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पूर्व एसडीएम का चहेता ले गया रजिस्टर
कौशाम्बी ब्यूरो
Updated Sat, 22 Oct 2016 12:51 AM IST
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चायल तहसील के रिकार्ड रूम से चोरी हुए मालिकाना रजिस्टर-06 की रिपोर्ट पिपरी थाने में दर्ज करा दी गई है। रजिस्ट्रार कानूनगो ने पूर्व एसडीएम के करीबी भू-माफिया अमित केशरवानी पर चोरी की शंका जाहिर करते हुए नामजद किया है। पिपरी थाने की पुलिस मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में रजिस्ट्रार कानूनगो के खिलाफ तहसीलदार ने विभागीय कार्रवाई भी शुरू करा दी है।
चायल तहसील के रिकार्ड रूम से पखवारा भर पहले अति महत्वपूर्ण मालिकाना रजिस्टर-06 गायब हो गया था। पहले तो रजिस्ट्रार भीमसेन व तहसीलदार बीडी गुप्ता ने मामले में चुप्पी साधे रखी। एसडीएम अश्विनी श्रीवास्तव को पता चला तो उन्होंने तहसीलदार से स्पष्टीकरण मांगा। इससे तहसील में हड़कंप मच गया था। अमर उजाला ने इस खबर को गुरुवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया तो रजिस्ट्रार कानूनगो भीमसेन ने पिपरी थाने में भू-माफिया अमित केशरवानी पर रजिस्टर को चोरी करने की शंका जताते हुए एफआइआर दर्ज करा दी। अमित केशरवानी एक पूर्व एसडीएम का बेहद करीबी माना जाता है। अमित केशरवानी के खिलाफ भूमि संबंधी विवाद के कई मामले चायल तहसील में लंबित चल रहे हैं। ग्राम सभा व रेलवे की भूमि पर कब्जा करने के अलावा तालाबी नंबर पर भी कब्जा करने का आरोप है। सरकारी संपत्तियों पर कब्जा कर अमित ने प्लाटिंग कर करोड़ों रुपये में बेचा है। पिपरी इंस्पेक्टर भाष्कर मिश्र का कहना है कि शक के आधार पर अमित केशरवानी निवासी परसरा को नामजद किया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
रजिस्टर गायब करने के पीछे तहसील कर्मी एक नहीं कारण गिना रहे हैं। तहसील कर्मियों का कहना है कि चायल तहसील में तैनात एक पूर्व एसडीएम के करीबी अमित केशरवानी के खिलाफ कई मामले चल रहे हैं। पूर्व एसडीएम ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अमित की मदद की थी। इसके बाद अमित के सहयोग से उन्होंने तालाबी नंबर की भूमि पर खुद का कालेज भी निर्मित करा लिया। ये मामला भी एसडीएम कोर्ट में फिलहाल लंबित चल रहा है। चर्चा है कि इस मामले में कार्रवाई कर एसडीएम ने आदेश जारी किया था, जिसे गायब रजिस्टर में दर्ज होना था। इसीलिए अमित ने रजिस्टर गायब कर दिया।
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चायल तहसील के रिकार्ड रूम से पखवारा भर पहले अति महत्वपूर्ण मालिकाना रजिस्टर-06 गायब हो गया था। पहले तो रजिस्ट्रार भीमसेन व तहसीलदार बीडी गुप्ता ने मामले में चुप्पी साधे रखी। एसडीएम अश्विनी श्रीवास्तव को पता चला तो उन्होंने तहसीलदार से स्पष्टीकरण मांगा। इससे तहसील में हड़कंप मच गया था। अमर उजाला ने इस खबर को गुरुवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया तो रजिस्ट्रार कानूनगो भीमसेन ने पिपरी थाने में भू-माफिया अमित केशरवानी पर रजिस्टर को चोरी करने की शंका जताते हुए एफआइआर दर्ज करा दी। अमित केशरवानी एक पूर्व एसडीएम का बेहद करीबी माना जाता है। अमित केशरवानी के खिलाफ भूमि संबंधी विवाद के कई मामले चायल तहसील में लंबित चल रहे हैं। ग्राम सभा व रेलवे की भूमि पर कब्जा करने के अलावा तालाबी नंबर पर भी कब्जा करने का आरोप है। सरकारी संपत्तियों पर कब्जा कर अमित ने प्लाटिंग कर करोड़ों रुपये में बेचा है। पिपरी इंस्पेक्टर भाष्कर मिश्र का कहना है कि शक के आधार पर अमित केशरवानी निवासी परसरा को नामजद किया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
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रजिस्टर गायब करने के पीछे तहसील कर्मी एक नहीं कारण गिना रहे हैं। तहसील कर्मियों का कहना है कि चायल तहसील में तैनात एक पूर्व एसडीएम के करीबी अमित केशरवानी के खिलाफ कई मामले चल रहे हैं। पूर्व एसडीएम ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अमित की मदद की थी। इसके बाद अमित के सहयोग से उन्होंने तालाबी नंबर की भूमि पर खुद का कालेज भी निर्मित करा लिया। ये मामला भी एसडीएम कोर्ट में फिलहाल लंबित चल रहा है। चर्चा है कि इस मामले में कार्रवाई कर एसडीएम ने आदेश जारी किया था, जिसे गायब रजिस्टर में दर्ज होना था। इसीलिए अमित ने रजिस्टर गायब कर दिया।
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