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मासूम अमन, रिषिकेश और नितिन को मिलेगी नई जिंदगी
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medical treatment
- फोटो : KAUSHAMBI
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मंझनपुर। सबकुछ ठीकठाक रहा तो दोआबा के मासूम अमन, रिषिकेश और नितिन को नई जिंदगी मिल जाएगी। तीनों मासूम जन्मजात बीमारी सीएचडी (दिल में सुराग होना) से पीड़ित हैं। इनका ऑपरेशन कानपुर के एलपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी में कराया जाएगा। आरबीएसके टीम प्रभारी डॉ अरुण केसरवानी शुक्रवार को इन्हें कानपुर ले जाएंगे।
जीरो से 9 साल तक बच्चों के नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं इलाज के लिए केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत 38 तरह की बीमारियों के मुफ्त इलाज की व्यवस्था है। योजना के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मंझनपुर की आरबीएसके टीम-बी ने इधर दो महीने के भीतर पिपरकुंडी निवासी अमन (04) पुत्र बुधराम रैदास, टेनशाह आलमाबाद का मजरा गंगा पारी का पूरा निवासी नितिन (12) पुत्र विनोद कुमार तथा दियापुर निवासी रिषिकेश (10 माह) पुत्र कमलेश कुमार समेत तीन ऐसे बच्चों को खोजा जो गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। टीम प्रभारी डॉ अरुण केसरवानी ने बताया कि तीनों बच्चे जन्मजात बीमारी सीएचडी (दिल में सुराग होना) से पीड़ित हैं।
इस बीमारी के इलाज पर कम से कम डेढ़-दो लाख रुपये का खर्च आता है। ऐसे में मेहनत मजदूरी कर परिवार का गुजारा करने वाले इनके माता-पिता आर्थिक दिक्कतों के कारण इलाज करा पाना संभव नहीं था। डॉ अरुण ने अपने नोडल अधिकारी डॉ सुनील सिंह को इस समस्या से अवगत कराया तो उन्होंने सीएमओ डॉ पीएन चतुर्वेदी को रिपोर्ट दी। इस पर सीएमओ ने योजना के तहत मुफ्त इलाज कराने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने कानपुर के एलपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी से संपर्क कर सर्जरी के लिए समय लिया। शुक्रवार को तीनों बच्चों को आरबीएसके टीम कानपुर लेकर जाएगी।
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एआरएम से भी पीड़ित है रिषिकेश
मंझनपुर। मासूम रिषकेश सीएचडी (दिल में सुराग) के साथ एक और भी गंभीर बीमारी से पीड़ित है। उसे एनोरेक्टल मलफार्मेंशन (गुदा द्वार का पूर्ण रुप से विकसित न होना) की भी समस्या है। रिषिकेश का इलाज प्रयागराज के चिल्ड्रिेन हॉस्पिटल से कराया जा चुका है।
कुपोषित अमन को एनआरसी में किया जा चुका है भर्ती
मंझनपुर। सीएचडी (दिल में सुराग) पीड़ित अमन कुपोषित है। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद आरबीएसके टीम ने उसे एनआरसी रेफर कर दिया था। जिला अस्पताल के एनआरसी में उसे 14 दिन तक भर्ती कर इलाज भी किया जा चुका है।
पीड़ित बच्चों के परिवार का नहीं बना गोल्डेन कार्ड
मंझनपुर। गरीबों को पांच लाख तक की मुफ्त चिकित्सा सेवा मुहैया कराने के लिए संचालित प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत जारी होने वाला गोल्डेन कार्ड नहीं बना है। योजना की पहली सूची में इनका नाम तक नहीं है। जबकि ये परिवार बड़ी मुश्किल से दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पा रहे हैं।
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जीरो से 9 साल तक बच्चों के नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं इलाज के लिए केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत 38 तरह की बीमारियों के मुफ्त इलाज की व्यवस्था है। योजना के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मंझनपुर की आरबीएसके टीम-बी ने इधर दो महीने के भीतर पिपरकुंडी निवासी अमन (04) पुत्र बुधराम रैदास, टेनशाह आलमाबाद का मजरा गंगा पारी का पूरा निवासी नितिन (12) पुत्र विनोद कुमार तथा दियापुर निवासी रिषिकेश (10 माह) पुत्र कमलेश कुमार समेत तीन ऐसे बच्चों को खोजा जो गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। टीम प्रभारी डॉ अरुण केसरवानी ने बताया कि तीनों बच्चे जन्मजात बीमारी सीएचडी (दिल में सुराग होना) से पीड़ित हैं।
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इस बीमारी के इलाज पर कम से कम डेढ़-दो लाख रुपये का खर्च आता है। ऐसे में मेहनत मजदूरी कर परिवार का गुजारा करने वाले इनके माता-पिता आर्थिक दिक्कतों के कारण इलाज करा पाना संभव नहीं था। डॉ अरुण ने अपने नोडल अधिकारी डॉ सुनील सिंह को इस समस्या से अवगत कराया तो उन्होंने सीएमओ डॉ पीएन चतुर्वेदी को रिपोर्ट दी। इस पर सीएमओ ने योजना के तहत मुफ्त इलाज कराने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने कानपुर के एलपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी से संपर्क कर सर्जरी के लिए समय लिया। शुक्रवार को तीनों बच्चों को आरबीएसके टीम कानपुर लेकर जाएगी।
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एआरएम से भी पीड़ित है रिषिकेश
मंझनपुर। मासूम रिषकेश सीएचडी (दिल में सुराग) के साथ एक और भी गंभीर बीमारी से पीड़ित है। उसे एनोरेक्टल मलफार्मेंशन (गुदा द्वार का पूर्ण रुप से विकसित न होना) की भी समस्या है। रिषिकेश का इलाज प्रयागराज के चिल्ड्रिेन हॉस्पिटल से कराया जा चुका है।
कुपोषित अमन को एनआरसी में किया जा चुका है भर्ती
मंझनपुर। सीएचडी (दिल में सुराग) पीड़ित अमन कुपोषित है। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद आरबीएसके टीम ने उसे एनआरसी रेफर कर दिया था। जिला अस्पताल के एनआरसी में उसे 14 दिन तक भर्ती कर इलाज भी किया जा चुका है।
पीड़ित बच्चों के परिवार का नहीं बना गोल्डेन कार्ड
मंझनपुर। गरीबों को पांच लाख तक की मुफ्त चिकित्सा सेवा मुहैया कराने के लिए संचालित प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत जारी होने वाला गोल्डेन कार्ड नहीं बना है। योजना की पहली सूची में इनका नाम तक नहीं है। जबकि ये परिवार बड़ी मुश्किल से दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पा रहे हैं।