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डॉक्टर, अस्पताल सब बीमार
अमर उजाला ब्यूराे काैश्ााम्बी
Updated Fri, 12 Feb 2016 11:23 PM IST
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पश्चिमशरीरा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ ही वहां के डॉक्टर भी बीमार हैं। यहां तैनात इकलौते चिकित्सक तबीयत ठीक नहीं रहने के कारण महीने में एक-दो दिन नौकरी की खानापूर्ति करने आते हैं। ऐसे में पूरा हॉस्पिटल फार्मासिस्ट, नर्स और दाइयों के भरोसे चल रहा है। डॉक्टर और दवा नहीं मिलने के कारण मरीजों ने अस्पताल आना बंद कर दिया है। दिनभर में सर्दी-जुकाम के 5-6मरीज आते हैं। ऐसे में लाखों की लागत से बना अस्पताल बेकार साबित हो रहा है।
कौशाम्बी की प्रमुख बाजार पश्चिमशरीरा में वर्ष 2008 में लाखों रुपये की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यानि पीएचसी की स्थापना की गई थी। हॉस्पिटल के खुलने से पश्चिमशरीरा के अलावा पूरबशरीरा, चांदेराई, पुनवार, महावां, नगरेहा, अंधावां, रक्सौली, भगवतपुर, कटरी, डेढ़ावल, ढेरहा, टिकरा, गोराजू समेत करीब 20-22 गांव के लोगों को दवा, उपचार की सुविधा मिलने लगी। पर, स्वास्थ्य महकमे के अफसरों की अनदेखी से आज यह अस्पताल सिर्फ नाम का चिकित्सालय बचा है। हॉस्पिटल में तैनात चिकित्सक डॉ.जयकरन प्रसाद काफी दिनों से बीमार हैं। तबीयत खराब होने की वजह से वे महीने में एक-दो दिन ही हॉस्पिटल आते हैं। ऐसे में 20 गांवों के लोगों के इलाज आदि की सारी जिम्मेदारी फार्मासिस्ट और नर्सों के भरोसे है। वहीं अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने के साथ ही अव्यवस्थाएं भी बहुत हैं। सर्दी-जुकाम, बुखार के अलावा कोई दवा नहीं है। बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से हॉस्पिटल महरूम है। इसके कारण अब यहां धीरे-धीरे मरीजों का आना भी कम हो गया है। फार्मासिस्ट रामयश सिंह के मुताबिक दिनभर में 5-6 मरीज ही आते हैं।
लालटेन की रोशनी में होता है प्रसव
पश्चिमशरीरा (ब्यूरो)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पश्चिमशरीरा में सबसे बड़ी समस्या बिजली नहीं होने की है। फार्मासिस्ट रामयश ने बताया कि बिजली के लिए तार, खंभे लगे थे। करीब 4 साल पहले चोर तार काटकर उठा ले गए। इसकी तहरीर थाने में दी गई। बिजली विभाग और विभागीय अधिकारियों को भी सूचित किया गया। पर, अब तक तार खींचकर बिजली आपूर्ति नहीं दी गई। इसके कारण यहां बिजली नहीं है। सोलर लाइट के पैनल लगाए गए थे, वे भी खराब हो चुके हैं। ऐसे में शाम होते ही अस्पताल में घुप्प अंधेरा छा जाता है। बिजली नहीं होने से सबसे बड़ी दिक्कत रात में प्रसव कराने की होती है। खुद तीमारदारों को लालटेन, मोमबत्ती का इंतजाम करना होता है। इसी लालटेन की रोशनी से प्रसव कराने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है, जो किसी भी रोज घातक साबित हो सकती है।
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औसतन महीने में 80-100 प्रसव होते हैं
पश्चिमशरीरा (ब्यूरो)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भले ही असुविधाओं के कारण मरीजों का मोहभंग हो चुका है। पर, अस्पताल में प्रसव के लिए प्रसूताओं की भीड़ लगती है। अस्पताल के रिकार्ड के मुताबिक औसतन महीने में 80-100 प्रसव कराए जाते हैं। 20 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच ही 104 प्रसव हॉस्पिटल में कराए गए। लोगों का मानना है कि अस्पताल में दवा, डॉक्टर समेत और सुविधाएं मुहैया करा दी जाएं, तो करीब 20 गांव के लोगों को इलाज के लिए न भटकना पड़े।
दवा खिलाने को बस्ती से ले आते हैं पानी
पश्चिमशरीरा (ब्यूरो)। पीएसची सरायअकिल में बिजली के साथ पानी की भी किल्लत है। हैंडपंप से गंदा पानी निकलता है। इसके कारण यह पीने योग्य नहीं है। अस्पताल में तैनात दाई गीता देवी ने बताया कि बिजली नहीं होने से बरसों से टंकी खाली पड़ी है। ऐसे में मरीज के तीमारदार पीने का पानी खुद ही बोतल में भरकर ले आने को मजबूर हैं। वहीं प्रसव कराने के लिए वह भी अस्पताल से करीब 300 मीटर दूर स्थित बस्ती से डिब्बे में पानी भरकर ले आती है।
क्या कहते हैं मुख्य चिकित्सा अधिकारी
