{"_id":"576d824c4f1c1b0550b47e92","slug":"food-corporation-of-india-in-kaushambi","type":"story","status":"publish","title_hn":"एफसीआई गोदाम नेवादा में हो रही कालाबाजारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एफसीआई गोदाम नेवादा में हो रही कालाबाजारी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sat, 25 Jun 2016 12:26 AM IST
विज्ञापन
other
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विकास खंड नेवादा स्थित एफसीआई का गोदाम राशन के कालाबाजारियों की गिरफ्त में है। इनके इशारे पर उठान के दौरान 20 से 30 फीसदी कोटे का राशन कटौती कर डीलरों को दे दिया जाता है। इस काले कारोबार में आपूर्ति निरीक्षक, मार्केटिंग इंस्पेक्टर की भूमिका बराबर की रहती है। कालाबाजारी के इस खेल में छिन रहे गरीबों के निवाले से कोटेदार, डीलर, इंस्पेक्टर मालामाल हो रहे हैं।
विकास खंड नेवादा स्थित गोदाम से कोटे की 76 दुकानें संबद्ध हैं। इसमें 69 दुकानें ब्लॉक क्षेत्र के गांवों की है और सात नगर पंचायत सरांय अकिल की।
इन दुकानों के राशन का उठान नेवादा स्थित एफसीआई गोदाम से होता है। गरीबों को कोटे के सहारे निवाला उपलब्ध कराने वाले यह गोदाम कालाबाजारी करने वाले डीलरों की गिरफ्त में हो गया है। बताते चलें कि गोदाम से प्रत्येक माह राशन उठान करने के लिए मंझनपुर स्थित एफसीआई से 20 तारीख को पर्ची दी जाती है। इस पर्ची को लेने का काम कोटेदार को करना चाहिए लेकिन वह इससे कोसों दूर रहता है। यह सारा काम गोदाम में सक्रिय डीलर करते हैं। पर्ची निकलवाने के बाद डीलर अपनी जेब से कोटेदार को मिलने वाले राशन का पैसा जमा करते हैं। पैसा जमा करने की रसीद लेकर वह तहसील कार्यालय में रहने वाले आपूर्ति निरीक्षक के पास जाते हैं।
यहां पर वह प्रति बोरी दस रुपये और प्रति लीटर एक रुपये की दर से निरीक्षक को कमीशन देकर हस्ताक्षर कराते हैं। इसके बाद गोदाम पहुंचकर जमा किए गये रुपये के हिसाब से बाजार भाव गेहूं और चावल कोटेदार के हिस्से से लेते हैं। बचा हुआ राशन ही कोटेदार को दिया जाता है। इस खेल में कोटेदार को फायदा यह होता है कि उसे जेब से गेहूं और चावल का पैसा नहीं जमा करना पड़ता। वहीं दूसरी ओर कोटेदार मनमानी पर उतारू हो जाता है। वह कार्डधारकों को तीन माह के भीतर दो बार राशन बांटता है और एक माह का पूरा बेच लेता है। कुल मिलाकर गोदाम से कोटेदार तक हो रहे इस खेल में सब मालामाल हो रहे हैं। डाका तो सिर्फ गरीबों के निवाले पर पड़ रहा है। ऐसा नहीं है कि गोदाम से कोटे की दुकान तक जारी इस खेल की जानकारी जिले के जिम्मेदारों को नहीं है। लेकिन बंधी मोटी रकम के चलते वह भी अंजान बने रहते हैं।
विज्ञापन
नेवादा गोदाम में मौजूदा समय में आधा दर्जन डीलर सक्रिय हैं। इनके द्वारा जब गरीबों के राशन की कालाबाजारी की जाती है तो इलाकाई लोग इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को समय-समय पर देते हैं लेकिन जैसे ही अधिकारी छापेमारी के लिए निकलते हैं वैसे ही डीलर को विभागीय लोगों से सूचना पहुंच जाती है। इसके चलते इन डीलरों को पकड़ पाना संभव नहीं हो पाता।
नेवादा गोदाम से राशन की कालाबाजारी का खुलासा पिछले साल हुआ था। सूचना पर पहुंचे विभागीय जिम्मेदारों ने सराय अकिल कस्बे के एक डीलर के घर से डेढ़ सौ बोरी खाद्यान्न बरामद किया। मामले में सराय अकिल थाने में आरोपी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज है। थाना-पुलिस होने के बाद भी डीलर ने इस काले कारोबार से दूरी नहीं बनाई। आज भी उसके द्वारा नेवादा गोदाम में सेटिंग कर गरीबों के राशन की कालाबाजारी बदस्तूर जारी है।
