेलर से दो हजार रुपये प्रतिमाह इंट्री के नाम पर वसूल कर उन्हें कोड जारी कर दिया जाता है। कोड मिलने के बाद फिर यह वाहन चाहे जितना लोड लेकर सड़कों की सेहत बिगाड़ने का काम करें कोई भी इनसे बोलने वाला नहीं होता।
ओवर लोड चलने का अवैध परमिट ट्रकों और ट्रेलरों को परिवहन विभाग देता है लेकिन इसका फायदा इलाकाई पुलिस भी बखूबी उठाती है। रात में जब ओवरलोड वाहन दोआबा की सीमा में प्रवेश करते हैं तो प्रत्येक पिकेट पर पुलिस के जवान इन वाहनों से 50 रुपये से लेकर दो सौ रुपये वसूल करते हैं। यह अदायगी ट्रक चालक को जिले में तब तक करनी पड़ती रहती है जब तक वह सीमा से बाहर नहीं हो जाता या फिर उसका माल उतर नहीं जाता।
पत्र प्राप्त हुआ है। जरूरी काम से बाहर आया हूं। वापस लौटते ही पत्र को संज्ञान में लेते हुए मामले की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट में जो कुछ मिलेगा उसे प्रमुख सचिव परिवहन को भेज दिया जाएगा।
अखंड प्रताप सिंह, डीएम
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दोआबा में बालू, गिट्टी, मोरंग के अलावा अन्य कारोबार में लगे ट्रकों और डंपरों को सड़क पर चलने के लिए इंट्री जारी की जाती है। इंट्री का यह कारोबार एआरटीओ कार्यालय में सक्रिय दलालों के माध्यम से संचालित हो रहा है। यह दलाल वाहन मालिक से तय रकम लेकर इंट्री के नाम पर गुप्त कोड जारी करा देते हैं। गुप्त कोड जारी होने के बाद संबंधित वाहन पूरे माह भर परिवहन के नियमों को ताक पर रखकर ओवर लोड चलता है। जो इंट्री नहीं लेते हैं वे वाहन विभाग के निशाने पर रहते हैं।
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इंट्री के नाम पर वसूली का यह कारोबार दोआबा के परिवहन कार्यालय में अर्से से बेखौफ संचालित हो रहा है। मामले की शिकायत मोटर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष बीएन गुप्ता ने प्रमुख सचिव परिवहन से की है। प्रमुख सचिव परिवहन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिले के डीएम और एसपी से इंट्री के नाम पर की जा रही वसूली की जांच रिपोर्ट तलब की है। इसकी भनक एआरटीओ प्रवर्तन को हुई तो महकमे में हड़कंप मच गया है।
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दोआबा में भार ढोने वाले वाहनों की इंट्री का अलग-अलग रेट है। सूत्रों की माने तो 10 और 12 चक्का ट्रकों से 17 सौ रुपये तो ट्रेलर से दो हजार रुपये प्रतिमाह इंट्री के नाम पर वसूल कर उन्हें कोड जारी कर दिया जाता है। कोड मिलने के बाद फिर यह वाहन चाहे जितना लोड लेकर सड़कों की सेहत बिगाड़ने का काम करें कोई भी इनसे बोलने वाला नहीं होता।
ओवर लोड चलने का अवैध परमिट ट्रकों और ट्रेलरों को परिवहन विभाग देता है लेकिन इसका फायदा इलाकाई पुलिस भी बखूबी उठाती है। रात में जब ओवरलोड वाहन दोआबा की सीमा में प्रवेश करते हैं तो प्रत्येक पिकेट पर पुलिस के जवान इन वाहनों से 50 रुपये से लेकर दो सौ रुपये वसूल करते हैं। यह अदायगी ट्रक चालक को जिले में तब तक करनी पड़ती रहती है जब तक वह सीमा से बाहर नहीं हो जाता या फिर उसका माल उतर नहीं जाता।
पत्र प्राप्त हुआ है। जरूरी काम से बाहर आया हूं। वापस लौटते ही पत्र को संज्ञान में लेते हुए मामले की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट में जो कुछ मिलेगा उसे प्रमुख सचिव परिवहन को भेज दिया जाएगा।
अखंड प्रताप सिंह, डीएम