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रोजी-रोटी के लिए जूझ रहे मनरेगा मजदूर
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Tue, 13 Dec 2016 12:43 AM IST
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मजदूरों के लिए वरदान बनी मनरेगा भी अब अभिशाप बनती दिख रही है। नोटबंदी से जहां मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है, वहीं दो करोड़ का भुगतान भी शासन से इन मजदूरों को नहीं मिल रहा है। दिहाड़ी न मिलने पर मजदूरों ने काम करने से इंकार कर दिया है। वह रोजगार की तलाश में गैर जनपदों और प्रांतों में पहुंचे तो वहां भी नोटबंदी के बाद रोजगार नहीं मिल सका। ऐसे में उन्हें घर लौटना पड़ रहा है। मनरेगा का भुगतान न होने और नोट बंदी के चलते मजदूरों का बुरा हाल है।
जिले में मनरेगा के कुल एक लाख 90 हजार जॉब कार्डधारक हैं। इन जॉब कार्डधारकों ने पिछले दिनों ग्राम सभाओं में मनरेगा से कराए गए कार्यों में मजदूरी की थी। छह माह से इन मजदूरों का दो करोड़ रुपया दिहाड़ी के रूप में शासन में अटका हुआ है। दीपावली के मौके पर शासन द्वारा पैसा भेजे जाने का आश्वासन दिया गया था पर धनराशि खाते में नहीं पहुंच सकी। इसे देखते हुए मजदूरों ने मनरेगा में काम करना बंद कर दिया। वह रोजगार की तलाश में गैर जनपदों और प्रांतों के लिए रवाना हुए। इसी बीच पांच सौ और एक हजार के पुराने नोटों पर पाबंदी लगा दी गई। इससे गैर जनपद और प्रांतों में पहुंचे मजदूरों पर रोजी का संकट खड़ा हो गया।
कल कारखानों में आर्थिक संकट के चलते हफ्ता न मिलने पर मजदूर भुखमरी की कगार पर पहुंच गए। मजबूर होकर उन्हें परदेश से भी घर लौटना पड़ रहा है। मनरेगा मजदूरी का भुगतान न होने और कंपनियों में नोटबंदी का असर होने के कारण मजदूरों की हालत दयनीय होती जा रही है। ऐसे में काम करने वाले लोगों को मजबूरन घर में बैठना पड़ रहा है। इससे उनके परिवार में निवाले का संकट खड़ा हो गया है। शासन और प्रशासन है कि मजदूरों के इस संकट के प्रति उनका ध्यान ही नहीं जा रहा है।
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चार माह से ठप है मनरेगा का काम
शासन द्वारा मनरेगा मजदूरों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। विकास खंड कौशाम्बी सहित कई ब्लॉकों की ग्राम सभाओं में काम करने वाले मजदूरों की दिहाड़ी पिछले पंचवर्षीय से लंबित है। मुख्यालयों में प्रदर्शन और बीडीओ स्तर पर मजदूरी की मांग करने के बाद हार मान चुके मजदूरों ने अब मनरेगा में काम करना ही बंद कर दिया है। विभागीय आंकड़ों पर जाएं तो जिले की एक भी ग्राम सभा में चार माह से मनरेगा में काम नहीं हो सका। इसकी प्रमुख वजह मजदूरों की दिहाड़ी का भुगतान न किया जाना बताया जा रहा है।
भुगतान को लेकर संजीदा नहीं अधिकारी
मनरेगा मजदूरों का शासन स्तर पर बकाया चल रहे दो करोड़ के भुगतान को लेकर जिले के अफसर संजीदा नहीं है। पूर्व में भुगतान को लेकर शासन को लिखापढ़ी की गई थी, लेकिन इधर बीच अधिकारी पूरी तरह से शांत हैं। सूत्रों का कहना है कि जिन मजदूरों का बकाया चल रहा हैं। इनमें तमाम जॉब कार्डधारक हैं, जिनकी मजदूरी वेबसाइट पर फीड ही नहीं कराई गई। ऐसे में इन मजदूरों का भुगतान तो किसी भी दशा में होने से रहा। कुछ भी हो यही हाल रहा तो मजदूरों को मनरेगा से मुंह मोड़ने में तनिक भी देर नहीं लगेगी।
मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी भुगतान के लिए शासन स्तर पर रिपोर्ट भेजी गई है। प्रयास किया जा रहा है कि मजदूरी का भुगतान जल्द हो जाए।
गजेंद्र कुमार तिवारी, डीसी मनरेगा
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जिले में मनरेगा के कुल एक लाख 90 हजार जॉब कार्डधारक हैं। इन जॉब कार्डधारकों ने पिछले दिनों ग्राम सभाओं में मनरेगा से कराए गए कार्यों में मजदूरी की थी। छह माह से इन मजदूरों का दो करोड़ रुपया दिहाड़ी के रूप में शासन में अटका हुआ है। दीपावली के मौके पर शासन द्वारा पैसा भेजे जाने का आश्वासन दिया गया था पर धनराशि खाते में नहीं पहुंच सकी। इसे देखते हुए मजदूरों ने मनरेगा में काम करना बंद कर दिया। वह रोजगार की तलाश में गैर जनपदों और प्रांतों के लिए रवाना हुए। इसी बीच पांच सौ और एक हजार के पुराने नोटों पर पाबंदी लगा दी गई। इससे गैर जनपद और प्रांतों में पहुंचे मजदूरों पर रोजी का संकट खड़ा हो गया।
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कल कारखानों में आर्थिक संकट के चलते हफ्ता न मिलने पर मजदूर भुखमरी की कगार पर पहुंच गए। मजबूर होकर उन्हें परदेश से भी घर लौटना पड़ रहा है। मनरेगा मजदूरी का भुगतान न होने और कंपनियों में नोटबंदी का असर होने के कारण मजदूरों की हालत दयनीय होती जा रही है। ऐसे में काम करने वाले लोगों को मजबूरन घर में बैठना पड़ रहा है। इससे उनके परिवार में निवाले का संकट खड़ा हो गया है। शासन और प्रशासन है कि मजदूरों के इस संकट के प्रति उनका ध्यान ही नहीं जा रहा है।
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चार माह से ठप है मनरेगा का काम
शासन द्वारा मनरेगा मजदूरों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। विकास खंड कौशाम्बी सहित कई ब्लॉकों की ग्राम सभाओं में काम करने वाले मजदूरों की दिहाड़ी पिछले पंचवर्षीय से लंबित है। मुख्यालयों में प्रदर्शन और बीडीओ स्तर पर मजदूरी की मांग करने के बाद हार मान चुके मजदूरों ने अब मनरेगा में काम करना ही बंद कर दिया है। विभागीय आंकड़ों पर जाएं तो जिले की एक भी ग्राम सभा में चार माह से मनरेगा में काम नहीं हो सका। इसकी प्रमुख वजह मजदूरों की दिहाड़ी का भुगतान न किया जाना बताया जा रहा है।
भुगतान को लेकर संजीदा नहीं अधिकारी
मनरेगा मजदूरों का शासन स्तर पर बकाया चल रहे दो करोड़ के भुगतान को लेकर जिले के अफसर संजीदा नहीं है। पूर्व में भुगतान को लेकर शासन को लिखापढ़ी की गई थी, लेकिन इधर बीच अधिकारी पूरी तरह से शांत हैं। सूत्रों का कहना है कि जिन मजदूरों का बकाया चल रहा हैं। इनमें तमाम जॉब कार्डधारक हैं, जिनकी मजदूरी वेबसाइट पर फीड ही नहीं कराई गई। ऐसे में इन मजदूरों का भुगतान तो किसी भी दशा में होने से रहा। कुछ भी हो यही हाल रहा तो मजदूरों को मनरेगा से मुंह मोड़ने में तनिक भी देर नहीं लगेगी।
मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी भुगतान के लिए शासन स्तर पर रिपोर्ट भेजी गई है। प्रयास किया जा रहा है कि मजदूरी का भुगतान जल्द हो जाए।
गजेंद्र कुमार तिवारी, डीसी मनरेगा