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Kaushambi News: टीबी के मरीजों को गोद लेने के बाद भूले अफसर और नेता
Sat, 25 Mar 2023 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 25 Mar 2023 12:49 AM IST
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मंझनपुर। टीबी की वजह से छलनी हो रहे फेफड़े व जर्जर काया वाले मरीजों के खानपान की उचित देखभाल के लिए जिले के अफसर और माननीय उन्हें गोद लेने के बाद भूल गए। सिर्फ सांसद विनोद सोनकर और डीएम सुजीत कुमार की तरफ से ही गोद लिए गए मरीजों को बोर्नवीटा, चना आदि पहुंचाया गयाए लेकिन बाकी के अफसर इससे दूरी बनाए हुए हैं। नतीजतन मरीजों को सरकारी अस्पतालों से मुफ्त में दवा तो मिल रही है, लेकिन उनके खानपान की उचित व्यवस्था नहीं है।
सरकार वर्ष 2025 तक टीबी का उन्मूलन करना चाहती है। इसके लिए जांच का दायरा बढ़ाया गया है। जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी, राजकीय क्षय रोग क्लिनिक सहित 16 स्थानों पर टीबी के जांच की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सीएचओ के जरिये भी लक्षण वाले मरीजों को जांच कराने के लिए केंद्र भेजा जाता है।
निजी अस्पतालों में भी टीबी के इलाज कराने वाले लोगों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा टीबी के मरीजों की पहचान कर उनका बेहतर इलाज किया जाए। इसके अलावा चिन्हित टीबी के गरीब मरीजों को पोषण किट दिलाने के लिए माननीयों व अफसरों से उन्हें गोद लेने की अपील की गई है। क्षय रोग अस्पताल से जुड़े सूत्रों की मानें तो सांसद और डीएम के साथ ही सभी जिला स्तरीय अफसर व चिकित्सा प्रभारियों को 10-10 मरीज गोद लेने के लिए कहा गया था। सांसद व डीएम को छोड़कर किसी ने भी मरीजों को पोषण किट का वितरण नहीं किया। जबकि पोषण किट मरीजों को उनके इलाज होने तक मुहैया कराने के लिए कहा गया था।
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मुख्यालय से सटे बरइन का पुरवा गांव निवासी सुंदर लाल प्रजापति राजकीय क्षय रोग क्लीनिक में पंजीकृत हैं। उनका आयुष्मान कार्ड भी बना है। इन दिनों उन्हें दवा लेने प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल जाना पड़ता है। सुंदरलाल बताते हैं कि पता चला कि उन्हें खान अधिकारी ने पोषण किट देने के लिए गोद लिया है। लेकिन आज तक उन्हें कभी कोई पोषण किट नहीं दी गई।
कौशाम्बी विकास खंड के कोसम इनाम गांव निवासी शारदा प्रसाद का कहना है कि पोषण किट तो दूर, सरकारी अस्पताल से दवा भी नहीं मिलती। जब कभी दवा लेने जाते हैं तो आधी-अधूरी दी जाती है। मजबूरी में वह सरायअकिल के निजी अस्पताल से अपना इलाज करा रहे हैं।
कोसम गांव के पंछीलाल का कहना है कनैली सीएचसी में उन्होंने टीबी की जांच कराई। चिकित्सक ने बताया कि जो मशीन जांच के लिए लगाई गई है, उसमें सही एक्स-रे नहीं आया। मंझनपुर दूर है, इसलिए वह भी सरायअकिल के निजी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।
निजामपुर नौगीरा के मलखान का कहना है पिछले दिनों उसकी तबीयत होने पर इलाज के लिए वह जिला अस्पताल में भर्ती हुआ। खून की कमी के कारण चिकित्सक ने खून चढ़ाने के साथ ही टीबी की आशंका जाहिर की, लेकिन बलगम की जांच नहीं हो सकी। अब वह निजी अस्पताल से दवा ले रहा है।
सपा विधायकों ने नहीं दिखाई दिलचस्पी
मंझनपुर। राजकीय क्षय रोग क्लिनिक के रिकार्ड की मानें तो मंझनपुर, सिराथू और चायल से चुने गए सपा विधायकों ने टीबी के मरीजों को गोद लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। उनकी तरफ से किसी भी मरीज को पोषण किट नहीं बांटा गया।