गोदामों से उठान महीने की 23 तारीख से होता है। गोदाम में सत्यापन की जिम्मेदारी एसडीएम की होती है। कोटेदारों के राशन का सत्यापन विभिन्न कर्मचारियों से कराया जाता है। यदि गरीबों के राशन की कालाबाजारी होती है तो औचक छापेमारी कर मामले में संबंधित के खिलाफ शिकंजा कसा जाएगा।
अनूप तिवारी, डीएसओ
विज्ञापन
विकास खंड नेवादा स्थित गोदाम से कोटे की 76 दुकानें संबद्ध हैं। इसमें 69 दुकानें ब्लॉक क्षेत्र के गांवों की है और सात नगर पंचायत सरांय अकिल की।
इन दुकानों के राशन का उठान नेवादा स्थित एफसीआई गोदाम से होता है। गरीबों को कोटे के सहारे निवाला उपलब्ध कराने वाले यह गोदाम कालाबाजारी करने वाले डीलरों की गिरफ्त में हो गया है। बताते चलें कि गोदाम से प्रत्येक माह राशन उठान करने के लिए मंझनपुर स्थित एफसीआई से 20 तारीख को पर्ची दी जाती है। इस पर्ची को लेने का काम कोटेदार को करना चाहिए लेकिन वह इससे कोसों दूर रहता है। यह सारा काम गोदाम में सक्रिय डीलर करते हैं। पर्ची निकलवाने के बाद डीलर अपनी जेब से कोटेदार को मिलने वाले राशन का पैसा जमा करते हैं। पैसा जमा करने की रसीद लेकर वह तहसील कार्यालय में रहने वाले आपूर्ति निरीक्षक के पास जाते हैं।
विज्ञापन
यहां पर वह प्रति बोरी दस रुपये और प्रति लीटर एक रुपये की दर से निरीक्षक को कमीशन देकर हस्ताक्षर कराते हैं। इसके बाद गोदाम पहुंचकर जमा किए गये रुपये के हिसाब से बाजार भाव गेहूं और चावल कोटेदार के हिस्से से लेते हैं। बचा हुआ राशन ही कोटेदार को दिया जाता है। इस खेल में कोटेदार को फायदा यह होता है कि उसे जेब से गेहूं और चावल का पैसा नहीं जमा करना पड़ता। वहीं दूसरी ओर कोटेदार मनमानी पर उतारू हो जाता है। वह कार्डधारकों को तीन माह के भीतर दो बार राशन बांटता है और एक माह का पूरा बेच लेता है। कुल मिलाकर गोदाम से कोटेदार तक हो रहे इस खेल में सब मालामाल हो रहे हैं। डाका तो सिर्फ गरीबों के निवाले पर पड़ रहा है। ऐसा नहीं है कि गोदाम से कोटे की दुकान तक जारी इस खेल की जानकारी जिले के जिम्मेदारों को नहीं है। लेकिन बंधी मोटी रकम के चलते वह भी अंजान बने रहते हैं।
विज्ञापन
नेवादा गोदाम में मौजूदा समय में आधा दर्जन डीलर सक्रिय हैं। इनके द्वारा जब गरीबों के राशन की कालाबाजारी की जाती है तो इलाकाई लोग इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को समय-समय पर देते हैं लेकिन जैसे ही अधिकारी छापेमारी के लिए निकलते हैं वैसे ही डीलर को विभागीय लोगों से सूचना पहुंच जाती है। इसके चलते इन डीलरों को पकड़ पाना संभव नहीं हो पाता।
नेवादा गोदाम से राशन की कालाबाजारी का खुलासा पिछले साल हुआ था। सूचना पर पहुंचे विभागीय जिम्मेदारों ने सराय अकिल कस्बे के एक डीलर के घर से डेढ़ सौ बोरी खाद्यान्न बरामद किया। मामले में सराय अकिल थाने में आरोपी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज है। थाना-पुलिस होने के बाद भी डीलर ने इस काले कारोबार से दूरी नहीं बनाई। आज भी उसके द्वारा नेवादा गोदाम में सेटिंग कर गरीबों के राशन की कालाबाजारी बदस्तूर जारी है।
गोदामों से उठान महीने की 23 तारीख से होता है। गोदाम में सत्यापन की जिम्मेदारी एसडीएम की होती है। कोटेदारों के राशन का सत्यापन विभिन्न कर्मचारियों से कराया जाता है। यदि गरीबों के राशन की कालाबाजारी होती है तो औचक छापेमारी कर मामले में संबंधित के खिलाफ शिकंजा कसा जाएगा।
अनूप तिवारी, डीएसओ