पीएचसी पश्चिमशरीरा में इतनी बदहाली संज्ञान में नहीं थी। यदि चिकित्सक बगैर छुट्टी के अस्पताल नहीं आते हैं, तो जांच कराकर वहां जल्द ही किसी दूसरे चिकित्सक की तैनाती की जाएगी। बिजली, पानी समेत अन्य दिक्कतों को भी दूर कराने के लिए संबंधित विभाग के अफसरों को पत्र लिखा जाएगा।
डॉ यूबी सिंह, सीएमओ कौशाम्बी
कौशाम्बी की प्रमुख बाजार पश्चिमशरीरा में वर्ष 2008 में लाखों रुपये की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यानि पीएचसी की स्थापना की गई थी। हॉस्पिटल के खुलने से पश्चिमशरीरा के अलावा पूरबशरीरा, चांदेराई, पुनवार, महावां, नगरेहा, अंधावां, रक्सौली, भगवतपुर, कटरी, डेढ़ावल, ढेरहा, टिकरा, गोराजू समेत करीब 20-22 गांव के लोगों को दवा, उपचार की सुविधा मिलने लगी। पर, स्वास्थ्य महकमे के अफसरों की अनदेखी से आज यह अस्पताल सिर्फ नाम का चिकित्सालय बचा है। हॉस्पिटल में तैनात चिकित्सक डॉ.जयकरन प्रसाद काफी दिनों से बीमार हैं। तबीयत खराब होने की वजह से वे महीने में एक-दो दिन ही हॉस्पिटल आते हैं। ऐसे में 20 गांवों के लोगों के इलाज आदि की सारी जिम्मेदारी फार्मासिस्ट और नर्सों के भरोसे है। वहीं अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने के साथ ही अव्यवस्थाएं भी बहुत हैं। सर्दी-जुकाम, बुखार के अलावा कोई दवा नहीं है। बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से हॉस्पिटल महरूम है। इसके कारण अब यहां धीरे-धीरे मरीजों का आना भी कम हो गया है। फार्मासिस्ट रामयश सिंह के मुताबिक दिनभर में 5-6 मरीज ही आते हैं।
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लालटेन की रोशनी में होता है प्रसव
पश्चिमशरीरा (ब्यूरो)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पश्चिमशरीरा में सबसे बड़ी समस्या बिजली नहीं होने की है। फार्मासिस्ट रामयश ने बताया कि बिजली के लिए तार, खंभे लगे थे। करीब 4 साल पहले चोर तार काटकर उठा ले गए। इसकी तहरीर थाने में दी गई। बिजली विभाग और विभागीय अधिकारियों को भी सूचित किया गया। पर, अब तक तार खींचकर बिजली आपूर्ति नहीं दी गई। इसके कारण यहां बिजली नहीं है। सोलर लाइट के पैनल लगाए गए थे, वे भी खराब हो चुके हैं। ऐसे में शाम होते ही अस्पताल में घुप्प अंधेरा छा जाता है। बिजली नहीं होने से सबसे बड़ी दिक्कत रात में प्रसव कराने की होती है। खुद तीमारदारों को लालटेन, मोमबत्ती का इंतजाम करना होता है। इसी लालटेन की रोशनी से प्रसव कराने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है, जो किसी भी रोज घातक साबित हो सकती है।
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औसतन महीने में 80-100 प्रसव होते हैं
पश्चिमशरीरा (ब्यूरो)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भले ही असुविधाओं के कारण मरीजों का मोहभंग हो चुका है। पर, अस्पताल में प्रसव के लिए प्रसूताओं की भीड़ लगती है। अस्पताल के रिकार्ड के मुताबिक औसतन महीने में 80-100 प्रसव कराए जाते हैं। 20 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच ही 104 प्रसव हॉस्पिटल में कराए गए। लोगों का मानना है कि अस्पताल में दवा, डॉक्टर समेत और सुविधाएं मुहैया करा दी जाएं, तो करीब 20 गांव के लोगों को इलाज के लिए न भटकना पड़े।
दवा खिलाने को बस्ती से ले आते हैं पानी
पश्चिमशरीरा (ब्यूरो)। पीएसची सरायअकिल में बिजली के साथ पानी की भी किल्लत है। हैंडपंप से गंदा पानी निकलता है। इसके कारण यह पीने योग्य नहीं है। अस्पताल में तैनात दाई गीता देवी ने बताया कि बिजली नहीं होने से बरसों से टंकी खाली पड़ी है। ऐसे में मरीज के तीमारदार पीने का पानी खुद ही बोतल में भरकर ले आने को मजबूर हैं। वहीं प्रसव कराने के लिए वह भी अस्पताल से करीब 300 मीटर दूर स्थित बस्ती से डिब्बे में पानी भरकर ले आती है।
क्या कहते हैं मुख्य चिकित्सा अधिकारी
पीएचसी पश्चिमशरीरा में इतनी बदहाली संज्ञान में नहीं थी। यदि चिकित्सक बगैर छुट्टी के अस्पताल नहीं आते हैं, तो जांच कराकर वहां जल्द ही किसी दूसरे चिकित्सक की तैनाती की जाएगी। बिजली, पानी समेत अन्य दिक्कतों को भी दूर कराने के लिए संबंधित विभाग के अफसरों को पत्र लिखा जाएगा।
डॉ यूबी सिंह, सीएमओ कौशाम्बी