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खतरे में दोआबा की ऐतिहासिक विरासत
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Sun, 06 Sep 2015 11:45 PM IST
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शासन-प्रशासन की अनदेखी के चलते दोआबा की ऐतिहासिक विरासत खतरे में पड़ती जा रही है। बिजली, पानी, सड़क, सुरक्षा और पर्यटकों के ठहरने जैसी मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम नहीं होने के कारण यहां के ऐतिहासिक स्थल दिनोंदिन बदहाल होते जा रहे हैं। व्यवस्थाओं का अभाव होने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। उधर, जिम्मेदार अफसर और जनप्रतिनिधि हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
बता दें कि गंगा-यमुना के मध्य बसे कौशाम्बी जिले का ऐतिहासिक महत्व काफी स्वर्णिम रहा है। यहां यमुना किनारे राजा उदयन का किला, अशोक स्तंभ की लाट है। भगवान बुद्ध की तपोस्थली के साथ जैनधर्म के छठें तीर्थंकर भगवान पद्मप्रभु का जन्म भी यहीं हुआ था। इसके अलावा पभोषा पहाड़, ऐतिहासिक अलवारा झील, सिद्धपीठ मां शीतलाधाम, राजा जयचंद का किला, संत मलूकदास का आश्रम, ख्वाजा कड़क शाह की मजार जैसे स्थल भी जिले की ऐतिहासिकता को चार चांद लगाने के लिए हैं। इन ऐतिहासिक, धार्मिक स्थलों पर आए दिन देशी-विदेशी पर्यटक आते रहते हैं। भगवान बुद्ध की तपोस्थली देखने तो प्रतिवर्ष श्रीलंका, कंबोडिया, म्यांमार आदि देशों से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। बीते वर्ष 2014 में ही 10,485 विदेशी धर्मयात्री कौशाम्बी आए थे।
हैरत की बात है कि इतना कुछ होने के बाद भी कौशाम्बी के पर्यटनस्थल बदहाल पड़े हैं। बुद्ध की तपोस्थली हो या फिर पद्मप्रभु का जन्मस्थान अथवा मां शीतला का दरबार, सभी स्थलों पर जाने वाली सड़कें गड्ढे में तब्दील हैं। आवागमन के साधन नहीं हैं। बिजली, पानी की अव्यवस्था है, तो तीर्थयात्रियों के ठहरने का इंतजाम 18 साल बाद भी नहीं किया जा सका है। गंगा घाटों पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। सुरक्षा का बंदोबस्त नहीं होने के कारण अराजकतत्व ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। दोआबा के इन धार्मिक, ऐतिहासिक स्थलों को सजाने, संवारने और आवागमन आदि की सुविधाएं दुरुस्त करने की मांग जिले के लोग लगातार कर रहे हैं। इसके बाद भी कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है जबकि ऐतिहासिक स्थलों का विकास कर जिले के विकास को नया आयाम दिया जा सकता है।
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बता दें कि गंगा-यमुना के मध्य बसे कौशाम्बी जिले का ऐतिहासिक महत्व काफी स्वर्णिम रहा है। यहां यमुना किनारे राजा उदयन का किला, अशोक स्तंभ की लाट है। भगवान बुद्ध की तपोस्थली के साथ जैनधर्म के छठें तीर्थंकर भगवान पद्मप्रभु का जन्म भी यहीं हुआ था। इसके अलावा पभोषा पहाड़, ऐतिहासिक अलवारा झील, सिद्धपीठ मां शीतलाधाम, राजा जयचंद का किला, संत मलूकदास का आश्रम, ख्वाजा कड़क शाह की मजार जैसे स्थल भी जिले की ऐतिहासिकता को चार चांद लगाने के लिए हैं। इन ऐतिहासिक, धार्मिक स्थलों पर आए दिन देशी-विदेशी पर्यटक आते रहते हैं। भगवान बुद्ध की तपोस्थली देखने तो प्रतिवर्ष श्रीलंका, कंबोडिया, म्यांमार आदि देशों से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। बीते वर्ष 2014 में ही 10,485 विदेशी धर्मयात्री कौशाम्बी आए थे।
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हैरत की बात है कि इतना कुछ होने के बाद भी कौशाम्बी के पर्यटनस्थल बदहाल पड़े हैं। बुद्ध की तपोस्थली हो या फिर पद्मप्रभु का जन्मस्थान अथवा मां शीतला का दरबार, सभी स्थलों पर जाने वाली सड़कें गड्ढे में तब्दील हैं। आवागमन के साधन नहीं हैं। बिजली, पानी की अव्यवस्था है, तो तीर्थयात्रियों के ठहरने का इंतजाम 18 साल बाद भी नहीं किया जा सका है। गंगा घाटों पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। सुरक्षा का बंदोबस्त नहीं होने के कारण अराजकतत्व ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। दोआबा के इन धार्मिक, ऐतिहासिक स्थलों को सजाने, संवारने और आवागमन आदि की सुविधाएं दुरुस्त करने की मांग जिले के लोग लगातार कर रहे हैं। इसके बाद भी कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है जबकि ऐतिहासिक स्थलों का विकास कर जिले के विकास को नया आयाम दिया जा सकता है।
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