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कौशाम्बी जेल में लगातार हो रहीं मौतें
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Thu, 19 Mar 2015 12:20 AM IST
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मंझनपुर। कौशाम्बी का जिला कारागार बंदियों की संदिग्ध मौतों से लगातार सुर्खियों में रहा है। सालभर में ही यहां तीन-तीन बंदियों की संदिग्ध परिस्थितियों में जान जा चुकी है। इससे पहले हुई बंदियों की मौत पर घरवाले हत्या का आरोप लगाते हुए जेल प्रशासन को कटघरे में भी खड़ा कर चुके हैं। इसके बाद भी जेल में संदिग्ध मौतों का सिलसिला जारी है।
बता दें कि कौशाम्बी में पुलिस लाइन के समीप 18.50 करोड़ रुपये की लागत से जिला कारागार का निर्माण कराया गया है। सात वर्ष में बनकर तैयार हुई जेल 18 दिसंबर 2013 को बंदियों के लिए खोली गई थी। 740 बंदियों की क्षमता वाली यह जेल चालू होते ही आरोपों में घिरने लगी थी। यहां विभिन्न आरोपों में बंद आरोपी आए दिन अपने वकीलों के माध्यम से उत्पीड़न, मारपीट और पैसा वसूली का आरोप लगाते रहे हैं। इन्हीं आरोपों के साथ ही साथ जेल में बंदियों की लगातार संदिग्धदशा में मौतें भी हो रही हैं। एक साल के भीतर इस जेल में तीन-तीन बंदियों की रहस्यमय हालात में मौत हो चुकी हैं। पहली घटना 30 अगस्त 2014 को हुई थी।
जेल में दुराचार के मामले में निरुद्ध कोखराज गांव के दिलीप मौर्या का शव बैरिक के शौचालय में फंदे से लटकता मिला था। जेल के भीतर अगस्त महीने में हुई मौत का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था। इसी बीच 25 नवंबर 2014 को हत्या के मामले में जेल में बंद श्रीकृष्ण मिश्र (35) निवासी कैनी (मंझनपुर) की भी रहस्यमय परस्थितियों में मौत हो गई। जेल कारागार में दो-दो बंदियों की मौत के कारणों का रहस्य सामने आता। इससे पहले ही बुधवार यानि 18 मार्च की सुबह जेल के एक और बंदी मोहम्मद नईम निवासी बादशाही मंडी इलाहाबाद की संदिग्ध दशा में मौत हो गई।
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बंदी मोहम्मद नईम अहमद की जेल में हुई मौत का रहस्य पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही खुलेगी। बंदी की मौत बीमारी से हुई है या फिर मौत के पीछे कोई और रहस्य है। इसे लेकर परिजनों के साथ जेल प्रशासन की नजरें डॉक्टरों की रिपोर्ट पर लगी हैं। हालांकि मृतक के परिजन, ससुर और अन्य रिश्तेदार इस मामले में फिलहाल चुप्पी साधे हैं। वहीं जिला कारागार के अधिकारी और जेल के डॉक्टर मौत को बीमारी बता रहे हैं। उधर, सीएमओ डॉ. आरके मिश्रा ने बताया कि बुधवार को हुई बंदी मोहम्मद नईम की मौत का पोस्टमार्टम 4 डाक्टरों के पैनल से किया गया। वहीं पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई गई है।
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बता दें कि कौशाम्बी में पुलिस लाइन के समीप 18.50 करोड़ रुपये की लागत से जिला कारागार का निर्माण कराया गया है। सात वर्ष में बनकर तैयार हुई जेल 18 दिसंबर 2013 को बंदियों के लिए खोली गई थी। 740 बंदियों की क्षमता वाली यह जेल चालू होते ही आरोपों में घिरने लगी थी। यहां विभिन्न आरोपों में बंद आरोपी आए दिन अपने वकीलों के माध्यम से उत्पीड़न, मारपीट और पैसा वसूली का आरोप लगाते रहे हैं। इन्हीं आरोपों के साथ ही साथ जेल में बंदियों की लगातार संदिग्धदशा में मौतें भी हो रही हैं। एक साल के भीतर इस जेल में तीन-तीन बंदियों की रहस्यमय हालात में मौत हो चुकी हैं। पहली घटना 30 अगस्त 2014 को हुई थी।
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जेल में दुराचार के मामले में निरुद्ध कोखराज गांव के दिलीप मौर्या का शव बैरिक के शौचालय में फंदे से लटकता मिला था। जेल के भीतर अगस्त महीने में हुई मौत का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था। इसी बीच 25 नवंबर 2014 को हत्या के मामले में जेल में बंद श्रीकृष्ण मिश्र (35) निवासी कैनी (मंझनपुर) की भी रहस्यमय परस्थितियों में मौत हो गई। जेल कारागार में दो-दो बंदियों की मौत के कारणों का रहस्य सामने आता। इससे पहले ही बुधवार यानि 18 मार्च की सुबह जेल के एक और बंदी मोहम्मद नईम निवासी बादशाही मंडी इलाहाबाद की संदिग्ध दशा में मौत हो गई।
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बंदी मोहम्मद नईम अहमद की जेल में हुई मौत का रहस्य पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही खुलेगी। बंदी की मौत बीमारी से हुई है या फिर मौत के पीछे कोई और रहस्य है। इसे लेकर परिजनों के साथ जेल प्रशासन की नजरें डॉक्टरों की रिपोर्ट पर लगी हैं। हालांकि मृतक के परिजन, ससुर और अन्य रिश्तेदार इस मामले में फिलहाल चुप्पी साधे हैं। वहीं जिला कारागार के अधिकारी और जेल के डॉक्टर मौत को बीमारी बता रहे हैं। उधर, सीएमओ डॉ. आरके मिश्रा ने बताया कि बुधवार को हुई बंदी मोहम्मद नईम की मौत का पोस्टमार्टम 4 डाक्टरों के पैनल से किया गया। वहीं पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई गई है।