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पइंसा में तैयार हो रही सैनिकों की नर्सरी
Sat, 02 Mar 2019 12:33 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Sat, 02 Mar 2019 12:33 AM IST
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- फोटो : SELF
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मंझनपुर। सिराथू तहसील के छोटे से गांव पइंसा में वतन के रखवालों की नर्सरी तैयार की जा रही है। यहां के 14 युवा फौज में नौकरी कर देश की सेवा कर रहे हैं और 19 लोग भर्ती होने के लिए रिटायर्ड फौजी अफरोज उद्दीन से टिप्स ले रहे हैं। उनके इस नेक काम में हाथ बटाते हैं बेटे जाफर अली। यह सारा प्रशिक्षण गांव के युवाओं को मुफ्त में दिया जा रहा है।
जिले के बार्डर में बसे पइंसा गांव निवासी अफरोज उद्दीन के वालिद मोइनउद्दीन किसानी के अलावा पहलवानी करते थे। मोइनउद्दीन की इच्छा थी कि उनका बेटा फौज में नौकरी करके देश की सेवा करे। अपने पिता की हसरतों पर खरा उतरते हुए अफरोज ने 16 मई 1979 को सेना में सिपाही पद से नौकरी ज्वाइन की। 1985 में उनकी तैनाती कश्मीर में थी। उस दौरान आतंकी हमले में तीन सैनिक मारे गए। यह सैनिक अफरोज उद्दीन के बटालियन के थे। बाद में सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए एक आतंकवादी को गिरफ्तार किया। सन 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान अफरोज उद्दीन की डयूटी माल सप्लाई में थी। सेना पुल को पार कर गई थी। उस दौरान जब यह लोग रसद व गोला-बारूद लेकर जा रहे थे। आतंकियों ने पुल पर विस्फोट किया, जिसमें छह सैनिक मारे गए। इसके बाद भी जवानों ने जान की परवाह किए बगैर राशन सेना तक पहुंचा दिया। अफरोज उद्दीन के मुताबिक वह राजपूताना रायफल के जवान थे। अफरोज इसके बाद रिटायर हो गए। बाद में उन्होंने अपने गांव व इलाके के लोगों को फौज में जाने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2000 में उन्होंने अपने बेटे शहनशाह को फौज में शामिल कराया। कंपनी हवलदार के पद पर नौकरी कर रहे शहनवाज को श्रीनगर में तैनाती दी गई है।
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जिले के बार्डर में बसे पइंसा गांव निवासी अफरोज उद्दीन के वालिद मोइनउद्दीन किसानी के अलावा पहलवानी करते थे। मोइनउद्दीन की इच्छा थी कि उनका बेटा फौज में नौकरी करके देश की सेवा करे। अपने पिता की हसरतों पर खरा उतरते हुए अफरोज ने 16 मई 1979 को सेना में सिपाही पद से नौकरी ज्वाइन की। 1985 में उनकी तैनाती कश्मीर में थी। उस दौरान आतंकी हमले में तीन सैनिक मारे गए। यह सैनिक अफरोज उद्दीन के बटालियन के थे। बाद में सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए एक आतंकवादी को गिरफ्तार किया। सन 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान अफरोज उद्दीन की डयूटी माल सप्लाई में थी। सेना पुल को पार कर गई थी। उस दौरान जब यह लोग रसद व गोला-बारूद लेकर जा रहे थे। आतंकियों ने पुल पर विस्फोट किया, जिसमें छह सैनिक मारे गए। इसके बाद भी जवानों ने जान की परवाह किए बगैर राशन सेना तक पहुंचा दिया। अफरोज उद्दीन के मुताबिक वह राजपूताना रायफल के जवान थे। अफरोज इसके बाद रिटायर हो गए। बाद में उन्होंने अपने गांव व इलाके के लोगों को फौज में जाने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2000 में उन्होंने अपने बेटे शहनशाह को फौज में शामिल कराया। कंपनी हवलदार के पद पर नौकरी कर रहे शहनवाज को श्रीनगर में तैनाती दी गई है।
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