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गांव-गांव हाईरिस्क प्रेगनेंसी के केस
अमर उजाला ब्यूराे काैश्ााम्बी
Updated Sat, 30 Jan 2016 11:29 PM IST
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कौशाम्बी के गांवों में हाईरिस्क प्रेगनेंसी के मामले सामने आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर मामले खून की कमी के हैं। गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का यह सच मातृत्व सप्ताह के दौरान सामने आ रहा है। शनिवार को हिसामपुर गांव में 21 में से 5 गर्भवती महिलाएं हाईरिस्क प्रेगनेंसी केस की मिलीं।
मातृ-शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए 27 से 3 फरवरी तक जनपद में मातृृत्व सप्ताह का आयोजन किया गया है। इस दौरान चिकित्सकों की टीम के साथ ही एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां गर्भवती महिलाओं को चिह्नित करके उनके स्वास्थ्य का परीक्षण करा रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं को लाकर पंजीकरण, वजन, ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, शुगर, एल्ब्यूमिन की जांच कर हाईरिस्क प्रेगनेंसी की महिलाओं को चिह्नित किया जा रहा है। महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की जानकारी, टिटनेस की सुई, आयरन की गोलियां और गर्भकाल के दौरान पौष्टिक आहार लेने आदि की जानकारियां दी जा रही हैं। शनिवार को चिकित्सकों की टीम ने हिसामपुर में नटों का डेरा, बहादुरपुर, अर्जलीपुर (टेन शाहआलमाबाद), बंधवा, चकसहनपुर आदि गांवों में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच की।
हिसामपुर नटों के डेरा में 15 गर्भवती महिलाओं की जांच का लक्ष्य था। पर टीम को गांव में 21 गर्भवती महिलाएं मिलीं। इनमें 5 महिलाएं हाईरिस्क प्रेगनेंसी वाली थी। बहादुरपुर गांव में 20 में 1 महिला हाईरिस्क प्रेगनेंसी की मिली। चिकित्सकों के मुताबिक ज्यादातर हाईरिस्क प्रेगनेंसी केस शरीर में खून की कमी अथवा कम अंतर पर बच्चों की मां बनने के कारण सामने आ रहे हैं।
मातृ-शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए 27 से 3 फरवरी तक जनपद में मातृृत्व सप्ताह का आयोजन किया गया है। इस दौरान चिकित्सकों की टीम के साथ ही एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां गर्भवती महिलाओं को चिह्नित करके उनके स्वास्थ्य का परीक्षण करा रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं को लाकर पंजीकरण, वजन, ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, शुगर, एल्ब्यूमिन की जांच कर हाईरिस्क प्रेगनेंसी की महिलाओं को चिह्नित किया जा रहा है। महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की जानकारी, टिटनेस की सुई, आयरन की गोलियां और गर्भकाल के दौरान पौष्टिक आहार लेने आदि की जानकारियां दी जा रही हैं। शनिवार को चिकित्सकों की टीम ने हिसामपुर में नटों का डेरा, बहादुरपुर, अर्जलीपुर (टेन शाहआलमाबाद), बंधवा, चकसहनपुर आदि गांवों में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच की।
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हिसामपुर नटों के डेरा में 15 गर्भवती महिलाओं की जांच का लक्ष्य था। पर टीम को गांव में 21 गर्भवती महिलाएं मिलीं। इनमें 5 महिलाएं हाईरिस्क प्रेगनेंसी वाली थी। बहादुरपुर गांव में 20 में 1 महिला हाईरिस्क प्रेगनेंसी की मिली। चिकित्सकों के मुताबिक ज्यादातर हाईरिस्क प्रेगनेंसी केस शरीर में खून की कमी अथवा कम अंतर पर बच्चों की मां बनने के कारण सामने आ रहे हैं।
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