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कौशाम्बी में दुर्घटनाग्रस्त होने से बची कालका मेल
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Tue, 12 Jan 2016 11:04 PM IST
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हावड़ा से दिल्ली जा रही 2311 अप कालका मेल मंगलवार को कौशाम्बी जनपद के अथसरांय स्टेशन के समीप कपलिंग टूटने से दो हिस्सों में बंट गई। हालांकि स्टेशन के समीप कासन होने के कारण ट्रेन की स्पीड कम थी। इसके ट्रेन बड़े हादसे का शिकार होने से बच गई। सिर्फ एक यात्री चंद्रमा प्रसाद पुत्र राम सेवक निवासी उरई थाना चुनार जिला मिर्जापर को हल्की चोटें आई हैं। कपलिंग टूट के झटके पर अनहोनी की आशंका से सहमे चालक ने इमरर्जेसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को आउटर सिंगनल से पहले रोक लिया। कालका मेल के दो हिस्सों में बंटने से दिनभर हावड़ा-दिल्ली रेलमार्ग बाधित रहा। खबर लिखे जाने तक इस रूट की सभी गाड़ियां लूप लाइन से निकाली गई।
हावड़ा से दिल्ली जा रही कालका मेल मंगलवार को दिन में तकरीबन 11 बजकर 07 मिनट पर जैसे ही कौशाम्बी जिले के अथसरांय स्टेशन से आगे बढ़ी। अचानक जोर के झटके के साथ ट्रेन रसोईयान वाले डिब्बे से दो भागों में बंट गई। कपलिंग टूटने और वैक्यूम हटने से रसोईयान से लेकर 12 डिब्बे ट्रेन से अलग हो गए। कपलिंग टूटने से हुई तेज आवाज से यात्री सहम गए। हालांकि कोई कुछ समझ पाता। इससे पहले ही चालक ने अनहोनी की आशंका को भांपते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक ली। ब्रेक लगाने पर इंजन और उससे लगे 7 डिब्बे जहां स्टेशन के आउटर के समीप रूके। वहीं रसोईयान से लेकर 12 डिब्बे करीब 20 मीटर दूरी पर ही खड़े हो गए थे।
उधर, जैसे ही ट्रेन के दो भागों में बंटने की जानकारी यात्रियों को हुई, उनमें हड़कंप मच गया। हालांकि अथसराय स्टेशन पर कासन होने के कारण ट्रेन की स्पीड महज 27 किमी प्रति घंटे की थी। इसके कारण बड़ा हादसा नहीं हुआ। यदि ट्रेन अपनी स्वाभाविक गति में रही होती, तो पीछे के डिब्बे पटरी से उतरकर पलट सकते थे। इससे बड़ी ट्रेन दुर्घटना संभव थी। उधर, जैसे ही अथसराय स्टेशन के समीप कालका मेल के दो हिस्सों में बंटने की सूचना लगी। रेल महकमे में भी हड़कंप मच गया। इलाकाई पुलिस के साथ ही रेलवे अफसर और अभियंता भागकर मौके पर पहुंचे। रेल अभियंताओं की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पैंट्रीकार वाले कोच के लूप के साथ ही पूरा बफर टूटकर नीचे घुस गया था। इसके कारण ही यह हादसा हुआ है।
