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Kaushambi News: नहीं बढ़ी किसान सम्मान निधि, किसान मायूस
Mon, 02 Feb 2026 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Mon, 02 Feb 2026 01:28 AM IST
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उधौसिंह, फोटो न 24735, चंदू तिवारी फोटो न 24727
केंद्रीय बजट से किसान निराश हैं। उन्हें पीएम किसान सम्मान निधि में बढ़ोतरी की उम्मीद थी लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। वहीं, छुट्टा मवेशियों से फसल बचाने के लिए बाड़ योजना, कृषि यंत्रों पर जीएसटी हटाने, उर्वरक और बीज की उपलब्धता, 33 प्रतिशत के कम नुकसान पर फसल बीमा की व्यवस्था करने की उम्मीद थी। लेकिन, किसानों को निराशा ही मिली।
चायल तहसील के पदुमनाथपुर सुरसेनी के किसान राधेमोहन मिश्रा ने कहा कि बजट में कृषि यंत्रों पर जीएसटी समाप्त करने की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने किसानों को कोई सहूलियत नहीं दी। खेती की लागत पहले से ही बढ़ी हुई है, यंत्र महंगे होने से छोटे किसान परेशान हैं।
गोविंदपुर गांव के मुन्ना सिंह ने उर्वरक की समस्या पर नाराजगी जताई। बताया कि समितियों में पूरे साल उर्वरक के लिए किसान परेशान रहते हैं। बजट में उर्वरक पर कोई विशेष प्रावधान नहीं दिखा, जबकि खाद-बीज की कमी से फसल प्रभावित होती है।
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तिलगोड़ी निवासी फूल सिंह ने फसल के उचित मूल्य न मिलने की शिकायत की। उन्होंने बताया कि एमएसपी से गेहूं के बाजार भाव अधिक है, लेकिन धान किसानों को 15-16 सौ रुपये प्रति क्विंटल पर बेचना पड़ रहा है। मंडी और मिलों की कमी से नुकसान हो रहा है।
बेसहारा और छुट्टा मवेशियों से गेंहू की फसल बर्बाद हो रही है। उम्मीद थी कि सरकार फसल सुरक्षा के लिए योजना लाएगी। लेकिन, बजट में कोई प्रावधान नहीं है।-- उधौसिंह, किसान
बजट में बड़े किसानों और फर्म मालिकों के लिए नारियल, चंदन, कोको, काजू, अखरोट जैसे उच्च मूल्य वाली फसलों के संवर्धन पर फोकस किया गया है। छोटे और सीमांत किसानों पर ध्यान नहीं दिया गया है। इस से धान और गेहूं उत्पादन करने वाले किसानों को मायूसी हाथ लगी है।
-- चंदू तिवारी, जिलाध्यक्ष भाकियू
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चायल तहसील के पदुमनाथपुर सुरसेनी के किसान राधेमोहन मिश्रा ने कहा कि बजट में कृषि यंत्रों पर जीएसटी समाप्त करने की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने किसानों को कोई सहूलियत नहीं दी। खेती की लागत पहले से ही बढ़ी हुई है, यंत्र महंगे होने से छोटे किसान परेशान हैं।
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गोविंदपुर गांव के मुन्ना सिंह ने उर्वरक की समस्या पर नाराजगी जताई। बताया कि समितियों में पूरे साल उर्वरक के लिए किसान परेशान रहते हैं। बजट में उर्वरक पर कोई विशेष प्रावधान नहीं दिखा, जबकि खाद-बीज की कमी से फसल प्रभावित होती है।
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तिलगोड़ी निवासी फूल सिंह ने फसल के उचित मूल्य न मिलने की शिकायत की। उन्होंने बताया कि एमएसपी से गेहूं के बाजार भाव अधिक है, लेकिन धान किसानों को 15-16 सौ रुपये प्रति क्विंटल पर बेचना पड़ रहा है। मंडी और मिलों की कमी से नुकसान हो रहा है।
बेसहारा और छुट्टा मवेशियों से गेंहू की फसल बर्बाद हो रही है। उम्मीद थी कि सरकार फसल सुरक्षा के लिए योजना लाएगी। लेकिन, बजट में कोई प्रावधान नहीं है।
बजट में बड़े किसानों और फर्म मालिकों के लिए नारियल, चंदन, कोको, काजू, अखरोट जैसे उच्च मूल्य वाली फसलों के संवर्धन पर फोकस किया गया है। छोटे और सीमांत किसानों पर ध्यान नहीं दिया गया है। इस से धान और गेहूं उत्पादन करने वाले किसानों को मायूसी हाथ लगी है।

उधौसिंह, फोटो न 24735, चंदू तिवारी फोटो न 24727