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जिले में दम तोड़ रही लोक कला
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Wed, 31 Aug 2016 12:02 AM IST
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जिले में लोक कला दम तोड़ रही है। शासन की उपेक्षा से लोक कलाकार अपनी कला को संरक्षित नहीं कर पा रहे हैं। भारतीय लोक महासंघ की बैठक मंझनपुर ब्लॉक परिसर स्थित शिवमंदिर में हुई। बैठक में लोक कलाकारों ने विचार-विमर्श के बाद शासन से कला भवन बनवाए जाने की मांग की। इसके अलावा लोक कलाकारों की स्थिति में सुधार किए जाने पर बल दिया।
भारतीय लोक कला महासंघ की बैठक को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष अशोक रसिया ने कहा कि भारत की मूल गायन कला लोकगीत मानस पटल से ओझल होती जा रही है। संरक्षण के अभाव में कलाकार दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर है। भारत देश के पारंपरिक गीत बिरहा, लोकगीत, भजन, नौटंकी, पॅवारा, चनैनी, कीर्तन, नौ कजरी आदि संरक्षण के अभाव में विलुप्त हो गई है। कलाकारों ने आपसी विचार-विमर्श के बाद शासन से लोक कला भवन निर्माण की मांग की है।
भवन होने के बाद लोक कलाकार इसमें भारत की मूल गायन कला को संरक्षित करने का प्रयास करेंगे। बैठक में संगम लाल चौधरी, संतोष कुमार उर्फ गंगा मास्टर, शिव प्रकाश, रामसूरत, राम बहादुर आदि ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर लल्लू प्रसाद, कामता प्रसाद, इंद्रराज, रामकेशन, कुवेश सिंह, मक्खन लाल समेत दर्जनों लोक कलाकार मौजूद रहे। बैठक का संचालन देशराज पटारिया ने किया।
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भारतीय लोक कला महासंघ की बैठक को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष अशोक रसिया ने कहा कि भारत की मूल गायन कला लोकगीत मानस पटल से ओझल होती जा रही है। संरक्षण के अभाव में कलाकार दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर है। भारत देश के पारंपरिक गीत बिरहा, लोकगीत, भजन, नौटंकी, पॅवारा, चनैनी, कीर्तन, नौ कजरी आदि संरक्षण के अभाव में विलुप्त हो गई है। कलाकारों ने आपसी विचार-विमर्श के बाद शासन से लोक कला भवन निर्माण की मांग की है।
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भवन होने के बाद लोक कलाकार इसमें भारत की मूल गायन कला को संरक्षित करने का प्रयास करेंगे। बैठक में संगम लाल चौधरी, संतोष कुमार उर्फ गंगा मास्टर, शिव प्रकाश, रामसूरत, राम बहादुर आदि ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर लल्लू प्रसाद, कामता प्रसाद, इंद्रराज, रामकेशन, कुवेश सिंह, मक्खन लाल समेत दर्जनों लोक कलाकार मौजूद रहे। बैठक का संचालन देशराज पटारिया ने किया।
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