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कालका मेले के चालक के मुताबिक इलाहाबाद से छूटने के बाद कौशाम्बी के किसी भी स्टेशन पर ट्रेन का स्टापेज नहीं है। पर, जैसे ही ट्रेन भरवारी पहुंची वैक्यूम लगने से रूक गई थी। वहीं भरवारी, सिराथू स्टेशन से आगे बढ़ने पर अथसरांय रेलवे स्टेशन पर रूट कासन है। इसके कारण ट्रेन महज 27 किमी प्रति घंटे की स्पीड से थी। इस दौरान अचानक ट्रेन का प्रेशर घटकर ढाई किलोग्राम हो गया है। प्रेशर घटने पर उन्हें लगा कि किसी ने ट्रेन रोकने के लिए वैक्यूम लगा दिया है। हालांकि इस दौरान तेज आवाज आने पर उन्होंने हादसे की आशंका पर ट्रेन को इमरजेंसी ब्रेक लगाकर आउटर सिंगनल से पहले ही रोक दिया। ट्रेन जैसे ही रूकी, तो पीछे का मंजर देखकर वह सन्न रह गए। ऊपरवाले को याद किया। शुक्र था कि ट्रेन पलटने से बच गई थी। सभी यात्री सुरक्षित थे।
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हावड़ा से दिल्ली जा रही कालका मेल मंगलवार को दिन में तकरीबन 11 बजकर 07 मिनट पर जैसे ही कौशाम्बी जिले के अथसरांय स्टेशन से आगे बढ़ी। अचानक जोर के झटके के साथ ट्रेन रसोईयान वाले डिब्बे से दो भागों में बंट गई। कपलिंग टूटने और वैक्यूम हटने से रसोईयान से लेकर 12 डिब्बे ट्रेन से अलग हो गए। कपलिंग टूटने से हुई तेज आवाज से यात्री सहम गए। हालांकि कोई कुछ समझ पाता। इससे पहले ही चालक ने अनहोनी की आशंका को भांपते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक ली। ब्रेक लगाने पर इंजन और उससे लगे 7 डिब्बे जहां स्टेशन के आउटर के समीप रूके। वहीं रसोईयान से लेकर 12 डिब्बे करीब 20 मीटर दूरी पर ही खड़े हो गए थे।
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उधर, जैसे ही ट्रेन के दो भागों में बंटने की जानकारी यात्रियों को हुई, उनमें हड़कंप मच गया। हालांकि अथसराय स्टेशन पर कासन होने के कारण ट्रेन की स्पीड महज 27 किमी प्रति घंटे की थी। इसके कारण बड़ा हादसा नहीं हुआ। यदि ट्रेन अपनी स्वाभाविक गति में रही होती, तो पीछे के डिब्बे पटरी से उतरकर पलट सकते थे। इससे बड़ी ट्रेन दुर्घटना संभव थी। उधर, जैसे ही अथसराय स्टेशन के समीप कालका मेल के दो हिस्सों में बंटने की सूचना लगी। रेल महकमे में भी हड़कंप मच गया। इलाकाई पुलिस के साथ ही रेलवे अफसर और अभियंता भागकर मौके पर पहुंचे। रेल अभियंताओं की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पैंट्रीकार वाले कोच के लूप के साथ ही पूरा बफर टूटकर नीचे घुस गया था। इसके कारण ही यह हादसा हुआ है।
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कालका मेले के चालक के मुताबिक इलाहाबाद से छूटने के बाद कौशाम्बी के किसी भी स्टेशन पर ट्रेन का स्टापेज नहीं है। पर, जैसे ही ट्रेन भरवारी पहुंची वैक्यूम लगने से रूक गई थी। वहीं भरवारी, सिराथू स्टेशन से आगे बढ़ने पर अथसरांय रेलवे स्टेशन पर रूट कासन है। इसके कारण ट्रेन महज 27 किमी प्रति घंटे की स्पीड से थी। इस दौरान अचानक ट्रेन का प्रेशर घटकर ढाई किलोग्राम हो गया है। प्रेशर घटने पर उन्हें लगा कि किसी ने ट्रेन रोकने के लिए वैक्यूम लगा दिया है। हालांकि इस दौरान तेज आवाज आने पर उन्होंने हादसे की आशंका पर ट्रेन को इमरजेंसी ब्रेक लगाकर आउटर सिंगनल से पहले ही रोक दिया। ट्रेन जैसे ही रूकी, तो पीछे का मंजर देखकर वह सन्न रह गए। ऊपरवाले को याद किया। शुक्र था कि ट्रेन पलटने से बच गई थी। सभी यात्री सुरक्षित थे।