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कुपोषित बच्चों की निगरानी करेंगी आशा बहुएं
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Thu, 12 Feb 2015 12:14 AM IST
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मंझनपुर। बच्चों में कुपोषण के खात्मे की कवायद स्वास्थ्य विभाग ने शुरू कर दी गई। इसके लिए महिला स्वास्थ्य कार्यकत्री आशाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके लिए जिला अस्पताल में पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू किया गया है। इसमें जिलेभर की 30 आशाओं की टोली को हुनरमंद बनाया जाएगा।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत बच्चों को कुपोषण से बचाने की जिम्मेदारी अब महिला स्वास्थ्य कार्यकत्री आशा निभाएंगी। इसके लिए उन्हें जरूरी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला सयुंक्त अस्पताल में शुरू किए गए पांच दिवसीय माड्यूल प्रशिक्षण में ट्रेनर महरोज फात्मा ने आशाओं को बच्चों में कुपोषण के लक्षण, उन्हें चिह्नित करने, कुपोषित बच्चों का अस्पताल में दाखिल कराने और उनकी देखभाल की जानकारी दी।
ट्रेनर बीएल श्रीवास्तव ने बताया कि प्रसव काल में युवतियों के खान-पान में ध्यान नहीं देने से ही मां-बच्चे दोनों कुपोषण के शिकार होते हैं। उन्होंने आशा कार्यकत्रियों को अपने क्षेत्र के गांव-गांव घूमकर महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने का आह्वान किया। कहा कि जब युवतियां स्वस्थ रहेंगी, तो उनके बच्चों की भी सेहत ठीक रहेगी। सीएमओ डॉ. आरके मिश्र ने बताया कि गांवों में कुपोषण की एक बड़ी समस्या है। इसे जागरूकता के माध्यम से ही दूर किया जा सकता है। विभाग के इस सबसे अहम काम में आशा स्वास्थ्य कार्यकत्रियों की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है।
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राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत बच्चों को कुपोषण से बचाने की जिम्मेदारी अब महिला स्वास्थ्य कार्यकत्री आशा निभाएंगी। इसके लिए उन्हें जरूरी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला सयुंक्त अस्पताल में शुरू किए गए पांच दिवसीय माड्यूल प्रशिक्षण में ट्रेनर महरोज फात्मा ने आशाओं को बच्चों में कुपोषण के लक्षण, उन्हें चिह्नित करने, कुपोषित बच्चों का अस्पताल में दाखिल कराने और उनकी देखभाल की जानकारी दी।
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ट्रेनर बीएल श्रीवास्तव ने बताया कि प्रसव काल में युवतियों के खान-पान में ध्यान नहीं देने से ही मां-बच्चे दोनों कुपोषण के शिकार होते हैं। उन्होंने आशा कार्यकत्रियों को अपने क्षेत्र के गांव-गांव घूमकर महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने का आह्वान किया। कहा कि जब युवतियां स्वस्थ रहेंगी, तो उनके बच्चों की भी सेहत ठीक रहेगी। सीएमओ डॉ. आरके मिश्र ने बताया कि गांवों में कुपोषण की एक बड़ी समस्या है। इसे जागरूकता के माध्यम से ही दूर किया जा सकता है। विभाग के इस सबसे अहम काम में आशा स्वास्थ्य कार्यकत्रियों की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है।
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