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Kaushambi News: जिम्मेदारी निभाने में गंवा दी जान, जिम्मेदारों ने नहीं दिया ध्यान

Tue, 08 Aug 2023 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Tue, 08 Aug 2023 12:51 AM IST
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Lost his life in fulfilling the responsibility, the responsible did not pay attention
मंझनपुर।
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बिजली विभाग में काम करने वाले संविदा कर्मियों की जान हर वक्त खतरे में रहती है। बावजूद इसके यह जिम्मेदारी निभाने में पीछे नहीं हटते, लेकिन जब बात इनके हक और अधिकार की आती है तो जिम्मेदार ध्यान नहीं देते। बीते सात वर्षों में आठ संविदा कर्मियों की कहीं न कहीं लाइन दुरुस्त करते हुए जान चली गई, लेकिन जो लाभ इन्हें मिलने चाहिए, वह अब तक नहीं मिले।


जिले के दो वितरण खंडों मंझनपुर और चायल में 36 बिजली उपकेंद्र हैं। इनमें बिजली आपूर्ति व्यवस्था को चलाने के लिए महकमे ने ऑउट सोर्सिंग से दोनों डिवीजनों में करीब 700 कर्मचारी रखे हुए हैं, जिनमें से 250 कर्मचारी कुशल हैं, जो लाइन दुरुस्त करने का काम करते हैं। अक्सर काम करते वक्त ये हादसे का शिकार हो जाते हैं।
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वर्ष 2017-18 से लेकर अब तक मंझनपुर डिवीजन में ही चार संविदाकर्मी अपनी जान गंवा चुके हैं। चायल खंड में भी इतने ही कर्मचारियों की मौत हुई। हादसे के बाद इन्हें केवल विभाग की ओर से तत्कालिक मदद और काफी भागदौड़ के बाद आश्रित को पेंशन ही मिली, अन्य कई लाभ अब तक नहीं मिले। परिजन दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। एक घायल कर्मचारी को तो स्वस्थ होने के बाद काम भी नहीं मिल रहा है।
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हादसे के बाद मिलने चाहिए यह लाभ

-हादसे के बाद तत्काल पांच लाख रुपये की मदद



-कर्मचारी के ईपीएफ से आश्रितों को पेंशन

-संबंधित एजेंसी द्वारा कराए गए बीमे का क्लेम



-उत्तर प्रदेश कर्मकार बोर्ड की ओर से 5.25 लाख की मदद



केस-एक

दो साल पहले शंकरलाल ने गंवाई थी जान

अंदावा उपकेंद्र के संविदाकर्मी अहिरारा निवासी शंकरलाल की जून-2020 में लाइन दुुरुस्त करते समय मौत हो गई थी। उनके ससुर अर्जुन ने बताया कि हादसे के बाद बेटी शशि और उसकी दोनों बेटियां उन्हीं के पास रहती हैं। पांच लाख की तत्कालिक मदद मिली है। बेटी को पेंशन मिलने लगी, लेकिन अन्य लाभ नहीं दिए गए।



केस-दो



स्वस्थ होने के बाद अब नहीं मिल रहा काम



अटसराय निवासी सुकरू ने बताया कि बिजली की लाइन पर काम करते समय 15 दिसंबर को घायल हो गया था। इसमें कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। हां, शुरूआत के कुछ महीने वेतन के रुपये आते थे। तीन महीने से वह भी बंद हो गया। काफी दिन तक इलाज चला। स्वस्थ होने के बाद जब वापस आया तो काम भी नहीं मिल रहा है। दो महीने से दौड़ रहा हूं।



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केस तीन



बड़ी मुश्किल से चल रहा है घर



विद्युत उपकेंद्र अजुहा में कानेमई के लाल सिंह संविदाकर्मी थे। 30 जून 2020 को लाइन ठीक करते समय करंट लगने से उनकी मौत हो गई। इसके बाद दो बेटों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी उनकी पत्नी गीता देवी पर आ गई। लाल सिंह के साले राजू ने बताया कि हादसे के बाद उनकी बहन को पांच लाख रुपये मिले थे। पेंशन मिलती है, जिससे घर बड़ी मुश्किल से चल रहा है। अन्य कोई लाभ नहीं दिया गया।



नहीं दिए जाते सुरक्षा के पर्याप्त उपकरण



मंझनपुर। उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष शिवमणि त्रिपाठी का कहना है कि संविदा कर्मचारियों को सेफ्टी बेल्ट, झूला बेल्ट, प्लास,ग्लव्स, अर्थिंग राड, सेफ्टी शू, हेलमेट और अर्थ टेस्ट मिलना चाहिए। विडंबना है कि यह सामग्री भी पर्याप्त नहीं मिलती। संवाद


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हादसों में 40 से ज्यादा सामान्य लोगों की भी मौत

मंझनपुर। जिले में कई उपकेंद्रों की लाइन 50 से 60 साल पुरानी हैं। जर्जर होने के कारण अब यह जानलेवा साबित हो रही हैं। बीते सात साल में संविदा कर्मियों के अलावा 36 लोगों की जान जा चुकी है। यह आंकड़े तो केवल मंझनपुर डिवीजन के हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि लगभग इतने ही लोग चायल डिवीजन में भी हादसे का शिकार हुए। इन सभी को विभाग की ओर से पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जा चुकी है। संवाद




हादसों के बाद तत्कालिक लाभ विभाग की ओर से दिया जाता है, जो किसी भी हादसे में लंबित नहीं है। संविदा कर्मियों को अन्य लाभ दूसरे विभागों से मिलते हैं, इसलिए इसकी जानकारी नहीं है। कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण कंपनी से दिलवाए गए हैं। इनका प्रयोग करने के निर्देश भी दिए गए हैं।



एके लोहाट, एसई, विद्युत विभाग
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