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घोटाले में फंसे ओसा गांव के प्रधान, वीडीओ
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Sat, 31 Jan 2015 11:53 PM IST
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मंझनपुर। विकास कार्यों में घपला करना ओसा गांव के प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी को मंहगा पड़ा है। शनिवार को जिला पंचायराज अधिकारी आरके भारती की प्रारंभिक जांच में घोटाले की पुष्टि हुई है। ग्राम विकास अधिकारी विश्वरूप झा को सस्पेंड कर दिया है। वहीं विकास कार्यों की जांच के लिए अफसरों की तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। डीपीआरओ ने बताया कि तीन सदस्यीय टीम की जांच रिपोर्ट के बाद घोटाले की रकम की रिकबरी के साथ ही प्रधान और वीडीओ के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
मंझनपुर ब्लाक के ओसा गांव में विकास कार्यों में घपले की शिकायत डीएम और डीपीआरओ से की गई थी। डीएम के निर्देश पर जिला पंचायतराज अधिकारी आरके भारती ने शनिवार को विकास कार्यों की जांच की। डीपीआरओ ने बताया कि ओसा गांव में राज्यवित्त एवं तेरहवें वित्त योजना के तहत विकास कार्य कराने के लिए 33 लाख रूपये अवमुक्त किए गए थे। पर, गांव के स्थलीय मुआयने में 10 लाख रूपये के भी विकास कार्य नहीं मिले हैं।
वहीं प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी विकास कार्यों से संबंधित कोई भी अभिलेख मांगने पर भी नहीं दिखा सके। डीपीआरओ ने बताया कि प्रारंभिक जांच में प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी विकास कार्य में घपलेबाजी के दोषी पाए गए हैं। इस मामले ें डीपीआरओ ने ग्राम विकास अधिकारी को सस्पेंड कर दिया है। वहीं विकास कार्यो की जांच के लिए जिलास्तरीय तीन अफसरों की टीम गठित की गई है। डीपीआरओ ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रधान के खिलाफ पंचायतीराज अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही डकारी गई रकम की भी रिकवरी होगी।
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मंझनपुर ब्लाक के ओसा गांव में विकास कार्यों में घपले की शिकायत डीएम और डीपीआरओ से की गई थी। डीएम के निर्देश पर जिला पंचायतराज अधिकारी आरके भारती ने शनिवार को विकास कार्यों की जांच की। डीपीआरओ ने बताया कि ओसा गांव में राज्यवित्त एवं तेरहवें वित्त योजना के तहत विकास कार्य कराने के लिए 33 लाख रूपये अवमुक्त किए गए थे। पर, गांव के स्थलीय मुआयने में 10 लाख रूपये के भी विकास कार्य नहीं मिले हैं।
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वहीं प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी विकास कार्यों से संबंधित कोई भी अभिलेख मांगने पर भी नहीं दिखा सके। डीपीआरओ ने बताया कि प्रारंभिक जांच में प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी विकास कार्य में घपलेबाजी के दोषी पाए गए हैं। इस मामले ें डीपीआरओ ने ग्राम विकास अधिकारी को सस्पेंड कर दिया है। वहीं विकास कार्यो की जांच के लिए जिलास्तरीय तीन अफसरों की टीम गठित की गई है। डीपीआरओ ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रधान के खिलाफ पंचायतीराज अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही डकारी गई रकम की भी रिकवरी होगी।
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