टीबी के कारण मरीज को पोषण की कमी हो जाती है। इसके लिए एक प्रयास किया गया था कि अफसर, माननीय, स्वयंसेवी संस्था के लोग गरीब मरीजों को गोद लें। इसके लिए किसी तरह की बाध्यता नहीं थी।-डॉ. एसके झा, जिला क्षय रोग अधिकारी
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सरकार वर्ष 2025 तक टीबी का उन्मूलन करना चाहती है। इसके लिए जांच का दायरा बढ़ाया गया है। जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी, राजकीय क्षय रोग क्लिनिक सहित 16 स्थानों पर टीबी के जांच की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सीएचओ के जरिये भी लक्षण वाले मरीजों को जांच कराने के लिए केंद्र भेजा जाता है।
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निजी अस्पतालों में भी टीबी के इलाज कराने वाले लोगों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा टीबी के मरीजों की पहचान कर उनका बेहतर इलाज किया जाए। इसके अलावा चिन्हित टीबी के गरीब मरीजों को पोषण किट दिलाने के लिए माननीयों व अफसरों से उन्हें गोद लेने की अपील की गई है। क्षय रोग अस्पताल से जुड़े सूत्रों की मानें तो सांसद और डीएम के साथ ही सभी जिला स्तरीय अफसर व चिकित्सा प्रभारियों को 10-10 मरीज गोद लेने के लिए कहा गया था। सांसद व डीएम को छोड़कर किसी ने भी मरीजों को पोषण किट का वितरण नहीं किया। जबकि पोषण किट मरीजों को उनके इलाज होने तक मुहैया कराने के लिए कहा गया था।
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मुख्यालय से सटे बरइन का पुरवा गांव निवासी सुंदर लाल प्रजापति राजकीय क्षय रोग क्लीनिक में पंजीकृत हैं। उनका आयुष्मान कार्ड भी बना है। इन दिनों उन्हें दवा लेने प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल जाना पड़ता है। सुंदरलाल बताते हैं कि पता चला कि उन्हें खान अधिकारी ने पोषण किट देने के लिए गोद लिया है। लेकिन आज तक उन्हें कभी कोई पोषण किट नहीं दी गई।
कौशाम्बी विकास खंड के कोसम इनाम गांव निवासी शारदा प्रसाद का कहना है कि पोषण किट तो दूर, सरकारी अस्पताल से दवा भी नहीं मिलती। जब कभी दवा लेने जाते हैं तो आधी-अधूरी दी जाती है। मजबूरी में वह सरायअकिल के निजी अस्पताल से अपना इलाज करा रहे हैं।
कोसम गांव के पंछीलाल का कहना है कनैली सीएचसी में उन्होंने टीबी की जांच कराई। चिकित्सक ने बताया कि जो मशीन जांच के लिए लगाई गई है, उसमें सही एक्स-रे नहीं आया। मंझनपुर दूर है, इसलिए वह भी सरायअकिल के निजी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।
निजामपुर नौगीरा के मलखान का कहना है पिछले दिनों उसकी तबीयत होने पर इलाज के लिए वह जिला अस्पताल में भर्ती हुआ। खून की कमी के कारण चिकित्सक ने खून चढ़ाने के साथ ही टीबी की आशंका जाहिर की, लेकिन बलगम की जांच नहीं हो सकी। अब वह निजी अस्पताल से दवा ले रहा है।
सपा विधायकों ने नहीं दिखाई दिलचस्पी
मंझनपुर। राजकीय क्षय रोग क्लिनिक के रिकार्ड की मानें तो मंझनपुर, सिराथू और चायल से चुने गए सपा विधायकों ने टीबी के मरीजों को गोद लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। उनकी तरफ से किसी भी मरीज को पोषण किट नहीं बांटा गया।
टीबी के कारण मरीज को पोषण की कमी हो जाती है। इसके लिए एक प्रयास किया गया था कि अफसर, माननीय, स्वयंसेवी संस्था के लोग गरीब मरीजों को गोद लें। इसके लिए किसी तरह की बाध्यता नहीं थी।-डॉ. एसके झा, जिला क्षय रोग अधिकारी